हम बहुत जल्द साल 2022 को अलविदा कहने वाले हैं। 31 दिसंबर की रात पूरी दुनिया जश्न में डूबी होगी और नए साल 2023 का स्वागत कर रही होगी। अच्छी और बुरी यादों के साथ हम नए साल में प्रवेश कर जाएंगे। बीतते समय के साथ हमारी यादें कुछ धुंधुली पड़ जाती हैं, ऐसे में 'अमर उजाला' यादें 2022 सरीज लेकर आ रहा है। इस सीरीज में हम अच्छी-बुरी यादें ताजा करेंगे। कई घटनाएं ऐसी होंगी जो हमें दहला देंगी कुछ हमें हंसा देंगी तो कुछ हैरान कर देंगी। अमर उजाला की इस पहली सीरीज में हम राजस्थान की पांच सबसे चर्चित शादियों की यादें ताजा करेंगे। तो आइए जानतें हैं इन शादियों के बारे में...।
Memories 2022: 80 साल के बुजुर्ग की अनोखी शादी, कल्पना के लिए मीरा बनी आरव, बीतते साल के ये पांच शुभ विवाह
Memories 2022: 80 साल के बुजुर्ग की अनोखी शादी, कल्पना के लिए मीरा बनी आरव, बीतते साल के ये पांच शुभ विवाह
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब पढ़ें प्रदेश की पांच अनोखी शादियों के बारे में
पिता की बारात में शामिल हुए 9 बेटे-बेटियां
16 अप्रैल को उदयपुर में एक 80 साल के बुजुर्ग ने शादी की थी। उस समय इस शादी की जमकर चर्चा हुई थी, क्योंकि 80 साल के दुल्हे के 9 बेटे-बेटियां, 20 पोता-पोती और कई नावासा-नवासी भी थे जो बारात में शामिल हुए थे। यह शादी उदयपुर जिले की कोटड़ा तहसील के गऊपीपला में हुई थी। यहां रहने वाले सकमा पिता धुलिया पारगी गुजरात के गुण भाखरी से दुल्हन मठु को ब्याह कर लाए थे। दुल्हा-दुल्हन की उम्र से ज्यादा इस शादी में इस बात की चर्चा हो रही थी कि सकमा और मठु पिछले 60 साल से साथ रह रहे थे। उनके 9 बेटे-बेटियां थी, जिनमें से लगभग सभी की शादी हो गई थी। उनके 20 बेटे- बेटियां हैं। इतने साल साथ रहने बाद दोनों ने शादी की थी।
दरअसल, उदयपुर जिले के कोटड़ा, झाड़ोल, पाली, बाली, सिरोही सहित गुजरात में रहने वाले आदिवासियों में सदियों से दापा प्रथा चली आ रही है। इसके तहत युवक-युवती आपसी सहमति से साथ रहते हैं। इससे पहले युवक युवती के परिजनों को कुछ रुपये देता है जिसे दापा प्रथा कहा जाता है। हालांकि, दापा प्रथा के तहत दी जाने वाली रकम का फैसला सामजिक स्तर पर होता है। तय रकम देने के बाद दोनों युवक-युवती साथ रहने लगते हैं और फिर अपनी मर्जी से शादी करते हैं।
विदेशी ने दोष दूर करने की पेड़ से शादी
सात दिसंबर को राजस्थान के उदयपुर जिले में एक रूसी लड़की तान्या ने खेजड़ी के पेड़ से शादी की थी। किसी विदेशी लड़की का इस तरह की शादी करने का यह लगभग पहला मामला था। इसलिए यह चर्चा का विषय बन गया। दरअसल, 28 साल की तान्या नवंबर महीने में भारत घूमने आई थी। लंबे समय से उसे शादी के लिए अच्छा लड़का नहीं मिल रह था। उत्तर प्रदेश के आगरा में पहुंचने पर तान्या को कुंडली के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उसने एक ज्योतिषि से मुलाकात की। उन्होंने तान्या को बताया कि उसकी कुंडली में दोष है। जिसे दूर करने के लिए उसे खेजड़ी या पीपल के पेड़ से शादी करनी होगी। इसके बाद सात दिसंबर को तान्या उदयपुर पहुंची उसने पंडित हेमंत सुखवाल से शादी को लेकर बात की। पंडिज सुखवल ने सुरजपोल इलाके के फतेह स्कूल के सामने स्थित खेजड़ी के पेड़ से उसकी शादी कराई। इस शादी में तान्या के विदेशी दोस्त भी शामिल हुए। विधि-विधान के साथ तान्या की शादी खेजड़ी के पेड़ से कराई।
