{"_id":"5b1a4c9f4f1c1ba66e8b6d56","slug":"unicef-started-campaign-before-father-s-day","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"आप बनना चाहते हैं सुपर डैड तो करना पड़ेगा बस इतना सा काम, मिलेगा ये शानदार तोहफा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आप बनना चाहते हैं सुपर डैड तो करना पड़ेगा बस इतना सा काम, मिलेगा ये शानदार तोहफा
Sat, 09 Jun 2018 12:43 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 09 Jun 2018 12:43 PM IST
विज्ञापन
1 of 5
डेमो
- फोटो : डेमो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
एक बच्चे के लिए जितना मां का प्यार जरूरी है उतना ही पिता का दुलार भी चाहिए। मां ममता की छांव है तो पिता वट वृक्ष। हर विपरीत परिस्थिति में बच्चों के लिए ढाल बनकर खड़े रहने वाले पिता की अहमियत को दर्शाने के लिए यूनिसेफ ने ‘बाप वाली बात’ और ‘अर्ली मोमेंट्स मैटर’ नाम से मुहिम शुरू की है।
2 of 5
डेमो
- फोटो : डेमो
इसमें सभी पिताओं को बच्चों के साथ प्यार भरे पलों की तस्वीरें और दस सेकंड से ढाई मिनट तक के वीडियो को सोशल मीडिया पर सुपरडैड के नाम से 18 जून तक साथ पोस्ट करना होगा। यह जानकारी बृहस्पतिवार को यूनिसेफ की जनसंपर्क विशेषज्ञ गीताली त्रिवेदी ने दी।
3 of 5
- फोटो : डेमो
गीताली ने बताया कि समाज के कुछ हिस्सों में पिता को सख्त छवि वाला समझा जाता है। बच्चे के लालन-पालन को मां या घर की औरतों के जिम्मे छोड़ दिया जाता है। ऐसे में बच्चे इस स्नेह से महरूम रह सकते हैं, इसे तोड़ने के लिए इस वर्ष यूनिसेफ ने यह अभियान शुरू किया है। इसमें चुने गए पिताओं को यूनिसेफ के ब्रांड एंबेसडर सचिन तेंदुलकर द्वारा साइन किया क्रिकेट बैट दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 5
- फोटो : डेमो
उन्हाेंने बताया कि इस वर्ष फादर्स-डे पर पिताओं को बच्चों की लालन-पालन में भूमिका को हाईलाइट किया जाएगा। जन्म के साथ ही शुरुआती तीन वर्ष में शिशु के दिमाग का 80 प्रतिशत विकास हो चुका होता है। ऐसे में बच्चे के दिमाग को गतिविधियों में भागीदारी के लिए प्रेरित करना स्वस्थ दिमागी विकास को सुनिश्चित करता है।
विज्ञापन
5 of 5
- फोटो : डेमो
यूनिसेफ की अर्ली चाइल्डहुड डवलपमेंट चीफ डॉ. पिया ब्रिटो ने अपने संदेश में कहा कि पिता बच्चे के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं, उनके जरिए बच्चों को सबसे अच्छा बचपन दिया जा सकता है। न्यूरोसाइंस के अनुसार, बच्चे को पहले एक हजार दिन में मिला प्रेम और दिमागी स्टीम्युलेशन उसके संपूर्ण जीवन पर डालने वाले प्रभाव पैदा करते हैं। उसे सुरक्षा का अहसास मिलता है, जो मनोवैज्ञानिक रूप से मदद करता है। यह जीवन भर के लिए बच्चे के व्यवहार, उसके आत्मविश्वास और आत्म सम्मान पर असर डालती है।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे| Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।