गोमती तट पर बसे मनकामेश्वर मन्दिर का इतिहास रामायण काल का है। कहा जाता है कि सीता को वनवास छोड़ने के बाद जब लक्ष्मण अयोध्या वापस जा रहे थे तो उनका मन बहुत खिन्न था। उदास मन से गोमतीं तट पर उन्होंने रात भर विश्राम किया और सुबह शिव की आराधना की जिससे उनके मन को शांति मिली। इस घटना के बाद यहां शिव मंदिर का निर्माण हुआ। मन्दिर के बारे में मान्यता है कि यहां दिल से मांगी हर कामना पूरी होती है। लिहाज़ा मन्दिर का नाम मनकामेश्वर रख दिया गया।
इस महिला के महंत बनने के फैसले पर 9 दिन घर मे नहीं जला था चूल्हा, इस शिव मंदिर में करती हैं सेवा
कविश अजीज लेनिन/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sun, 21 Jul 2019 06:20 PM IST
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