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पूर्व सीएम ने लोहिया के निजी सचिव की बेटी की शादी के लिए रुपये देने से किया इंकार, पढ़ें ये वाक्या
Mon, 11 Mar 2019 04:30 PM IST
ishwar ashish
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 11 Mar 2019 04:30 PM IST
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चंद्रभानु गुप्त
- फोटो : डेमो
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यूपी के मुख्यमंत्री रहे चंद्रभानु गुप्त निजी जीवन में काफी कंजूस थे, पर मदद मांगने आने वाले पर पहले तो भड़क जाते। पर, जब वह निराश होकर लौटने लगता तो खाली हाथ नहीं जाने देते। फिरोज गांधी के खिलाफ रायबरेली से चुनाव लड़े और डॉ. राममनोहर लोहिया के लंबे समय तक निजी सचिव रहे नंद किशोर के साथ भी एक बार ऐसा ही हुआ।
उनकी बेटी की शादी तय हो गई थी, पर उनके सामने पैसे की बड़ी समस्या थी। मित्रों ने मदद की, लेकिन तब भी वह धन कम ही रह गया। नंद किशोर ने अपने संस्मरण में लिखा है, ‘मैं गुप्त जी के पास गया और 5000 रुपये मांगे। वह भड़क गए और बोले, ‘क्या मैं कुबेर हूं, जो देखो वह चला आता है।
मेरे पास कुछ भी नहीं है।’ मैं भी उन्हें बड़बड़ाता हुआ लौट आया। दुखी और निराश होकर कॉफी हाउस में बैठ गया। लगभग दो घंटा हो गए। तभी प्रकाश मेहरोत्रा जो बाद में राज्यसभा सदस्य और असम के राज्यपाल भी बने वह कॉफी हाउस के अंदर आते दिखे।
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उनकी बेटी की शादी तय हो गई थी, पर उनके सामने पैसे की बड़ी समस्या थी। मित्रों ने मदद की, लेकिन तब भी वह धन कम ही रह गया। नंद किशोर ने अपने संस्मरण में लिखा है, ‘मैं गुप्त जी के पास गया और 5000 रुपये मांगे। वह भड़क गए और बोले, ‘क्या मैं कुबेर हूं, जो देखो वह चला आता है।
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मेरे पास कुछ भी नहीं है।’ मैं भी उन्हें बड़बड़ाता हुआ लौट आया। दुखी और निराश होकर कॉफी हाउस में बैठ गया। लगभग दो घंटा हो गए। तभी प्रकाश मेहरोत्रा जो बाद में राज्यसभा सदस्य और असम के राज्यपाल भी बने वह कॉफी हाउस के अंदर आते दिखे।
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आंखों में आ गए आंसू
सीधे मेरे पास आए और मुठ्ठी में पकड़े रुपये मुझे देते हुए बोले, ‘गुप्त जी ने यह 5000 रुपये आपके लिए भिजवाए हैं, रख लो।’ फिर उन्होंने 500 रुपये अपने पास से मुझे दिए। मैंने उनकी तरफ सवालिया निगाहों से देखने लगा तो बोले, ‘तुम्हारे नाराज होकर चले आने के बाद संयोग से मैं उनसे मिलने पहुंचा तो मुझे देखते हुए बोले ‘तुमसे बात नहीं करना चाहता क्योंकि 5000 रुपये न मिलने के कारण नंद किशोर अभी-अभी मुझसे नाराज होकर चला गया है।
उसकी बेटी की शादी है, लेकिन रुपये न होने के कारण मैं उसकी मदद नहीं कर पाया। उसकी पुत्री की शादी कैसे होगी?’ मेहरोत्रा ने बताया, ‘इसके बाद मैंने लोगों से पांच हजार रुपये एकत्र कर उन्हें दिए तो उन्होंने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।’ मेरी आंखों में आंसू आ गए।’
उसकी बेटी की शादी है, लेकिन रुपये न होने के कारण मैं उसकी मदद नहीं कर पाया। उसकी पुत्री की शादी कैसे होगी?’ मेहरोत्रा ने बताया, ‘इसके बाद मैंने लोगों से पांच हजार रुपये एकत्र कर उन्हें दिए तो उन्होंने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।’ मेरी आंखों में आंसू आ गए।’