सच में, मोदी देश के प्रधानमंत्री नहीं प्रधान सेवक ही हैं। जिस तरह वह हमारे साथ बैठे थे, दुख- सुख की बात कर रहे थे उससे लगा कि प्रधानमंत्री नहीं बल्कि परिवार का कोई सदस्य हमारे बीच बैठा है। प्रधानमंत्री से संवाद के लिए देश भर से आई प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की लाभार्थी महिलाओं ने इसी भावुक अंदाज में अपनी बात कही।
महिलाएं बोलीं, लगा कि प्रधानमंत्री नहीं बल्कि परिवार का कोई सदस्य हमारे बीच बैठा है
महिलाएं बोली- विश्वास नहीं हो रहा कि सपने भी सच होते हैं, कभी सोचा नहीं था कि मोदी हमारे बीच बैठकर परिवार के सदस्य की तरह बात करेंगे। महिलाओं से एक साथ बैठकर बात करना, उनकी दुख तकलीफ सुनना, पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। पहले के प्रधानमंत्री भी लोगों से मिलते थे लेकिन तब प्रोटोकॉल बहुत होता था। अब लगता है कि आमजन के लिए प्रोटोकॉल कम हो गया है। महिलाओं ने खुले मन से मोदी के सामने प्रधानमंत्री आवास से जीवन में आए बदलाव को बयां किया। हाथ जोड़कर आभार भी जताया।
क्या कहा महिला लाभार्थियों ने
त्रिपुरा की रुपाली शाह ने कहा, प्रधानमंत्री आवास से मेरे जीवन में बदलाव आया है। 45 साल पुराने मकान में रहते थे। बेटी की तबीयत खराब रहती थी। अब लगता है जीवन में पंख लग गए हैं। मैं घर में ट्यूशन पढ़ाती हूं। पति भी अब दुकान का कुछ सामान घर में रख सकते हैं। प्रधानमंत्री से मिलकर लगा कि जैसे हम अपने परिवार के सदस्य के साथ बैठे हैं।
घर में सुख शांति आ गई
लुधियाना की पूनम ने कहा, पहले कच्चा मकान होने से सर्दी, गर्मी और बरसात हर मौसम में दिक्कत थी। अब अपना पक्का मकान बन गया है। प्रधानमंत्री आवास से घर में सुख शांति आ गई है। मैंने कभी सोचा नहीं था कि मोदी जी से मिलने का मौका मिलेगा लेकिन उनके बीच इतनी देर बैठकर मैं बता नहीं सकती कि कितनी खुशी हुई है।
अपने मकान में रहने का सपना पूरा
तेलंगाना की खेतजोती ने कहा, मुझे अप्रैल 2017 में आवास मिला था। प्रधानमंत्री आवास में शौचालय, पानी बिजली की सुविधा भी है। सालों तक कच्चे मकान या किराए के मकान में रहने के बाद अपने मकान में रहने का सपना पूरा हुआ है। विश्वास नहीं हो रहा है कि प्रधानमंत्री इतनी देर तक मेरे पास बैठे रहे, मुझसे बात की।
जीवन को नई उड़ान मिली
गोवा की अनंया रेगे ने कहा, मैं पहले गांव में किराए के मकान में रहती थी। शहर के एक प्राइमरी स्कूल में टीचर हूं। पहले मकान नहीं होने के कारण परेशानी होती थी लेकिन अब शहर में मकान मिलने से परेशानी दूर हुई है। अब नौकरी पर जाने में आसानी होती है। अपना मकान मिलने से जीवन को नई उड़ान मिली है।
किन्नर की भी जिंदगी बदली
रामपुर की अब्दुल खालिद उर्फ चांदनी ने कहा कि मैं नाच गाकर जीवन यापन करती हूं। पहले टूटे कच्चे मकान में रहती थी। अब पक्के घर में रहने लगी हूं। पहले पानी बिजली की परेशानी थी, अब कोई टेंशन नहीं है।
सोचा नहीं था कभी पक्का मकान मिलेगा
अहमदाबाद की वालीबेन भीखाभाई ने कहा, मैं अहमदाबाद में कागज बीनने का काम करती थी। सोचा नहीं था कि परिवार की गरीबी में कभी पक्का मकान मिल पाएगा। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना से यह सच हुआ है। गुजरात में कई कार्यक्रमों में मोदीजी को देखा था लेकिन मिलना आज हुआ। उन्होंनें बात की, मेरे लिए यही बहुत है।
मुलाकात हुई पर बात नहीं
प्रधानमंत्री से संवाद के लिए आई पूर्वोत्तर राज्यों की महिलाओं को खुशी तो थी लेकिन भाषा संबंधी समस्या के कारण उनका संवाद नहीं हो सका। नगालैंड, मिजोरम, अरुणाचल सहित कई राज्यों की महिलाएं बात नहीं कर सकीं। एक महिला ने मोदी के पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाहा, लेकिन वह पीछे हट गए। मोदी ने हाथ जोड़कर अभिवादन किया।