टीसीएस लखनऊ को बचाने के लिए आईटी प्रोफेशनल्स मंगलवार को सड़कों पर उतर आए। पहले उन्होंने टीसीएस अवध पार्क इमारत के निकट स्थित पार्क में बैनर लेकर संस्थान का विस्थापन रुकवाने के लिए प्रदेश सरकार से गुजारिश की। इस दौरान बड़ी संख्या में स्टाफ मौजूद रहा। वे सभी अपनी पहचान मीडिया में उजागर होने देना नहीं चाहते, लेकिन उम्मीद कर रहे हैं कि उनके इस प्रदर्शन से टीसीएस मैनेजमेंट और प्रदेश सरकार का दिल पसीजेगा और वे संस्थान को यहां से जाने से रोक सकेंगे।
TCS लखनऊ को बचाने सड़कों पर उतरे आईटी प्रोफेशनल्स, निकाला कैंडिल मार्च
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प्रदर्शन में शामिल एक युवा आईटी प्रोफेशनल ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले ही टीसीएस जॉइन किया था। यहां फ्रेशर के तौर पर उन्हें करीब 25 हजार रुपये वेतन मिल रहा है। उनका परिवार इसी नौकरी पर निर्भर करता है। अगर उन्हें यहां से नोएडा भी भेजा जाता है, तो उन्हें नहीं पता वे कैसे वहां सर्वाइव करेंगी और कैसे अपने परिवार के खर्च के लिए पैसा बचा सकेंगी। इसी तरह के कई मामले फ्रेशर्स से लेकर मिड लेवल आईटी प्रोफेशनल्स के हैं, जो लखनऊ में कॉस्ट ऑफ लिविंग कम होने की वजह से परिवार चलाने लेते हैं, लेकिन दूसरे शहरों में जाकर रह पाना उनके लिए संभव नहीं होगा। ऐसे में नौकरी जाने का पूरा अंदेशा है।
ये आईटी प्रोफेशनल्स टीसीएस के रीजनल हैड अमिताभ तिवारी से मिलने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि वे उनकी बात सुन सकें। गौरतलब है कि टीसीएस ने अपने लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय को बंद करने का निर्णय लिया है। यहां काम कर रहे करीब दो हजार आईटी प्रोफेशनल्स और स्टाफ को दिसंबर के बाद पुणे, इंदौर और नागपुर जैसे शहरों में भेजने की तैयारी की जा रही है।
दूसरी ओर इन कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें प्रदेश सरकार से ही अपेक्षा है कि वह कोई कदम उठाएगी और टीसीएस लखनऊ का विस्थापन रोका जा सकेगा। उन्होंने कहा सरकार और टीसीएस प्रबंधन के बीच किसी भी बातचीत में कर्मचारियों के हितों का ख्याल रखे जाने और उनके प्रतिनिधिमंडल को बातचीत में शामिल करने की भी उम्मीद जताई।
टाटा से संपर्क
प्रदर्शन में शामिल स्टाफ सदस्यों ने बताया कि वे रतन टाटा से संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि वे मामले में हस्तक्षेप करें। टाटा हमेशा यूपी का भला चाहते रहे हैं। 21 दिसंबर 2015 में तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव से मुलाकात के दौरान भी उन्होंने कहा था कि वे ‘हर तरह से यूपी के विकास को सहयोग देने को तैयार हैं। इसके लिए वे अपना व्यक्तिगत समय, ऊर्जा और प्रयास देंगे, वे यूपी सरकार और राज्य के दोस्त हैं। यूपी को हमेशा गलत समझा गयास है, वह देश में अपनी जगह हासिल करेगा और विभिन्न मोर्चों पर नेतृत्व भी करेगा।’