राजधानी शिमला के कई ठेका मालिकों ने अचानक शराब के रेट घटा दिए हैं। बीसीएस, खलीनी, बैमलोई समेत उपनगरों के कई शराब विक्रेताओं ने अंग्रेजी शराब की कीमतें 30 से 40 फीसदी तक कम कर दी हैं।शादी और ठंड के मौसम में रेट कम होने से जहां पियक्कड़ों की मौज हो गई है, वहीं इसकी गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
आबकारी विभाग को शराब के सैंपल लिए कई महीने हो गए हैं। ऐसे में मिलावट की आशंका भी बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि स्टॉक क्लीयर करने और अपना कोटा बढ़ाने के लिए कई शराब विक्रेता रेट घटाकर अपनी बिक्री बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। ग्राहकों को लुभाने के लिए कई ठेकामालिकों ने ठेकों के बाहर नई रेट लिस्ट भी चस्पां कर दी है।
शराब की जो बोतल मालरोड पर 510 रुपये में बिक रही है, वही बोतल उपनगरों में 330 से 350 तक उपलब्ध है। ऐसा नहीं है कि हर ब्रांड कीशराब सस्ती हुई है। ठेका मालिकों ने अपनी सुविधा और फायदे के अनुसार सिर्फ कुछ ब्रांड की शराब के ही रेट घटाए हैं। वहीं, जिन घरों में इन दिनों शादियां हैं, वे सस्ती शराब का खूब फायदा ले रहे हैं।
नियमों के अनुसार अधिकतम मूल्य से ज्यादा या कम रेट पर शराब नहीं बेची जा सकती। कुछ दिन पहले तक कुछ ठेका मालिकों की महंगी शराब बेचने पर शिकायतें सामने आई थी। लेकिन अब सस्ती होने की शिकायतें मिल रही हैं। हालांकि, शराब सस्ती होने से लोगों को परेशानी नहीं। लेकिन लोग गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं।
प्रिंट रेट से कम शराब बेचना नियमों के खिलाफ है। यदि कोई ऐसा कर रहा है तो उस पर कार्रवाई होगी। शराब की सैंपलिंग समय समय पर करते रहते हैं। लोगों को यदि किसी ठेके की शराब पर संदेह है तो वे विभाग को शिकायत कर सकते हैं। - सुरेंद्र शर्मा, जिला आबकारी अधिकारी