फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Ahilya Bai Jayanti Vishesh: शिव की उपासक और मंदिरों की पुनर्निर्माता, जानिए कौन थीं रानी अहिल्या बाई होलकर

Sat, 31 May 2025 07:51 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Sat, 31 May 2025 07:51 AM IST
सार

Ahilya Bai Jayanti: धर्म, न्याय और सेवा की प्रतीक रानी अहिल्या बाई होलकर को भारत की महान शिव भक्त और दूरदर्शी शासिका के रूप में याद किया जाता है। उनकी 300वीं जयंती पर आइए जानें, क्यों वे इतिहास में 'मातोश्री' के रूप में अमर हैं।

विज्ञापन
Ahilya Bai Jayanti Know the Queen Ahilya Bai Holkar a Symbol of Shiva Devotion Justice and Legacy
अहिल्या बाई जयंती - फोटो : adobe stock

Ahilya Bai Jayanti Vishesh:  अहिल्या बाई होलकर का नाम भारतीय इतिहास में नारी नेतृत्व, सेवा और धर्म के अद्वितीय उदाहरण के रूप में लिया जाता है। वे न केवल मालवा राज्य की एक न्यायप्रिय और दूरदर्शी शासिका थीं, बल्कि उन्होंने धर्म, संस्कृति और समाज के उत्थान के लिए भी महान कार्य किए। उनके योगदान को महेश्वर, इंदौर से लेकर काशी और सोमनाथ तक पूरे देश में याद किया जाता है।


Ganga Dussehra 2025: गंगा दशहरा पर जरूर लाएं घर पर ये शुभ चीजें, होगा आपके घर मां लक्ष्मी का वास
अपने 28 वर्षों के शासनकाल में अहिल्या बाई ने सैकड़ों धार्मिक स्थलों का पुनर्निर्माण करवाया। उन्होंने बारह ज्योतिर्लिंगों, चार धाम, और कई प्रमुख तीर्थों जैसे अयोध्या, वृंदावन, बद्रीनाथ, रामेश्वरम, काशी और द्वारका में मंदिरों का जीर्णोद्धार कराकर उन्हें भक्तों के लिए फिर से सुलभ बनाया। उनकी सोच यह थी कि धर्म और सेवा, शासन का अभिन्न हिस्सा होने चाहिए।
June 2025 Festivals: गुप्त नवरात्रि से लेकर रथ यात्रा तक, जानें जून माह के प्रमुख त्योहारों की तिथि
आज भी महेश्वर और इंदौर सहित महाराष्ट्र के कई हिस्सों में लोग उन्हें ‘मातोश्री’ कहकर आदर देते हैं और उन्हें देवी तुल्य मानते हैं। उनकी सादगी, श्रद्धा और सेवा भाव ने उन्हें जनता के दिलों में अमर कर दिया है। 31 मई 2025 को अहिल्या बाई की 300वीं  जयंती है। इसी अवसर पर आइए जानते हैं रानी अहिल्या बाई कौन थीं और क्यों कहलायीं वो भगवान शिव की सबसे बड़ी उपासक। 
Mangal Gochar 2025: 7 जून से इन तीन राशि वालों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, कार्यों में बरतें सावधानी

Ahilya Bai Jayanti Know the Queen Ahilya Bai Holkar a Symbol of Shiva Devotion Justice and Legacy
अहिल्या बाई जयंती - फोटो : adobe stock

अहिल्या बाई का जन्म और शासनकाल
अहिल्या बाई होलकर का जीवन साधारण जन्म से असाधारण नेतृत्व तक का प्रेरणादायक उदाहरण है। उनका जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के चौंडी गांव में एक सामान्य परिवार में हुआ था। कम उम्र से ही उनमें धर्म, सेवा और नेतृत्व के गुण दिखाई देने लगे थे। जब वे लगभग 8 से 10 वर्ष की थीं, तब उनका विवाह मराठा साम्राज्य के प्रतिष्ठित योद्धा मल्हारराव होलकर के पुत्र खंडेराव होलकर से हुआ। दुर्भाग्यवश, कुछ ही वर्षों में पहले पति और फिर ससुर की मृत्यु हो गई।

इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद अहिल्या बाई ने हार नहीं मानी। 1767 में उन्होंने मालवा राज्य की बागडोर संभाली, और लगभग 28 वर्षों तक यानी 1795 तक उन्होंने धर्म, न्याय और जनसेवा के मूल्यों पर आधारित शासन चलाया। उनका कार्यकाल आज भी आदर्श शासन व्यवस्था के रूप में याद किया जाता है।

Ahilya Bai Jayanti Know the Queen Ahilya Bai Holkar a Symbol of Shiva Devotion Justice and Legacy
Ahilya Bai Jayanti - फोटो : freepik

भगवान शिव की सबसे बड़ी उपासक 
अहिल्या बाई होलकर जैसी शासिका इतिहास में बहुत कम देखने को मिली हैं। वे न सिर्फ एक कुशल प्रशासक थीं, बल्कि उन्हें रावण के बाद भगवान शिव की सबसे बड़ी उपासक भी माना जाता है। उनकी मां नर्मदा के प्रति अटूट श्रद्धा थी, और यही कारण था कि उन्होंने इंदौर छोड़कर महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया। उनके व्यक्तित्व में एक अनोखा संतुलन थावे सत्ता में होते हुए भी सादगी और विनम्रता की मिसाल थीं। अहिल्या बाई ने अपना संपूर्ण जीवन धर्म, भक्ति और जनसेवा को समर्पित कर दिया। उनकी निस्वार्थ सेवा और धार्मिक आस्था को देखते हुए लोग उन्हें आज भी देवी का स्वरूप मानते हैं और श्रद्धा से याद करते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Ahilya Bai Jayanti Know the Queen Ahilya Bai Holkar a Symbol of Shiva Devotion Justice and Legacy
अहिल्या बाई जयंती - फोटो : adobe stock

अहिल्याबाई की भक्ति का प्रमाण 
उनकी भगवान शिव के प्रति भक्ति इतनी गहरी थी कि उन्होंने स्वयं सिंहासन पर बैठना उचित नहीं समझा। उन्होंने अपने दरबार के सिंहासन पर शिव जी की प्रतिमा स्थापित की और स्वयं नीचे एक साधारण गद्दी पर बैठकर राज्य का संचालन करती थीं। उन्होंने देशभर में मंदिर, बावड़ियां, स्नान घाट और अन्य धार्मिक संरचनाओं का निर्माण कराया। साथ ही औरंगजेब द्वारा ध्वस्त किए गए कई मंदिरों और प्राचीन धरोहरों का पुनर्निर्माण भी उनके प्रयत्नों से संभव हो सका। अहिल्या बाई का जीवन सेवा, श्रद्धा और सादगी का जीवंत उदाहरण है।

विज्ञापन
Ahilya Bai Jayanti Know the Queen Ahilya Bai Holkar a Symbol of Shiva Devotion Justice and Legacy
Ahilya Bai Jayanti - फोटो : मंदिर प्रशासन

मंदिरों के पुनर्निर्माण में अहिल्या बाई का अमर योगदान
अहिल्या बाई होलकर ने देश भर में प्राचीन और पवित्र मंदिरों की दुर्दशा को देखकर उनके पुनर्निर्माण का महत्त्वपूर्ण कार्य अपने निजी संसाधनों से प्रारंभ किया। उस समय कई धार्मिक स्थल, जो सदियों से श्रद्धालुओं के लिए पूजा-अर्चना के केंद्र थे, टूट-फूट और खंडहर की स्थिति में थे। ऐसे मंदिरों की देखभाल और पुनर्स्थापना के लिए किसी सरकारी सहायता का अभाव था, परंतु अहिल्या बाई ने इस जिम्मेदारी को खुद अपने कंधों पर लिया। उन्होंने विशेष रूप से 12 ज्योतिर्लिंगों, चार धामों और सप्तपुरी जैसे धार्मिक स्थलों को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया। इन तीर्थस्थलों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत बड़ा है, और इनके संरक्षण से पूरे देश की आस्था और परंपराएं जीवित रहीं। काशी के विश्वनाथ मंदिर, जो भगवान शिव का एक अत्यंत पवित्र स्थान है, का पुनर्निर्माण भी उनके प्रयासों से संभव हो सका। इसके अतिरिक्त, सोमनाथ मंदिर, जो भारत के सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित शिव मंदिरों में से एक है, गया, जो एक प्रमुख पौराणिक तीर्थस्थल है, तथा उज्जैन के महाकाल मंदिर का जीर्णोद्धार भी उनके योगदान से हुआ।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed