राजधानी का चुनावी परिदृश्य इस बार काफी दिलचस्प होगा। लड़ाई पार्टियों व प्रत्याशियों की जीत-हार से ज्यादा विरासत की जंग में तब्दील होती जा रही है। कहीं सियासी परिवारों के उत्तराधिकारियों के बीच प्रतिष्ठा बचाने के लिए वर्चस्व की लड़ाई है तो कहीं नए सियासी कुनबे अपने पैर जमाने की कोशिश में जुटे दिखाई दे रहे हैं। लखनऊ शहर और ग्रामीण क्षेत्र को मिलाकर कुल नौ सीटों में छह पर नेताओं के घर-परिवार के लोग चुनाव लड़ रहे हैं। प्रत्याशियों की बात करें तो आठ उम्मीदवार किसी सियासी घराने या अलग-अलग पार्टियों के प्रमुख नेताओं के परिवार के हैं। इनमें छह भाजपा से हैं। प्रदेश सरकार के तीन मंत्रियों अभिषेक मिश्र, शारदा प्रताप शुक्ल और रविदास मेहरोत्रा के मैदान में होने से मुकाबला और भी रोचक मोड़ लेता दिखाई दे रहा है।
लखनऊ के रोचक मुकाबले में इन उम्मीदवारों का होगा आमना-सामना
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दो घरानों की लड़़ाई
राजधानी के शहरी क्षेत्र की पांच सीटों में सबसे रोचक मुकाबला कैंट का दिखाई दे रहा है। यहां की लड़ाई दो बड़े सियासी घरानों की लड़ाई में तब्दील हो गई है। भाजपा ने मौजूदा विधायक डॉ. रीता बहुगुणा जोशी तो सपा ने अपर्णा यादव को उम्मीदवार बनाया है। डॉ. जोशी पिछली बार कांग्रेस के टिकट पर कैंट से विधायक चुनी गई थीं। इस बार वे भाजपा से लड़ रही हैं। डॉ. रीता प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हेमवती नंदन बहुगुणा की पुत्री और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की बहन हैं। हेमवती नंदन भी लखनऊ संसदीय सीट से सांसद रह चुके हैं। अपर्णा, सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव की पत्नी हैं। स्वाभाविक रूप से कैंट की लड़ाई इन दो उम्मीदवारों से ज्यादा दो बड़े सियासी परिवारों की प्रतिष्ठा के बीच है। इसके चलते आने वाले दिनों में इस सीट का मुकाबला काफी दिलचस्प हो सकता है।
लखनऊ पूरब और उत्तर सीट पर भी नेता पुत्रों की मौजूदगी ने दोनों सीटों के मुकाबले में विरासत की जंग का रंग घोल दिया है। पूरब सीट पर भाजपा से चुनाव लड़ रहे आशुतोष टंडन उर्फ गोपाल टंडन, लखनऊ से सांसद और विधायक रहे पूर्व मंत्री लालजी टंडन के पुत्र हैं। स्वाभाविक रूप से उनकी जीत-हार खुद उनसे ज्यादा उनके पिता की सियासी पकड़ का पैमाना बनने वाली है। उत्तर सीट पर भाजपा ने डॉ. नीरज बोरा को उम्मीदवार बनाया है। डॉ. बोरा लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे स्व. डीपी बोरा के पुत्र हैं। स्व. बोरा जनता दल से विधायक भी रहे थे। साथ ही राजधानी के प्रमुख सियासी चेहरे माने जाते थे। स्वाभाविक रूप से डॉ. नीरज बोरा खुद की पकड़ व पहुंच से ज्यादा अपने पिता की सियासी विरासत के सहारे चुनाव लड़ रहे हैं। डॉ. बोरा का मुकाबला सपा से उम्मीदवार बनाए गए इस क्षेत्र के मौजूदा विधायक व प्रदेश सरकार मेें मंत्री अभिषेक मिश्र से है। मिश्र ने 2012 में डॉ. नीरज को हराया था। तब नीरज कांग्रेस से उम्मीदवार थे।
सरोजनीनगर से सपा ने मौजूदा विधायक व प्रदेश सरकार में मंत्री शारदा प्रताप शुक्ल की जगह अनुराग यादव को उम्मीदवार बनाया है। अनुराग, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चाचा केे लड़के और बदायूं से सांसद धर्मेंद्र यादव के भाई हैं। इनके मुकाबले भाजपा ने पार्टी में विभिन्न पदों पर रह चुके दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाति सिंह को मैदान में उतारा है। वैसे तो दयाशंकर सिंह किसी सदन के सदस्य नहीं रहे हैं, लेकिन पार्टी के पुराने नेता हैं। पिछले वर्ष बसपा प्रमुख मायावती पर एक टिप्पणी को लेकर वे काफी चर्चित रहे थे। इसी के बाद मायावती और बसपा नेताओं पर आक्रामक टिप्पणी के चलते स्वाति सिंह का नाम चर्चा में आया था। बाद में भाजपा ने स्वाति सिंह को पार्टी के महिला मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर एक तरह से बसपा को जवाब देने की कोशिश की कि वह किसी दबाव में नहीं है। सरोजनीनगर सीट के मौजूदा सपा विधायक शुक्ल, इस बार रालोद के टिकट पर मुकाबला कर रहे हैं। पर, यहां की जंग मुलायम परिवार के 23वें सदस्य की सियासत में एंट्री से तो भाजपा की तरफ से आक्रामक तेवर वाली महिला नेत्री को सियासत में स्थापित करने बीच केंद्रित हो रही है।
नए सियासी कुनबों की दस्तक
राजधानी के मौजूदा उम्मीदवारों पर नजर दौड़ाएं तो नए सियासी कुनबे की दस्तक भी सुनाई दे रही है। मलिहाबाद सीट पर भाजपा से उम्मीदवार बनाई गईं जयदेवी, मोहनलालगंज से मौजूदा सांसद कौशल किशोर की पत्नी हैं। कौशल किशोर मलिहाबाद से विधायक भी रह चुके हैं। जाहिर है कि इस सीट पर जयदेवी की लड़ाई का आधार पति कौशल की सियासी विरासत ही है। इसी तरह भाजपा की तरफ से बख्शी का तालाब सीट से उम्मीदवार बनाए गए अविनाश त्रिवेदी भी खुद से ज्यादा पिता व बाबा की सियासी विरासत के सहारे मैदान में हैं। अविनाश के पिता चंद्रशेखर त्रिवेदी महोना (परिसीमन से पहले बख्शी तालाब सीट का नाम) से दो बार तो उनके बाबा रामपाल त्रिवेदी तीन बार विधायक रह चुके हैं।