Kawad Yatra Samagri 2025: सावन मास के आरंभ होते ही शिवभक्तों की आस्था की प्रतीक कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाती है। इस यात्रा में श्रद्धालु पवित्र नदियों से जल भरकर लंबी दूरी तय करते हैं और उस जल को शिवलिंग या ज्योतिर्लिंग पर अर्पित करते हैं। सावन के सोमवार, प्रदोष व्रत और शिवरात्रि के दिन कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि इन शुभ तिथियों पर शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यदि आप भी इस साल कांवड़ यात्रा में भाग लेने की योजना बना रहे हैं, तो आपको कुछ जरूरी नियमों को ध्यान में रखना होगा।
Kawad Yatra 2025: पहली बार करने जा रहे हैं कांवड़ यात्रा? जान लें जरूरी नियम और सामग्री
सावन के सोमवार, प्रदोष व्रत और शिवरात्रि के दिन कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। यदि आप भी इस साल कांवड़ यात्रा में भाग लेने की योजना बना रहे हैं, तो आपको कुछ जरूरी नियमों को ध्यान में रखना होगा।
कांवड़ यात्रा 2025
इस वर्ष कांवड़ यात्रा की शुरुआत 11 जुलाई 2025, शुक्रवार से होगी, जो कि सावन मास का पहला दिन है। यह यात्रा 23 जुलाई 2025 को सावन शिवरात्रि के दिन जलाभिषेक के साथ पूर्ण होगी। हालांकि देवघर जैसे तीर्थस्थलों पर पूरे सावन माह तक श्रद्धालु जल चढ़ाने के लिए कांवड़ यात्रा करते हैं।
कांवड़ यात्रा के लिए सामग्री
यदि आप पहली बार कांवड़ यात्रा पर जा रहे हैं, तो कुछ वस्तुओं को अपने साथ अवश्य रखें। इसमें कांवड़ (लकड़ी या बांस से बनी हुई), गंगा जल भरने के लिए पात्र, सजावट के लिए लाल-पीले वस्त्र और पुष्प, भगवान शिव की मूर्ति, फोटो, त्रिशूल, डमरू, रुद्राक्ष आदि शामिल हैं।
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कांवड़ यात्रा के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें
कांवड़ यात्रा एक पवित्र धार्मिक अनुष्ठान है, इसलिए इस दौरान धूम्रपान, शराब, भांग या किसी भी नशीली वस्तु से दूरी बनाकर रखें। यात्रा के दौरान शुद्ध आचरण, शुद्ध वाणी और मन की पवित्रता बनाए रखें।
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