बसपा सुप्रीमो मायावती ने बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी को टिकट न देकर एक तीर से दो निशाने साधे हैं। पहला, उनके बड़े भाई सिगबतुल्लाह अंसारी के सपा में जाने के बाद बसपा को यह लग रहा है कि मुख्तार भी देर-सबेर सपा का दामन थाम लेंगे। दूसरा, अन्य दल भी राजभर वोटों को साधने के लिए जोर लगाए हैं और मऊ सीट पर राजभरों का वोट काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में बसपा प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर को यहां से टिकट देकर राजभरों को साधने की कोशिश की है।
मायावती ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा कि पार्टी का पूरा प्रयास रहेगा कि विधानसभा चुनाव में किसी भी बाहुबली या माफिया को चुनाव न लड़ाया जाए। पार्टी के प्रभारी भी उम्मीदवारों का चयन करते समय इसका ध्यान रखें। वहीं, सियासी गलियारों में चर्चा है कि मुख्तार परिवार की सपा से नजदीकी के चलते मायावती उनसे बेहद नाराज हैं। मुख्तार के तीसरे भाई अफजाल अंसारी गाजीपुर से बसपा सांसद हैं।
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बाहुबली मुख्तार अंसारी
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गौरतलब है कि मुख्तार को बसपा ने वर्ष 2017 के चुनाव में मऊ से जबकि उनके बेटे अब्बास अंसारी को घोसी विधानसभा से चुनाव लड़ाया था। मुख्तार चुनाव जीत गए थे और अब्बास चुनाव हार गए थे।
पहले भी चुनावी रण में हो चुका है आमना-सामना
मुख्तार अंसारी और भीम राजभर चुनावी रण में पहले भी एक दूसरे के खिलाफ ताल ठोंक चुके हैं। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में मऊ सदर सीट से बसपा ने भीम राजभर को मुख्तार के खिलाफ चुनाव लड़ाया था। उस समय बसपा में रहे मुख्तार व उनके भाई अफजाल ने बगावत कर कौमी एकता दल का गठन किया था।
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बसपा सुप्रीमो मायावती।
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मुख्तार ने अपना दल से चुनाव लड़ा था और बसपा के प्रत्याशी भीम राजभर ने तगड़ी चुनौती दी थी। हालांकि मुख्तार छह हजार वोटों से चुनाव जीत गए थे।
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एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी
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करोड़ों देकर बसपा से टिकट न खरीदें मुसलमान : एआईएमआईएम
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैय्यद आसिम वकार ने कहा कि बसपा ‘यूज एंड थ्रो’ की राजनीति करती है। मुसलमान करोड़ों रुपये देकर उससे टिकट न खरीदें, क्योंकि उनकी कम्युनिटी का वोट उन्हें ट्रांसफर नहीं होता है। ये पैसे भी लेते हैं और आपके वोट भी लेते हैं।’ वकार ने कहा, हम मुसलमानों को वोट भी दिलाएंगे और विधायक भी बनवाएंगे।