ग्रहण का धार्मिक और ज्योतिष की दृष्टि से बहुत बड़ा महत्व होता है। 26 दिसंबर 2019 को इस साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगेगा। भारत में ग्रहण होने से सूतक का प्रभाव इस बार रहेगा। पूरे विश्व में एक वर्ष में लगभग 5 से 7 सूर्य और चंद्र ग्रहण होते हैं। इसी कड़ी में 26 दिसंबर को सूर्य ग्रहण आकाश मंडल में सुबह 9:30 बजे दिखाई देगा, जो 3.30 मिनट का होगा। शिमला में यह सूर्य ग्रहण सुबह 8:20 से शुरू होगा और इसका मध्यांतर 9:32 बजे होगा। ग्रहण की समाप्ति 10:54 बजे होगी।
धर्मशाला में यह सुबह 8:21 बजे शुरू होगा, मध्यांतर 9:31 और समाप्ति 10:52 बजे होगी। चंडीगढ़ में यह ग्रहण सुबह 8:19 से शुरू होगा जबकि 9:31 बजे मध्यांतर और समाप्ति 10:54 बजे होगी। पौष कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि गुरुवार मूला नक्षत्र में कंकण सूर्य ग्रहण धनु राशि पर लगेगा। इस दिन धनु राशि वालों को मानसिक रूप से विशेष ध्यान रखना होगा।
सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं। खग्रास जिसमें चंद्रमा की छाया सूर्य को पूर्ण रूप से ढक देती है। दूसरा कंकण आकार इसमें चंद्रमा की छाया सूर्य के मध्य भाग को ढक लेती है और कंकण के समान सूर्य का आकार दिखाई देता है। सूर्य और चंद्र जब लंबवत होते हैं तो पृथ्वी पर खग्रास होगा, अन्य स्थानों के सूर्य ग्रहण खंडग्रास के रूप में दिखाई देगा। चंद्रग्रहण भी दो प्रकार से माना जाता है खग्रास और खंडग्रास। खग्रास जिसमें पृथ्वी की छाया चंद्रमा को पूर्ण रूप से ढक लेती है। खंडग्रास इसमें पृथ्वी की छाया चंद्रमा को अंशिता हर लेती है।
जब पृथ्वी और सूर्य के मध्य चंद्रमा आ जाता है, उस दिन सूर्य ग्रहण आकाश मंडल में दिखाई देता है। जिस दिन चंद्रमा और सूर्य के मध्य पृथ्वी आ जाती है, उस दिन चंद्र ग्रहण लगता है। सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या के दिन लगता है जबकि चंद्रग्रहण पूर्णमासी के दिन लगता है। पूर्णमासी की अंतिम अंश में तथा प्रतिपदा के प्रथम चरण में सूर्य ग्रहण लगता है और अमावस्या के अंतिम अंश में, प्रतिपदा चरण में चंद्र ग्रहण लगता है। 26 दिसंबर को दक्षिण भारत के कुछ भागों में कंकण सूर्यग्रहण जबकि उत्तर भारत में खग्रास सूर्यग्रहण दिखाई देगा। क्त्रसंति वृत्त पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा करने का मार्ग होता है चंद्र मार्ग चंद्रमा द्वारा पृथ्वी की परिक्रमा का मार्ग होता है। ये पथ एक-दूसरे को उत्तर और दक्षिण में काटते हैं जिन्हें राहु एवं केतु कहा जाता है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. मस्तराम ने बताया कि ग्रहण प्रारंभ होने से पूर्व तीन घड़ी और ग्रहण समाप्त होने के उपरांत तीन घड़ी तक भोजन आदि करना निषिद्ध माना गया है। हालांकि अत्याधिक जरूरी होने पर फलों का सेवन किया जा सकता है। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरती चाहिए। गर्भवती महिलाओं को सूतक काल के दौरान किसी तरह का तेजधार हथियार को हाथ नहीं लगाना चाहिए। यहां तक की सिलाई-कढ़ाई का काम भी वर्जित है।