मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साले पृथ्वी विक्रम सेन के अचानक भाजपा का दामन थामने से हिमाचल की सियासत में उबाल आ गया है। पृथ्वी विक्रम सेन बताते हैं कि उन्हें पिछले विधानसभा चुनाव में टिकट न मिलने का मलाल है और इसी टीस से उन्होंने भाजपा में शामिल होने का एलान किया है। शनिवार को नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से पृथ्वी ने भेंट की।
सीएम के साले पृथ्वी ने थामा भाजपा का साथ, ये रही वजह
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सीएम के साले पृथ्वी ने थामा भाजपा का साथ, ये रही वजह
जल्द ही वे एक समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल को बुलाकर विधिवत रूप से भाजपा में शामिल होंगे। क्योंथल रियासत से संबंध रखने वाले पृथ्वी विक्रम सेन के भाजपा में शामिल होने पर प्रदेश में कांग्रेस के सर्वाधिक शक्तिशाली माने जाने वाले वीरभद्र खेमे को बड़ा झटका लगा है। ‘अमर उजाला’ ने वीरभद्र सिंह के साले पृथ्वी विक्रम सेन से रविवार को पांच तीखे सवाल किए।
सीएम के साले पृथ्वी ने थामा भाजपा का साथ, ये रही वजह
सवाल: आपने प्रदेश के सबसे अधिक राजनीतिक तजुर्बे वाले नेता एवं अपने बहनोई सीएम वीरभद्र सिंह का साथ छोड़कर क्या उनके साथ धोखा नहीं किया? जवाब: नहीं! राजनीति अपनी जगह है और रिश्तेदारी अपनी जगह। मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। मैंने पिछले विस चुनाव में कसुम्पटी से टिकट के लिए आवेदन किया था। मेरे अलावा बहन प्रतिभा सिंह और कुलदीप सिंह राठौर ने भी आवेदन किया था, पर टिकट किसे मिला, किसी और को ही। जब हम कांग्रेस के पुराने लोगों को नजरअंदाज किया गया तो साथ छोड़ना पड़ा।
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सवाल: आपने भाजपा नेताओं को विश्वास में लिए बगैर राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से भेंट की और उनसे भाजपा में शामिल होने की पेशकश की। हिमाचल के भाजपा नेताओं को विश्वास में लिए बगैर कैसे उम्मीद करते हैं कि आपको भाजपा कसुम्पटी से टिकट दे ही देगी? जवाब: मैंने एक महीने पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से भेंट की थी। शिमला में उनके रेजिडेंस पर मिला। उनको उसी दिन कहा था कि मैं भाजपा में शामिल होना चाहता हूं तो उन्होंने स्वागत किया। इसी के बाद मैंने बीते दिन अमित शाह से शिष्टाचार भेंट की। मुझे उम्मीद है कि भाजपा से मुझे जरूर टिकट मिलेगा। नहीं भी मिला तो भी भाजपा के लिए समर्पित रहूंगा।
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सवाल: आप पहले लंबे समय तक कांग्रेस में रहे हैं। मुख्यमंत्री ने ही आपको कांग्रेस से जोड़ा। क्या ऐसे में आपकी राजनीतिक आस्था पर सवाल खड़े नहीं होते हैं? जवाब: मैं 2002 के बाद से लेकर कांग्रेस का मेंबर तक नहीं हूं। शुरू में जरूर कांग्रेस में कार्यरत रहा हूं। किसान सैल में रह चुका हूं। युवा कांग्रेस का महासचिव भी रहा हूं। अपने राजनीतिक वर्चस्व को बनाने का अधिकार मुझे भी है। जब उधर सुनवाई ही नहीं हुई तो क्यों जुड़ा रहूं। मेरे भाई कांग्रेस से निष्कासित किए गए। हमारे परिवार को टिकट नहीं मिला, तभी भाभी ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था।