कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन वह वर्ल्ड चैंपियन बन जाएंगे। कोच के कहने पर भी उन्होंने खुद को शूटर मानने से इन्कार कर दिया था लेकिन आज विश्व के टॉप 10 शूटरों में इनका नाम शुमार है। सेना में नायब सूबेदार के पद से स्टार शूटर बनने तक का सफर बड़ा ही रोमांचक है। जानिए इनकी पूरी कहानी।
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jeetu rai
- फोटो : amar ujala
ये कोई और नहीं, लखनऊ के जीतू राय हैं। जीतू ने सोमवार को गोल्ड कोस्ट कॉमन वेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे देश का नाम रोशन किया है। जीतू ने 10 मीटर एअर पिस्टल में बेहतर प्रदर्शन कर खिताब अपने नाम किया।
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साल 2016 में खेल रत्न से सम्मानित जीतू राय का जन्म 26 अगस्त 1987 में नेपाल में हुआ था। उनका बचपन बेहद गरीबी में बीता। कुछ साल बाद वे भारत आ गए। 2006 में जीतू इंडियन आर्मी के गोरखा राइफल्स में नायब सूबेदार पद पर भर्ती हुए।
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लखनऊ में इन्हें पोस्टिंग मिली और फिर ये लखनवी ही हो गए। जीतू के कोच गर्वराज राय उनसे पहली मुलाकात याद कर मुस्कुरा देते हैं। वे बताते हैं कि पहली बार जब ट्रेनिंग के दौरान उससे शूट करने को कहा तो वह हिचकिचाया लेकिन जब उसने निशाना साधा तो वो सटीक था। मैं उससे इंप्रेस हो गया।
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गर्वराज कहते हैं कि मैंने जीतू से शूटिंग की प्रैक्टिस करने को कहा तो वह खुद को शूटर मानने से ही इन्कार करने लगा। बोला- सर मैं यहीं ठीक हूं। शूटिंग में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है। काफी कहने के बाद उसने ट्रेनिंग शुरू की। मैंने उसे पुणे आर्मी में ट्रेनिंग के लिए भेजा। शुरुआत में तो उसका प्रदर्शन ठीक नहीं था लेकिन कहते हैं ना कि मेहनत रंग जरूर लाती है और वही हुआ।