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Himachal Cloud Burst: आपदा ने सराज घाटी का बदल दिया नक्शा, ध्वस्त हुए घर बयां कर रहे तबाही का मंजर, तस्वीरें

Thu, 03 Jul 2025 04:20 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, थुनाग (मंडी)
अमर उजाला नेटवर्क, थुनाग (मंडी) Published by: Krishan Singh Updated Thu, 03 Jul 2025 04:20 PM IST
सार

 सराज विधानसभा क्षेत्र में थुनाग और आसपास के क्षेत्रों में आई प्राकृतिक आपदा ने सबसे भीषण त्रासदी का रूप ले लिया है।

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Himachal Cloud Burst: The disaster has changed the map of Saraj valley, the destroyed houses are telling the s
सराज के पखरैर की तस्वीर, जहां भयावह तबाही मची। - फोटो : संवाद

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सराज विधानसभा क्षेत्र में थुनाग और आसपास के क्षेत्रों में आई प्राकृतिक आपदा ने सबसे भीषण त्रासदी का रूप ले लिया है। भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन के कारण क्षेत्र में भयावह तबाही मची है। थुनाग बाजार में लगभग 154 मकान और दुकानें पूरी तरह जमींदोज हो चुकी हैं, वहीं जरोल बाजार भी तबाह हो गया है। जंजैहली में भी जल प्रलय ने भारी तबाही मचाते हुए पूरा नक्शा ही बदल दिया है। सराज घाटी अलग-थलग पड़ी हुई है। आपदा ने बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। सभी सड़कें और पुल ध्वस्त हो चुके हैं, जिससे थुनाग का शेष दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट गया है। बिजली और पेयजल योजनाएं ठप हो गई हैं, जिससे राशन और पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया है।

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थुनाग में तबाही, मलबे के साथ बह गई गाड़ी। - फोटो : संवाद

लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर
मोबाइल नेटवर्क की अनुपस्थिति ने सूचना संग्रह और राहत कार्यों को मुश्किल बना दिया है। लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। अस्पताल, स्कूल और सरकारी भवन भी इस आपदा की चपेट में हैं, जिन्हें बहाल करने में लंबा समय लग सकता है। राहत और बचाव कार्यों में स्थानीय प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और ग्रामीणों की टीमें जुट गई हैं। आपदा प्रबंधन टीम ने बगस्याड़ से 16 किलोमीटर पैदल चलकर थुनाग पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया। स्थानीय ग्रामीणों ने साहस और एकजुटता के साथ राहत कार्यों में योगदान दिया, जिससे अभियान को गति मिली। स्थानीय निवासियों और प्रशासन ने सरकार से तत्काल हवाई सर्वेक्षण और एनडीआरएफ व सेना की मदद की अपील की है। लोग सोशल मीडिया के जरिए आपदा की तस्वीरें और वीडियो साझा कर मदद की गुहार लगा रहे हैं।

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थुनाग में तबाही की तस्वीर। - फोटो : संवाद

खाद्यान्न संकट ने बढ़ाई मुश्किलें, 38 पंचायतें तबाही की चपेट में
सराज क्षेत्र में 30 जून-1 जुलाई की रात आई आपदा के चौथे दिन 80 हजार की आबादी गंभीर खाद्यान्न संकट से जूझ रही है। थुनाग उपमंडल की 38 पंचायतें, विशेष रूप से थुनाग, पखरैर, जरोल, पांडवशीला और चिउणी इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हैं। खाद्य सामग्री की कमी के कारण लोग भूखे रहने को मजबूर हैं और बंद सड़कों ने राहत सामग्री पहुंचाने में बाधा डाली है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को रैनगलू और जंजैहली में राशन किट पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन क्षतिग्रस्त रास्तों के कारण हेलीपैड तक नहीं पहुंच सके।  पखरैर में बादल फटने से तबाही मची, जबकि अन्य क्षेत्रों में भारी बारिश ने भूस्खलन और बाढ़ का कहर बरपाया। पेयजल संकट भी गहरा गया है। 25 पंचायतों को पानी देने वाली छड़ी खड्ड-शैटाधार पेयजल योजना ध्वस्त हो चुकी है। प्राकृतिक जल स्रोत क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीण बारिश का पानी जमा कर गुजारा कर रहे हैं। 

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बादल फटने से हुई तबाही। - फोटो : संवाद

 दर्जनों टावर ठप
संचार व्यवस्था ठप होने से राहत कार्य रुके हुए हैं। मोबाइल नेटवर्क बहाल नहीं हुआ, और दर्जनों टावर ठप हैं। कांढ़ा के टावर की सिग्नल रेंज बढ़ाने की कोशिशें नाकाम हैं। थुनाग और जंजैहली में नियंत्रण कक्ष संचार के अभाव में निष्क्रिय हैं। बिजली आपूर्ति भी चार दिनों से बंद है, क्योंकि गोहर-थुनाग 33 केवी लाइन क्षतिग्रस्त है। चैल-जंजैहली सड़क का 10 फीसदी हिस्सा गायब है और लंबाथाच-कलहणी-पंडोह, लंबाथाच-चिउणी-शैटाधार जैसी सड़कें ध्वस्त हैं। ग्रामीण संपर्क सड़कों का नामोनिशान मिट चुका है।  आपदा प्रबंधन में प्रशासनिक तालमेल की कमी साफ दिख रही है। लोग खड्डों और नालों में अपनों को ढूंढ रहे हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं ठप हैं, दर्जनों स्कूलों में मलबा घुसा है। प्रभावित लोग अनिश्चितता और संकट के बीच जी रहे हैं और राहत कार्यों की धीमी गति उनकी मुश्किलें बढ़ा रही है। 

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पखरैर में हुई तबाही। - फोटो : संवाद

मौके पर सिर्फ पटवारी ही पहुंचा प्रशासनिक अधिकारी नहीं आया 
सरोआ पंचायत के उपप्रधान देवेंद्र राणा उर्फ पम्मी ने बताया कि बारिश के दौरान जब यह आपदा आई तो एक छोटी सी खड्ड ने ऐसा रौद्र रूप धारण किया कि मंदिर की सराय और नौ परिवारों के घर, वाखली पुल, कुकलाह पुल, गांवों को जोड़ने वाली सड़कों सहित बाइकें, स्कूटी, कारें और लोगों का घरेलू सामान सब कुछ पानी में बह गया। कुछ वाहन सिल्ट में फंसे हुए हैं। खड्ड के हर कोने में तबाही के निशान बिखरे हैं। अब तक सिर्फ पटवारी मौका देखने आया है, जबकि बाकी कोई बड़ा प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। न राशन मिला, न टेंट, न फौरी राहत। उन्होंने मांग की है कि बेघर हुए लोगों का तुरंत किसी सुरक्षित जगह रहने का इंतजाम किया जाए। इधर, जिले के अलग-अलग भागों में पांच रिलीफ कैंप में 357 लोगों को ठहराया गया है। इनमें मंडी में दो, थुनाग में दो और धर्मपुर में एक जगह रिलीफ कैंप स्थापित किए गए हैं। 

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