कोरोना की दूसरी लहर के खौफ के बीच हिमाचल प्रदेश की शक्तिपीठों में मंगलवार को चैत्र नवरात्र का शुभारंभ हो गया है। इसी के साथ हिंदू नववर्ष भी शुरू हुआ। कोरोना के चलते मंदिरों में श्रद्धालु कम संख्या में पहुंचे। छिन्न मस्तिका धाम चिंतपूर्णी में 11 हजार भक्तों ने मां के दर्शन किए। नयनादेवी में 10 हजार, ज्वालाजी में 8000, चामुंडा मंदिर में 3000 और बज्रेश्वरी मंदिर में 1000 श्रद्धालु ही पहुंचे।
चैत्र नवरात्र: कोरोना के बीच हिमाचल के शक्तिपीठों में उमड़े श्रद्धालु, देखें तस्वीरें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कांगड़ा जिले के विख्यात मंदिरों के कपाट सुबह छह बजे ही खोल दिए थे। शक्तिपीठ ज्वालाजी, बज्रेश्वरी और चामुंडा देवी में कोविड नियमों का पालन करते हुए श्रद्धालुओं को मां के दर्शन करवाए गए। ज्वालाजी में पहले दिन श्रद्धालुओं की कम भीड़ देखने को मिली। मंदिर के पुजारी मधुसूदन ने बताया कि इससे पहले इन नवरात्र में भक्तों की संख्या अधिक होती थी। ज्वालाजी में शहनाई वादन की धुनों के साथ झंडा रस्म निभाई गई।
शक्तिपीठ बज्रेश्वरी देवी मंदिर में मंगलवार शाम तक करीब एक हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। श्री चामुंडा नंदीकेश्वर धाम में भी पहले नवरात्र में कम श्रद्धालु पहुंचे। विश्वविख्यात शक्तिपीठ श्री नयनादेवी में मंगलवार शाम 6 बजे तक करीब 10 हजार श्रद्धालुओं ने माथा टेका। यहां काफी संख्या में पंजाब और अन्य राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे।
चिंतपूर्णी मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या कम रही। यहां 11 हजार के करीब श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन किए। श्रद्धालुओं के लिए सुबह पांच बजे ही मंदिर के कपाट खोल दिए गए थे। बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। चैत्र माह मेले के अंतिम दिन 25 हजार श्रद्धालु बाबा बालकनाथ के दरबार पहुंचे।
मंडी जिले के मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की रौनक नहीं दिखी। मनाली में हिडिंबा माता के मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। लोगों ने पार्वती ब्यास संगम स्थल जिया, मणिकर्ण में पवित्र स्नान किया। शिमला जिले में तारादेवी और कालीबाड़ी मंदिर में भी कम श्रद्धालु पहुंचे।