कोरोना ने अपनों को छीना। दर्द दिया। जख्म अभी भर ही रहे थे कि दूसरे जख्म उभर आए। ये कहानी है उन महिलाओं की जिन्होंने कोरोना महामारी के दौरान पति को खोया। उनकी दुनिया उजड़ गई। धीरे-धीरे गम से वो उबर रही थीं। जिंदगी भी फिर से पटरी पर लौटने लगी थी। पर...? चुनौतियों का पहाड़ फिर से सामने आकर खड़ा हो गया। वो चेहरे जो अपने थे, जिन्हें अपना माना था, वही विरोध में आकर खड़े हो गए। संपत्ति को लेकर एक-दूसरे के प्रति भरोसे का ऐसा संकट खड़ा हो गया कि मामला घर की दहलीज लांघने लगा। सास-ससुर जो कभी उसे बेटी जैसा दर्जा देते थे, वो सामने आकर खड़े हो गए कि कहीं वह उनके बेटे की सारी संपत्ति न हथिया ले। ऐसे कई मामले वन स्टॉप सेंटर और जिला प्रोबेशन अधिकारी के यहां आए।
कोरोना ने पति को छीना...अब संपत्ति के लिए पराए हो गए बेटी मानने वाले सास-ससुर, खड़ा हुआ भरोसे का संकट
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शहर के एक प्रतिष्ठित परिवार की बहू ने कोरोना से पति की मौत के बाद नोएडा में शिफ्ट होने का फैसला किया। आरोप है कि सास-ससुर ने दोनों बच्चों को रख लिया। बहू को फरमान सुना दिया कि तुम अकेले जाओ। परेशान होकर बहू ने वन स्टॉप सेंटर के नंबर 181 पर मदद मांगी। पता चला कि सास-ससुर को डर था कि कहीं सबकुछ लेकर वो चली न जाए। फिलहाल एक ही घर में वे अलग-अलग हैं। काउंसिलिंग जारी है।
घर से निकलने देने तक पर लगा दी थी रोक
जानकीपुरम का मामला रेस्क्यू टीम को जाकर सुलझाना पड़ा। बहू ने शिकायत की कि ससुराल वाले उसे निकलने तक नहीं देते। सारा सामान कब्जे में ले लिया है। मांगो तो देते नहीं। सूचना पर पहुंची टीम ने बहू के गहने-कपड़े आदि दिलवाए। दरअसल वह पति की संपत्ति को लेकर कागजी कार्रवाई पूरी करवाना चाहती थी। इसी को लेकर विवाद बढ़ा, क्योंकि बेटे की संपत्ति में उसे कोई हक देना नहीं चाहता था। फिलहाल काउंसिलिंग चलेगी, उसके बाद तय होगा कि करना क्या है।
दोनों पक्षों को एक -दूसरे पर भरोसा नहीं, इसलिए विवाद बढ़ा
वन स्टॉप सेंटर प्रभारी अर्चना सिंह कहती हैं कि दरअसल बहू हो या सास-ससुर, दोनों एक दूसरे का भरोसा नहीं जीत पा रहे हैं। यही वजह है कि वे पूरे-पूरे हक की बात कर रहे हैं। बेटा नहीं रहा तो बूढ़े माता-पिता कहां जाएंगे ये बहू को सोचना होगा। वहीं सास-ससुर को भी समझना पड़ेगा कि पति की संपत्ति में हक पत्नी और उसके बच्चों का है।
जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास सिंह का कहना है कि जिला प्रोबेशन कार्यालय में मार्च-अप्रैल में चार मामले ऐसे ही आए, जिनमें काउंसिलिंग के जरिए समाधान करने का प्रयास किया गया। दो मामलों का समाधान हो गया है। जिस महिला ने अपने पति को खोया है, यदि वो नई शुरुआत करना चाह रही है, तो उसे आगे बढ़ाना हम सबका दायित्व है। हम काउंसिलिंग के जरिए परिवार को एक रखने की कोशिश कर रहे हैं।