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आप बनना चाहते हैं सुपर डैड तो करना पड़ेगा बस इतना सा काम, मिलेगा ये शानदार तोहफा

Sat, 09 Jun 2018 12:43 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 09 Jun 2018 12:43 PM IST
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unicef started campaign before father's day
डेमो - फोटो : डेमो
एक बच्चे के लिए जितना मां का प्यार जरूरी है उतना ही पिता का दुलार भी चाहिए। मां ममता की छांव है तो पिता वट वृक्ष। हर विपरीत परिस्थिति में बच्चों के लिए ढाल बनकर खड़े रहने वाले पिता की अहमियत को दर्शाने के लिए यूनिसेफ ने ‘बाप वाली बात’ और ‘अर्ली मोमेंट्स मैटर’ नाम से मुहिम शुरू की है।
unicef started campaign before father's day
डेमो - फोटो : डेमो
इसमें सभी पिताओं को बच्चों के साथ प्यार भरे पलों की तस्वीरें और दस सेकंड से ढाई मिनट तक के वीडियो को सोशल मीडिया पर सुपरडैड के नाम से 18 जून तक साथ पोस्ट करना होगा। यह जानकारी बृहस्पतिवार को यूनिसेफ की जनसंपर्क विशेषज्ञ गीताली त्रिवेदी ने दी।
unicef started campaign before father's day
- फोटो : डेमो
गीताली ने बताया कि समाज के कुछ हिस्सों में पिता को सख्त छवि वाला समझा जाता है। बच्चे के लालन-पालन को मां या घर की औरतों के जिम्मे छोड़ दिया जाता है। ऐसे में बच्चे इस स्नेह से महरूम रह सकते हैं, इसे तोड़ने के लिए इस वर्ष यूनिसेफ ने यह अभियान शुरू किया है। इसमें चुने गए पिताओं को यूनिसेफ के ब्रांड एंबेसडर सचिन तेंदुलकर द्वारा साइन किया क्रिकेट बैट दिया जाएगा।
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unicef started campaign before father's day
- फोटो : डेमो
उन्हाेंने बताया कि इस वर्ष फादर्स-डे पर पिताओं को बच्चों की लालन-पालन में भूमिका को हाईलाइट किया जाएगा। जन्म के साथ ही शुरुआती तीन वर्ष में शिशु के दिमाग का 80 प्रतिशत विकास हो चुका होता है। ऐसे में बच्चे के दिमाग को गतिविधियों में भागीदारी के लिए प्रेरित करना स्वस्थ दिमागी विकास को सुनिश्चित करता है।
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- फोटो : डेमो
यूनिसेफ की अर्ली चाइल्डहुड डवलपमेंट चीफ डॉ. पिया ब्रिटो ने अपने संदेश में कहा कि पिता बच्चे के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं, उनके जरिए बच्चों को सबसे अच्छा बचपन दिया जा सकता है। न्यूरोसाइंस के अनुसार, बच्चे को पहले एक हजार दिन में मिला प्रेम और दिमागी स्टीम्युलेशन उसके संपूर्ण जीवन पर डालने वाले प्रभाव पैदा करते हैं। उसे सुरक्षा का अहसास मिलता है, जो मनोवैज्ञानिक रूप से मदद करता है। यह जीवन भर के लिए बच्चे के व्यवहार, उसके आत्मविश्वास और आत्म सम्मान पर असर डालती है।
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