हिमाचल की राजधानी शिमला का एक इलाका ऐसा भी है, जहां दूरदराज क्षेत्रों की तरह आज भी इमरजेंसी में मरीजों को कुर्सी, चारपाई और स्ट्रेचर के जरिये सड़क तक पहुंचाया जाता है। सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से महरूम यह हाल शहर के सबसे बड़े उपनगर संजौली के इंजनघर वार्ड से सटे सांगटी का है। हैरत की बात यह है कि मुख्यमंत्री ने पीडब्ल्यूडी के अफसरों को ‘टॉप प्रायोरिटी’ पर सांगटी को सड़क सुविधा से जोड़ने के निर्देश दिए थे बावजूद इसके ढाई साल बाद सड़क के लिए महज सर्वे ही हो पाया है।
तस्वीरें: यहां आज भी चारपाई और कुर्सी पर सड़क तक पहुंचाए जाते हैं मरीज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संजौली से करीब 800 मीटर नीचे बसे सांगटी में सैकड़ों परिवार सालों से बिना सड़क सुविधा के रह रहे हैं। बुजुर्ग, बीमार लोग और स्कूली बच्चे रोजाना कड़ी मशक्कत के बाद खड़ी चढ़ाई चढ़ कर संजौली पहुंचते हैं। वीरवार को ‘अमर उजाला’ की टीम मौके पर पहुंची तो लोगों ने बताया कि बीमार लोगों को स्ट्रेचर पर डाल कर सड़क तक पहुंचाना पड़ रहा है। रिटायर्ड नर्स बाला देवी को टांग में दर्द रहता है बड़ी मुश्किल से उन्हें सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।
संजय वर्मा की टांग में फ्रेक्चर है, आवाजाही के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। नारायण जनारथा को रीढ़ की हड्डी में चोट लगी है, उन्हें भी स्ट्रेचर पर उठा कर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। नवबहार से सांगटी तक करीब डेढ़ किलोमीटर लिंक रोड बनाया जाना है। विकास समिति सांगटी पिछले चार सालों से इसके लिए संघर्ष कर रही है। सड़क निर्माण के लिए 12 लाख रुपये का प्रावधान किया जा चुका है, लेकिन सरकारी तंत्र की सुस्ती से काम शुरू नहीं हो पा रहा। समिति का दावा है कि सड़क बनने पर संजौली में जाम की समस्या भी हल हो जाएगी। नवबहार से सांगटी होते हुए सड़क भट्ठाकुफर बाईपास से जुड़ेगी जिससे संजौली चौक पर वाहनों का दबाव कम हो जाएगा।
विकास समिति सांगटी के अध्यक्ष डीडी शर्मा, सचिव बेलीराम चौहान, मनीष शर्मा, राकेश वर्मा, प्रकाश शांडिल, बृजेश चौहान, पदम बुशैहरी और हुसैन मुहम्मद ने बताया कि संजौली से इंजनघर होते हुए सांगटी को एंबुलेंस रोड से जोड़ने का प्रस्ताव था। नगर निगम के अफसर इसे लेकर कई बार इंस्पेक्शन कर चुके हैं। इंजन घर होते हुए सांगटी के लिए एंबुलेंस रोड बनाने के दो बार टेंडर भी हो चुके हैं लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया। मेयर, कमिश्नर और स्थानीय पार्षद से दर्जनों बार मामला उठाया जा चुका है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता अजय गर्ग ने कहा कि नवबहार से सांगटी के लिए सड़क निर्माण को लेकर सर्वे किया जा चुका है। जिस क्षेत्र से होकर सड़क बननी है वहां पेड़ बहुत अधिक है, बावजूद इसके प्राथमिकता के आधार पर सड़क निर्माण का प्रयास किया जाएगा। स्थानीय निवासी शिव सिंह चंदेल ने कहा कि सांगटी के नगर निगम में शामिल होने के बाद लोग टैक्स तो भुगत रहे हैं लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं मिला। सड़क सुविधा न होने के कारण सालों से परेशानी झेलनी पड़ रही है।