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पितृ पक्ष: नौकरी की व्यस्तता के कारण 15 दिन तर्पण न कर पाएं तो किस दिन करें श्राद्ध? जानें शास्त्रों के नियम

Fri, 11 Sep 2026 10:34 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Fri, 11 Sep 2026 10:34 AM IST
सार

पितृ पक्ष में 15 दिन तर्पण या श्राद्ध न कर पाने की स्थिति में क्या करें? जानें शास्त्रों के अनुसार किस दिन श्राद्ध करना उचित माना गया है और पितरों की पूजा से जुड़े जरूरी नियम।

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Pitru Paksha 2026 Can’t Perform Tarpan Every Day  Due to Work  Know the Shastra Rules
pitru paksha 2026 - फोटो : amar ujala

पितृ पक्ष को हिंदू धर्म में पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन जैसे कर्म करते हैं। हालांकि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नौकरी, ऑफिस की जिम्मेदारियों और दूसरी व्यस्तताओं के कारण हर व्यक्ति के लिए पितृ पक्ष के सभी दिनों में पूजा-पाठ और तर्पण करना संभव नहीं होता। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि अगर 15 दिनों तक रोज तर्पण नहीं कर पाए तो क्या पितरों का श्राद्ध अधूरा माना जाएगा? क्या किसी एक दिन श्राद्ध करके पूरे पितृ पक्ष का धार्मिक कर्तव्य पूरा किया जा सकता है? शास्त्रीय परंपराओं में ऐसी परिस्थितियों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाओं का उल्लेख मिलता है।


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Pitru Paksha 2026: श्राद्ध के लिए तिथि जरूरी या वार? मृत्यु तिथि न पता हो तो क्या करें

Pitru Paksha 2026 Can’t Perform Tarpan Every Day  Due to Work  Know the Shastra Rules
हर व्यक्ति के लिए पूरे 15 दिन रोज श्राद्ध करना जरूरी नहीं माना जाता। - फोटो : adobe stock

पितृ पक्ष में रोज तर्पण न कर पाएं तो क्या करें?
पितृ पक्ष हिंदू धर्म में पितरों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म किए जाते हैं। हालांकि आज की व्यस्त जीवनशैली में नौकरी और ऑफिस की जिम्मेदारियों के कारण हर व्यक्ति के लिए पितृ पक्ष के सभी दिनों में धार्मिक अनुष्ठान करना संभव नहीं होता। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर 15 दिनों तक रोज तर्पण न कर पाएं तो क्या करें? धार्मिक परंपराओं में श्राद्ध के लिए सबसे महत्वपूर्ण आधार पितर की मृत्यु तिथि को माना गया है। इसलिए हर व्यक्ति के लिए पूरे 15 दिन रोज श्राद्ध करना जरूरी नहीं माना जाता। यदि पितर की मृत्यु तिथि ज्ञात है, तो पितृ पक्ष में उसी तिथि के दिन श्राद्ध करने की परंपरा है।

Pitru Paksha 2026 Can’t Perform Tarpan Every Day  Due to Work  Know the Shastra Rules
मृत्यु तिथि पता हो तो उसी दिन करें श्राद्ध - फोटो : adobe stock

मृत्यु तिथि पता हो तो उसी दिन करें श्राद्ध
यदि माता-पिता या किसी अन्य पितर की मृत्यु की तिथि मालूम है, तो पितृ पक्ष में उसी तिथि पर श्राद्ध करना प्रमुख माना जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी पितर की मृत्यु कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को हुई थी, तो पितृ पक्ष की सप्तमी तिथि को उनका श्राद्ध किया जा सकता है। इसलिए नौकरी के कारण हर दिन तर्पण नहीं कर पाने वाले व्यक्ति को अपने पितर की निर्धारित श्राद्ध तिथि पर समय निकालकर विधिपूर्वक कर्म करना चाहिए।

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Pitru Paksha 2026 Can’t Perform Tarpan Every Day  Due to Work  Know the Shastra Rules
मृत्यु तिथि न मालूम हो तो सर्वपितृ अमावस्या महत्वपूर्ण - फोटो : adobe stock

मृत्यु तिथि न मालूम हो तो सर्वपितृ अमावस्या महत्वपूर्ण
कई बार परिवार में पूर्वज की मृत्यु की सही तिथि उपलब्ध नहीं होती। ऐसी स्थिति में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। इसे महालया अमावस्या भी कहा जाता है। यह दिन उन पितरों के लिए भी श्राद्ध करने का अवसर माना जाता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है। यदि किसी कारण से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया हो, तो भी परिवार की परंपरा और आचार्य की सलाह के अनुसार इस दिन श्राद्ध किया जा सकता है।

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Pitru Paksha 2026 Can’t Perform Tarpan Every Day  Due to Work  Know the Shastra Rules
साल 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्तूबर, शनिवार को है। - फोटो : adobe stock

सर्वपितृ अमावस्या कब है?
साल 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्तूबर, शनिवार को है। पितृ पक्ष का समापन इसी दिन माना जाएगा। ऐसे लोग जो नौकरी या दूसरी व्यस्तताओं के कारण पितृ पक्ष में नियमित तर्पण नहीं कर पाते, वे अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार इस दिन पितरों का तर्पण और श्राद्ध कर सकते हैं। हालांकि श्राद्ध की तिथि और मुहूर्त स्थान तथा पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं, इसलिए अंतिम समय स्थानीय पंचांग से जरूर जांचना चाहिए।

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