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भक्तों को सांप से बचाने के लिए भोलेनाथ ने यहां किया था चमत्कार

Thu, 04 Aug 2016 01:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 04 Aug 2016 01:11 PM IST
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History or Churdhar Peak on Himachal Pradesh.
विशालकाय सांप से अपने भक्तों के बचाने के लिए भगवान शिव ने यहां अपना चमत्कार दिखाया था। यहां आज भी किसी देवी देवता की मूर्ति स्‍थापित नहीं है लेकिन इसके बावजदू यहां आने वाले भक्तों की सारी मुरादें पूरी हो जाती हैं।

विशालकाय सांप से अपने भक्तों के बचाने के लिए भगवान शिव ने यहां अपना चमत्कार दिखाया था। यहां आज भी किसी देवी देवता की मूर्ति स्‍थापित नहीं है लेकिन इसके बावजूद यहां आने वाले भक्तों की सारी मुरादें पूरी हो जाती हैं।

History or Churdhar Peak on Himachal Pradesh.
यह हिमाचल के जिला सिरमौर की सबसे ऊंची चोटी है। चूड़धार नाम से इस चोटी पर स्थित भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए हर साल हजारों सैलानी यहां पहुंचते हैं। खूबसूरत वादियों से होकर गुजरने वाली यह यात्रा सदियों से चली आ रही है। कहते हैं एक बार भगवान शिव ने यहां अपना चमत्कार दिखाया था।

यह हिमाचल के जिला सिरमौर की सबसे ऊंची चोटी है। चूड़धार नाम से इस चोटी पर स्थित भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए हर साल हजारों सैलानी यहां पहुंचते हैं। खूबसूरत वादियों से होकर गुजरने वाली यह यात्रा सदियों से चली आ रही है। कहते हैं एक बार भगवान शिव ने यहां अपना चमत्कार दिखाया था।

History or Churdhar Peak on Himachal Pradesh.
कहते एक बार चुरु नाम का शिवभक्त यहां मंदिर आया। इसी बीच अचानक बड़े बड़े पत्‍थरों के बीच से एक विशालकाय सांप बाहर आ गया। यह चुरु और उसके बेटे को मारने दौड़ा। वहीं, बाप बेटे ने भागने की कोशिश की लेकिन सांप से नहीं बच पाए। फिर इन्होंने भगवान शिव से रक्षा की प्रार्थना की।

कहते एक बार चुरु नाम का शिवभक्त यहां मंदिर आया। इसी बीच अचानक बड़े बड़े पत्‍थरों के बीच से एक विशालकाय सांप बाहर आ गया। यह चुरु और उसके बेटे को मारने दौड़ा। वहीं, बाप बेटे ने भागने की कोशिश की लेकिन सांप से नहीं बच पाए। फिर इन्होंने भगवान शिव से रक्षा की प्रार्थना की।

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History or Churdhar Peak on Himachal Pradesh.
भगवान भोलेनाथ ने चमत्कार से विशालकाय पत्‍थर का एक हिस्सा सांप पर जा गिरा जिससे वह वहीं मर गया। इसके बाद शिवभक्त यहां से घर चले गए। कहते हैं उसके बाद से ही यहां का नाम चूड़धार पड़ा। लोगों की श्रद्घा इस मंदिर के लिए बढ़ गई और यहां के लिए धार्मिक यात्राएं शुरू हो गई।

भगवान भोलेनाथ ने चमत्कार से विशालकाय पत्‍थर का एक हिस्सा सांप पर जा गिरा जिससे वह वहीं मर गया। इसके बाद शिवभक्त यहां से घर चले गए। कहते हैं उसके बाद से ही यहां का नाम चूड़धार पड़ा। लोगों की श्रद्घा इस मंदिर के लिए बढ़ गई और यहां के लिए धार्मिक यात्राएं शुरू हो गई।

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History or Churdhar Peak on Himachal Pradesh.
यह भी माना जाता है कि इसी चोटी के साथ लगते क्षेत्र में हनुमान को संजीवनी बूटी मिली थी। हर साल गर्मियों के दिनों में चूड़धार की यात्रा शुरू होती है। बरसात और सर्दियों में यहां जमकर बर्फबारी होती है जिससे यह चोटी बर्फ से ढक जाती है।

यह भी माना जाता है कि इसी चोटी के साथ लगते क्षेत्र में हनुमान को संजीवनी बूटी मिली थी। हर साल गर्मियों के दिनों में चूड़धार की यात्रा शुरू होती है। बरसात और सर्दियों में यहां जमकर बर्फबारी होती है जिससे यह चोटी बर्फ से ढक जाती है।

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