फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

मकर संक्रांति: खिचड़ी सिर्फ व्यंजन ही नहीं बल्कि इनके लिए एक परंपरा है, अलग है मनाने का अंदाज

Wed, 15 Jan 2020 04:32 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 15 Jan 2020 04:32 PM IST
विज्ञापन
This is how people celebrate makar sanktanri in Awadh.
- फोटो : अमर उजाला

भारतीय परिवारों में खिचड़ी महज व्यंजन नहीं एक परंपरा है। अपने आप में पूरी संस्कृति है और धर्म का उदाहरण है। अवध के आंगन में भी यह परंपरा फल-फूल रही है। अलग-अलग वेशभूषा, अलग-अलग भाषा वाले लोग हैं, उनके त्योहार मनाने के भिन्न तरीके हैं।



मकर संक्रांति लोक जीवन का पर्व है। पर्व का मूल है नए अन्न को ग्रहण करना, पशुओं के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना और सूर्य की उपासना करना। मलयाली समुदाय जहां इसे पोंगल के रूप में मनाता है तो बंगाली समुदाय के लोग इसे पोष संक्रांति के रूप में मनाते हैं। आइए साथ मिलकर हम सब भी चखें स्वाद खिचड़ी का...।

This is how people celebrate makar sanktanri in Awadh.
- फोटो : अमर उजाला

दोस्त बनाने और उल्लास मनाने का दिन
एसबीआई के डीजीएम पीके दास कहते हैं कि संक्रांति पर्व सूर्य की आराधना का पर्व है। चावल और केले का प्रसाद चढ़ाते हैं। घर को फूलों से सजाते हैं। छोटे बच्चों के लिए यह दिन खास है, क्योंकि इस दिन हुई दोस्ती जीवनभर निभाई जाती है। 5 से 10 साल के बच्चे, जो आपस में दोस्त बनना और बनाना चाहें, वे प्रसाद लेकर उसके घर चले जाते हैं और कहते हैं कि तुम मेरे मकर हो। जीवन भर इस दोस्त को नाम के बजाय मकर के नाम से पुकारा जाता है। (तस्वीर में- आशीर्वाद, प्रशांत, आद्रामनी, आशुतोष, दीपाली)

This is how people celebrate makar sanktanri in Awadh.
- फोटो : अमर उजाला

भगवान अयप्पा की पूजा से दिन की शुरुआत
मकर संक्रांति के दिन मलयाली लोग मकरविलक्कू त्योहार मनाते हैं। अलीगंज निवासी विश्वनाथ चंद्रन कहते हैं कि इस दिन भगवान अयप्पा की विशेष पूजा से दिन की शुरुआत होती है। हम सभी मंदिर जाते हैं। इसी दिन से मलयालम पंचांग के पहले दिन की शुरुआत भी मकर से होती है। इस दिन 12-13 तरह के पकवान बनाए जाते हैं। (तस्वीर में-  विश्वनाथ चंद्रन, एकता चंद्रन बेटी नायसा व नायरा के साथ)

विज्ञापन
विज्ञापन
This is how people celebrate makar sanktanri in Awadh.
मकर संक्रांति - फोटो : अमर उजाला

उल्लास से मनाते हैं पौष संक्रांति
बंगाली समाज इस दिन को पौष संक्रांति के रूप में मनाता है। लालबाग निवासी ओली राय कहती हैं कि हमारे यहां चावल से बने व्यंजन बनाने की परंपरा है। पीठा और पाटी सपता विशेष तौर पर बनाया जाता है। यह पकवान खजूर से बने गुड़ और पीसे हुए चावल से बनाया जाता है। इसमें नारियल भी मिलाते हैं। यह दिन नई फसलों का दिन होता है। इस दिन खजूर का इस्तेमाल शुभ माना जाता है। (तस्वीर में- शुभंकर राय, पत्नी ओली राय व बेटी अनुजा राय डे के साथ)

विज्ञापन
This is how people celebrate makar sanktanri in Awadh.
मकर संक्रांति - फोटो : अमर उजाला

चौदह चीजों का दान करती हैं महिलाएं
मोतीनगर निवासी सुधीश गर्ग बताते हैं कि मारवाड़ी समाज में काला तिल का लड्डू, उड़द की छिलके वाली दाल और चावल को हाथ लगाकर अछूता बना देते हैं। गेहूं व बाजरे के आटे का चूरमा प्रसाद के लिए बनाया जाता है। मंदिर जाकर दान-पुण्य करते हैं। साथ ही घर की महिलाएं सुख-समृद्धि की कामना के साथ 14 चीजों का दान करती है। यह चीजें कुछ भी हो सकती हैं। (तस्वीर में- सुधीश गर्ग, संगीता, हर्षिता और प्रियांशु)

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed