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इस महिला के महंत बनने के फैसले पर 9 दिन घर मे नहीं जला था चूल्हा, इस शिव मंदिर में करती हैं सेवा

Sun, 21 Jul 2019 06:20 PM IST
ishwar ashish कविश अजीज लेनिन/अमर उजाला, लखनऊ
कविश अजीज लेनिन/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 21 Jul 2019 06:20 PM IST
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story of mahant devyagiri.
- फोटो : amar ujala

गोमती तट पर बसे मनकामेश्वर मन्दिर का इतिहास रामायण काल का है। कहा जाता है कि सीता को वनवास छोड़ने के बाद जब लक्ष्मण अयोध्या वापस जा रहे थे तो उनका मन बहुत खिन्न था। उदास मन से गोमतीं तट पर उन्होंने रात भर विश्राम किया और सुबह शिव की आराधना की जिससे उनके मन को शांति मिली। इस घटना के बाद यहां शिव मंदिर का निर्माण हुआ। मन्दिर के बारे में मान्यता है कि यहां दिल से मांगी हर कामना पूरी होती है। लिहाज़ा मन्दिर का नाम मनकामेश्वर रख दिया गया।

story of mahant devyagiri.
- फोटो : amar ujala

मन्दिर की महंत देव्यागिरी प्रदेश की एकमात्र महिला महंत हैं। बीएससी करने के दौरान वो अक्सर मन्दिर आती रहती थीं लेकिन एक बार मंदिर में उनके साथ एक अजीब घटना हुई।

story of mahant devyagiri.
महंत देव्यागिरी - फोटो : amar ujala
वो कहती हैं जब मैं मन्दिर आई और शिवलिंग पर हाथ रखा तो लगा कि शिवलिंग गायब हो गया और शरीर मे कुछ अजीब सा होने लगा। आंखों के नीचे अंधेरा छा गया और डर भी लगा कि पुजारी जी से क्या बताउंगी की शिवलिंग गायब हो गया। बहुत देर तक ऐसी ही हालत में रही और फैसला लिया कि अब शिव जी की भक्ति में ही जीवन व्यतीत करूंगी।
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story of mahant devyagiri.
- फोटो : amar ujala

देव्यागिरी के पिता आज अखबार में ब्यूरो चीफ थे। घर मे बहनें भी हैं लेकिन उनका लालन-पालन ननिहाल में ज़्यादा हुआ। जब उन्होंने घर में बताया कि वह शिव जी के चरणों मे रहना चाहती हैं तो घर में 9 दिन तक चूल्हा नही जला। किसी ने खाना नहीं खाया। ऐसा लग रहा था जैसे किसी की मय्यत हो गयी है लेकिन देव्यागिरी का फैसला अटल था। परिवार भी हार गया उनके आगे और वह 24 साल की उम्र में साल 2008 में मनकामेश्वर मन्दिर की महंत बन गयी।

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- फोटो : amar ujala

मन्दिर में सुबह शाम आरती होती है और भक्तों का तांता लगा रहता हैं। वहीं, सावन के महीने में पूरे प्रदेश से भक्त आते हैं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था का विशेष प्रबंध किया जाता है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की समस्या न हो।

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