राजनारायण (नेताजी) केंद्र में स्वास्थ्य मंत्री थे। बावजूद उनकी जीवन शैली बहुत सामान्य थी। दिल्ली स्थित बंगले पर आने-जाने में कोई रोक-टोक नहीं थी। एक दिन नेताजी जेब से 5000 रुपये निकाल कर तकिए के नीचे रखकर नहाने चले गए। किसी ने रुपये चुरा लिए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस की नेता तारकेश्वरी सिन्हा ने संस्मरण में लिखा है, ‘कुछ देर बाद राजनारायण को रुपये की जरूरत पड़ी तो उन्हें 5000 रुपये याद आए। निजी सचिव से बोले, ‘माहेश्वरी, कौन ले गया मेरे सिरहाने से पैसा?’ उन्हें बताया गया, ‘गोरखपुर से एक नौजवान आया था। जब आप आ नहा रहे थे तब वही नौजवान आपके कमरे में घूम रहा था।’ वो लड़का पकड़कर लाया गया।
राजनारायण ने चिल्लाते हुए कहा, ‘ कमीने! चोरी करता है?’ लोगों ने उसकी जेब से रुपये निकाल लिए। राजनारायण बंगले पर जमा भीड़ की तरफ देखते हुए कहा, ‘इसको निकाल दो घर से।’
राजनारायण जी को लोकसभा जाना था और मुझे घर। थोड़ी देर बाद हम दोनों पोर्टिकों में साथ आए। वह लड़का भी पीछे से आकर पोर्टिको में खड़ा हो गया। मैैने देखा कि वह सिसक रहा है। राजनारायण ने डपटते हुए उससे पूछा, ‘तुम अभी तक गए नहीं।’
लड़का बोला, ‘मेरे पास टिकट के पैसे नहीं हैं।’ मोटरकार में बैठने से पहले राजनारायण ने जेब में हाथ डाले और रुपये निकालकर देते हुए कहा, ‘जाओ खाना खाओ और टिकट कटाकर घर जाओ। हॉं! एक बात याद रखना कि कभी फिर अपनी शक्ल मुझे मत दिखाना।’