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सावन के महीने में इस मंदिर में मांगने से पहले ही बाबा पूरी कर देते हैं मुराद

Tue, 18 Jul 2017 04:33 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 18 Jul 2017 04:33 PM IST
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story behind lucknow kalyangiri temple
कल्याणग‌िर‌ि मंद‌िर
नवाब आसिफुद्दौला के जमाने में स्थापित लखनऊ के प्राचीन कल्याण गिरि मंदिर की दूर-दूर तक ख्याति है। बाबा की महिमा इस कदर है कि यहां भक्तों को मनौतियां नहीं मांगनी पड़ती, बाबा खुद-ब-खुद उनकी मुराद पूरी कर देते हैं। खासकर सावन के महीने में इस मंद‌िर में पूजा का खास महत्व है।
story behind lucknow kalyangiri temple
कल्याणग‌िर‌ि मंद‌िर
बताते हैं कि नवाबी दौर में हरिद्वार से एक साधु कल्याण गिरि यहां आए और गोमती के किनारे आसन लगा लिया। एक अमरख के पेड़ के नीचे उन्होंने महादेव की प्रतिमा स्थापित की और उनकी पूजा-अर्चना कर पेड़ की खट्टी अमरख ग्रामीणों में बांट दी, लेकिन ये आम सी मीठी हो गई। 
story behind lucknow kalyangiri temple
कल्याणग‌िर‌ि मंद‌िर
इसके बाद बाबा का नाम दूर-दूर तक फैल गया। चर्चा जब नवाब तक पहुंची तो वहां से भी लोगों का आना शुरू हो गया। नवाब की तरफ से उनका मान-सम्मान करते हुए उन्हें विराजने के लिए नदी के किनारे उसी टीले के आसपास की तमाम जगह दे दी गई। 
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कल्याणग‌िर‌ि मंद‌िर
कालांतर में यही मंदिर पुराने लखनऊ में ठाकुरगंज कल्याण गिरि के नाम से संवरा। आज यहां अखाड़ा परंपरा के तहत पुजारी और महंत नियुक्त होते हैं। 
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कल्याणग‌िर‌ि मंद‌िर
वर्तमान में मंदिर की देखभाल महंत बाबा सुमेरु गिरि करते हैं। गुजरात के गिरनार पर्वत के महंतों का बराबर यहां आना-जाना लगा रहता है। 
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