पुरोहित की एक गलती से हत्यादेवी बन गई थी राजकुमारी
ऐसा अनोखा मंदिर जहां पूजा होती है हत्या देवी की। इससे जुड़ी कहानी भी बेहद रोचक है। एक राजकुमारी झूठे ईल्जाम में फंसकर हत्या देवी बन गई थी। आइए जानते हैं पूरी कहानी..
पुरोहित की एक गलती से हत्यादेवी बन गई थी राजकुमारी
कहानी हिमाचल के मंडी जिला से जुड़ी है जिसका रियासत काल में सुकेत नाम था। मनोरम पहाड़ों के बीच बसे सुंदर छोटे से गांव पागंणा में ही महामाया देवी कोट का मंदिर है। यहां हत्या देवी की पूजा दशकों से लोग पूरी श्रद्धा से करते हैं। कहते हैं सुकेत रियासत की कमान राजा रामसेन के पास थी। राजा रामसेन की बेटी यानि राजकुमारी चंद्रावती थी जो कि बचपन से ही शिव पार्वती की अनन्य भक्त थी।
पुरोहित की एक गलती से हत्यादेवी बन गई थी राजकुमारी
सर्दियों के मौसम में एक बार राजकुमारी चंद्रावती सुंदरनगर स्थित महल में सहेलियों के साथ खेल रही थी। खेलते समय उनकी एक सहेली ने पुरूष रूप धारण किया था। सभी खेल का मजा ले रहे थे। इसी दौरान राज पुरोहित उस कक्ष से गुजरा और उन्हें लगा कि चंद्रावती किसी युवक के साथ खेल रही है। पुरोहित ने पूरी बात राजा को बता दी, जिससे की वह क्रोधित हो गए।
पुरोहित की एक गलती से हत्यादेवी बन गई थी राजकुमारी
लोकलाज से चिंतित राजा ने फौरन चंद्रावती को शीतकालीन राजधानी
पांगणा भेज दिया। चंद्रावती ने अपना अपमान समझा और खुद को पवित्र साबित
करने के लिए खौफनाक कदम उठा लिया। चंद्रावती ने रती नाम का विषैला बीज एक
शिला पर पीसकर खा लिया। इससे उसकी मौत हो गई। यह शिला आज भी पांगणा में
मौजूद है।
पुरोहित की एक गलती से हत्यादेवी बन गई थी राजकुमारी
प्राण त्यागने के बाद देवी चद्रावंती उसी रात अपने पिता
राजा रामसेन के सपने में आई और उन्हें पूरा वृतांत सुनाया। देवी ने कहा कि
मेरे मृत शरीर को महामाया देवी कोट मंदिर पांगणा के परिसर में दबाया जाए।
छह माह बाद दोबारा से मेरे शरीर को जमीन से निकालना। अगर मैं पवित्र हूं तो
यह उस समय भी अभी की तरह पूरी तरह से यथावत रहेगा और नहीं तो पूरी तरह से
गल सड़ जाएगा।