हाल के दिनों में पुलिसिया कार्यशैली की वजह से सरकार की अनेक मौके पर किरकिरी हुई है। ज्यादातर मामलों में छोटे पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई करके अधिकारियों ने पीछा छुड़ा लिया। एक के बाद एक घटनाओं की वजह से सरकार कठघरे में खड़ी हुई है। हाल ही में मेरठ जिले में विपरीत धर्म के एक जोड़े पर पुलिसिया कहर टूटा था। पुलिसकर्मियों द्वारा लड़की की पिटाई की गई और उसके ही दोस्त के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर महिला पुलिसकर्मियों द्वारा मांगी जाती रही।
वीडियो वायरल हुआ तो डीजीपी ऑफिस भी सक्रिय हुआ और तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। इसी तरह अलीगढ़ में एसएसपी ने एनकाउंटर की लाइव रिपोर्टिंग कराकर पुलिस की भद पिटवा ली थी। मामला तूल पकड़ा तो डीजीपी ने अलीगढ़ के एसएसपी को तलब कर लिया और पूरे मामले की जानकारी ली। लेकिन तब तक मीडिया में सरकार की काफी फजीहत हो चुकी थी।
फर्जी एनकाउंटर का विपक्ष लगाता रहा है आरोप
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पुलिस पर गोली मारने का आरोप
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इतना ही नहीं नोएडा में जितेंद्र पर फायर करने का मामला हो या मथुरा में एनकाउंटर के दौरान गई मासूम माधव की जान का मामला। उक्त दोनों मामलों में भी सरकार की जमकर फजीहत हुई थी। समाजवादी पार्टी के विधानपरिषद में नेता संजय लाठर एनकाउंटर के दौरान बेगुनाहों की मौत का मामला विधान परिषद में भी उठा चुके हैं।
आचरण को लेकर अब तक
जिस समय लखनऊ के पॉश इलाके में दो पुलिसकर्मी अपने आपराधिक कृत्य से देश भर में यूपी पुलिस की फजीहत की पटकथा लिख रहे थे उसी समय प्रदेश के डीजीपी ओम प्रकाश सिंह गाजियाबाद में ऐेसे ही मामलों की रोकथाम के लिए लेक्चर देने की तैयारी कर रहे थे। पुलिसकर्मियों के व्यवहार में सुधार लाने के लिए डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने गाजियाबाद और नोएडा में पुलिसकर्मियों को नियम विरुद्ध, अवैधानिक और अपराधिक आचरण न करने और संवेदनशील बनाने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया था।
इसके लिए 29 सितंबर को गाजियाबाद में और 30 सितंबर को नोएडा में पुलिसकर्मियों के साथ डीजीपी का संवाद कार्यक्रम निर्धारित किया गया था। इस कार्यक्रम में डीजीपी ने अवैधानिक और अपराधिक आचरण न करने के लिए निर्देश दिया। डीजीपी ने कहा कि लखनऊ के मामले में एसएसपी लखनऊ को संबंधित सिपाहियों के खिलाफ 302 का मुकदमा दर्ज करके उत्तर प्रदेश अधीनस्थ श्रेणी के अधिकारियों व कर्मचारियों की दंड एवं अपील नियमावली 1991 के तहत सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। डीजीपी ने कहा कि, जनवरी से अब तक 219 पुलिस कर्मचारियों को निलंबित और 10 पुलिस कर्मचारियों को बर्खास्त किया जा चुका है।