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शराब के नाम पर मची लूट, ठेके बंद करवाने सड़कों पर उतरी महिलाएं

Tue, 18 Apr 2017 12:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 18 Apr 2017 12:30 PM IST
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Woman Protest Against Wine Shops in HImachal.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से होने वाले नुकसान से बचने और खाली खजाने को भरने के लिए राज्य की वीरभद्र सरकार ने शराब में लूट की खुली छूट दे दी है। प्रदेश में लाइसेंस लेने वाले ठेकेदार अब खुद शराब की कीमत तय कर रहे हैं। वहीं, महिलाएं ठेके बंद करवाने के लिए सड़कों पर उतर आई हैं। आगे देखें कहां कहां हो रहा प्रदर्शन-

Woman Protest Against Wine Shops in HImachal.

हालात यह हैं कि 80 रुपये की बीयर 160 रुपये तक बेची जा रही है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद न्यूनतम मूल्य से ज्यादा वसूली पर सरकार का नियंत्रण नहीं रहा है। अभी तक लाइसेंस लेने के बाद सरकार की ओर से तय अधिकतम फुटकर दाम (एमआरपी) से ज्यादा वसूलने वाले ठेकेदारों को ही अब सरकार ने न्यूनतम बिक्री दाम (एमएसपी) तय कर मनमाने दाम वसूलने का जिम्मा दे दिया है।(बिलासपुर के तंबोल में ठेका बंद करवाने को लेकर प्रदर्शन करती महिलाएं)

Woman Protest Against Wine Shops in HImachal.

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हाईवे के 500 मीटर के दायरे से शराब दुकानें हटाने के निर्देश दिए थे। इस आदेश से सूबे की करीब 750 दुकानों पर ताले लग गए। साल 2016-17 में अकेले आबकारी के लाइसेंस वितरण से ही करीब 962 करोड़ रुपये कमाने वाली राज्य सरकार ने घाटे की आशंका को देखते हुए शराब नीति को ही बदल दिया। (धर्मशाला में ठेका बंद करवाने के लिए ज्ञापन सौंपती महिलाएं)

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Woman Protest Against Wine Shops in HImachal.

नई नीति के तहत पहले तो शराब कारोबारी को सरकार की हिमाचल प्रदेश बेवरेजेस लिमिटेड कारपोरेशन से ही शराब लेने की बाध्यता कर दी। इसके बाद शराब की बोतल पर एमआरपी के बजाय एमएसपी छापने का नियम बनाकर शराब कारोबारियों को लूट की खुली छूट दे दी। अब 500 रुपये कीमत वाली किसी शराब की बोतल के अगर 1000 रुपये भी वसूले जाएंगे तो खरीदार विक्रेता की शिकायत नहीं कर सकेगा। (करसोग में ठेके के विरोध में सड़कों पर महिलाएं)

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Woman Protest Against Wine Shops in HImachal.

पिछले वित्तीय वर्ष तक शराब को एमआरपी से ज्यादा बेचने पर कंज्यूमर गुड्स एक्ट के तहत विक्रेता पर कार्रवाई की जाती थी। इसमें 50 हजार रुपये तक का आर्थिक दंड भी शामिल था। लेकिन नई व्यवस्था के बाद अब उपभोक्ता की कहीं भी सुनवाई नहीं हो सकेगी। | (पांवटा में ठेके का विरोध करती महिलाएं)

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