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आदिवासी अंचल की होली: यहां रंगों से नहीं, ऊंचाई पर लटककर घूमने की है परंपरा, थोड़ी-थोड़ी दूर पर लगते हैं मेले

Fri, 18 Mar 2022 05:25 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार Published by: दिनेश शर्मा Updated Fri, 18 Mar 2022 05:25 PM IST
सार

धार जिले के आदिवासी अंचलों में होलिका दहन के दूसरे दिन गल बाबा का मेला लगाया जाता है। इस दिन परंपरानुसार लोग रंग न खेलकर गल बाबा की पूजा करने जुटते हैं। लोगों को कई फीट ऊंचाई पर बांधकर लटकाया जाता है, फिर घुमाया जाता है। यह परंपरा काफी पुरानी बताई जाती है।
 

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Holi of Tribal Zone: There is a tradition of hanging around here, not with colors, fairs are held at a distance
धार के आदिवासी अंचल में गल पर घूमने की परंपरा है। - फोटो : अमर उजाला
धार जिले के आदिवासी अंचलों में होलिका दहन के दूसरे दिन गल बाबा का मेला लगाया जाता है। इस दिन परंपरानुसार लोग रंग न खेलकर गल बाबा की पूजा करने जुटते हैं। लोगों को कई फीट ऊंचाई पर बांधकर लटकाया जाता है, फिर घुमाया जाता है। यह परंपरा काफी पुरानी बताई जाती है।

 
Holi of Tribal Zone: There is a tradition of hanging around here, not with colors, fairs are held at a distance
हैं। तिरला के गल मेले में मन्नत धारी विशेष ड्रेस कोड में पहुंचे हैं। - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि आदिवासी अंचल में हर 10-15 किमी में ऐसे मेले लगाए जाते हैं। इसका आयोजन ग्राम पंचायत द्वारा किया जाता है। एक विशेष पहनावा यहां आने वालों का रहता है। बताते हैं कि मन्नतधारी ही गल पर घूमते हैं। होलिका दहन के दूसरे दिन ये मेले लगते हैं। गल पुरुष ही घूमते हैं। मन्नत अनुसार 1 साल, 5 साल गल घूमा जाता है।

मन्नत धारी अपने पूरे परिवार के साथ गल बाबा के मेले में पहुंचते हैं और मन्नत उतारते हैं। तिरला के गल मेले में मन्नत धारी विशेष ड्रेस कोड में पहुंचे हैं। लाइन लगी है। मन्नत धारी पुरुष की गल घूमने के लिए बकायदा पंचायत द्वारा इसकी रसीद काटी जाती है। मान्यता है कि बच्चा बीमार होने पर ठीक हो जाता है। बच्चा नहीं होने पर हो जाता है। घर में अन्य समस्याएं हैं तो मन्नत लेने पर मन्नत पूरी होती हैं तो गल घूमना होता है।
 
Holi of Tribal Zone: There is a tradition of hanging around here, not with colors, fairs are held at a distance
आदिवासी अंचल में हर 10-15 किमी में ऐसे मेले लगाए जाते हैं। इसका आयोजन ग्राम पंचायत द्वारा किया जाता है। - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि तिरला में एक ऊंचा टावर बनाया गया है, जिसकी ऊंचाई तकरीबन 50 फीट होती है। इस टावर पर एक व्यक्ति बैठा होता है और एक आड़ा बांस बंधा होता है, जिस पर मन्नत धारी व्यक्ति को कपड़े से बांध दिया जाता है और फिर नीचे से एक व्यक्ति रस्सी से उस बांस को गोल-गोल घुमाता है। इस तरह वह व्यक्ति ऊंचाई पर घूमता है। मन्नत धारी लोग मेले में एक निश्चित लाल कलर का कुर्ता और पीली पगड़ी पहनकर आते हैं। लोगों की मान्यता है कि गल बाबा की कृपा से वह जो मन्नत लेते हैं, वह पूरी हो जाती है।  
 
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