कल्पना के लिए मीरा बनी आरव
राजस्थान के भरतपुर जिले में आठ नवंबर को समलैंगिक जोड़े आरव और कल्पना की शादी भी चर्चा में रही थी। शादी के बाद से आरव और कल्पना पति-पत्नी के रूप में अपना जीवन जी रहे हैं, लेकिन अपने प्यार को पाने के लिए दोनों ने जो फैसला किया उसकी लोगों के बीच जमकर चर्चा हुई थी। दरअसल, आरव का नाम पहले मीरा था और वह एक फिजिकल टीचर थी। जिसे अपने स्टूडेंट कल्पना से प्यार हो गया था, या कहें कि दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया था, जिसके बाद लिंग परिर्वतन कराकर दोनों ने शादी कर ली।
दरअसल, मीरा ने जन्म तो लड़की के शरीर में लिया था, लेकिन वह हमेशा लड़कों की तरह ही रहती थी। उसकी सारी आदतें लड़कों जैसी थीं। उसका बचपन से ही स्पोर्ट्स से काफी लगाव था। इसके बाद वह एक स्पोर्ट्स टीचर बन गईं। मीरा की तैनाती राजकीय माध्यमिक विद्यालय नगला में हो गई। इसी स्कूल में कल्पना भी पढ़ती थी। वह कबड्डी की अच्छी खिलाड़ी रह चुकी है और नेशनल लेवल पर भी खेल चुकी है। स्पोर्ट्स टीचर मीरा कल्पना को कबड्डी के दांव पेंच सिखाती थी। इस दौरान दोनों के प्यार की शुरुआत हो गई। बाद में दोनों ने शादी करने का फैसला लिया, लेकिन इसमें सबसे बड़ी समस्या सेम जेंडर था। ऐसे में मीरा ने जेंडर चेंज करवाने निर्णय लिया। 2019 में उसका इलाज शुरू हुआ, दो साल बाद 2021 में मीरा लड़का बन गई। जिसके बाद उसने अपना नाम बदलकर आरव रख लिया। मीरा के आरव बनने से कल्पना भी बहुत खुश थी। दोनों को पता था कि अब वह शादी कर सकते हैं। चार नवंबर को दोनों ने शादी कर ली, जिसमें उनके परिवार ने भी पूरा साथ दिया था।
बुलेट पर सवार होकर वरमाला डालने पहुंची दुल्हन
राजस्थान के बारां जिले में आठ दिसंबर को शादी के दिन एक दुल्हन की घोड़ी पर बैठाकर बिंदौरी निकाली गई। इसके बाद दुल्हन खुद बुलेट चलाकर वरमाला के लिए भी पहुंची। उसने इलेक्ट्रिक आतिशबाजी भी की। दुल्हन का यह अंदाज देखते ही सब हैरान रह गए। बुलेट पर बैठी दुल्हन की तस्वीरें जैसे ही सोशल मीडिया पर आईं वायरल हो गई। हर कोई इस अनोखी शादी के बारे में जानने की कोशिश था। दरअसल, छबड़ा चंद्रशेखर कॉलोनी में रहने वाले गोविंद जांगिड़ की बेटी कामेक्षा की शादी 8 दिसंबर को सुनील नाम के युवक के साथ हुई थी। गोविंद जांगिड़ एक शिक्षक हैं। उनके कोई बेटा नहीं है, वे बेटों की तरह ही बेटी की शादी करना चाहते थे और समाज के को बेटा-बेटी में फर्क मिटाने का संदेश देना चाहते थे। शादी के उन्होंने दुल्हन और दूल्हे की एक साथ बिंदौरी निकलवाई। इसके बाद जब वरमाला की बारी आई तो दुल्हन खुद बुलेट चलाकर स्टेज पर भी पहुंची। दुल्हन कामेक्षा के पिता गोविंद ने बताया कि उन्हें बेटी की शादी कुछ इसी तरह से करनी थी। अपनी बड़ी बेटी चंचल की शादी भी उन्होंने इसी अंदाज में की थी।