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जिस यूनिवर्सिटी में चपरासी हैं पापा, उसी में बेटी बनी गोल्ड मेडलिस्ट
Thu, 21 Jan 2016 12:04 PM IST
Updated Thu, 21 Jan 2016 12:04 PM IST
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मन में चाह हो तो कोई भी अड़चन मंजिल पर पहुंचने से नहीं रोक सकती। कुछ लोग अपनी असफलता को छुपाने के लिए जीवन की समस्याओं का परदा ओढ़ लेते हैं तो कुछ संघर्ष करके सफलता की सुनहरी इबारत लिखते हैं।
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कुछ ऐसी ही है बीबीएयू में आरक्षित वर्ग से एमसीए टॉपर रत्ना रावत की कहानी। जिन्होंने मोमबत्ती की रोशनी में पढ़कर मेडल पर कब्जा जमाया है।
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खास बात ये है कि पीजीआई के पास स्थित कल्ली पूरब निवासी रत्ना के पिता उसी यूनिवर्सिटी में चपरासी हैं जिसमें इसने टॉप किया है। रत्ना कहती है कि उन्हें असल प्रेरणा अपने पिता बृज मोहन से ही मिलती है, जिन्होंने चपरासी की नौकरी करते हुए बीएससी की पढ़ाई पूरी की।
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रत्ना ने बताया कि उसे पढ़ाई के दौरान कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। जिस जगह वह रहते हैं अक्सर ही बिजली की आवाजाही रहती है। ऐसे में उसे मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ना पड़ा। घर के आसपास रात में अक्सर ही वहां मारपीट और शोर-शराबे की आवाज होती है जिसमें उसके लिए पढ़ना आसान नहीं था, लेकिन कोई भी बाधा रत्ना को आगे बढ़ने से न रोक सकी।
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छह भाई बहनों में सबसे बड़ी रत्ना का सपना एकेडमिक्स में जाने का है। रिसर्च में जाने की तैयारी के साथ ही वह एक निजी कंपनी में नौकरी भी कर रही है, जिससे पिता पर आर्थिक बोझ कम हो सके और पिता के लिए कर्ज को चुकाने में सहायता कर सकें।
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