लखनऊ महोत्सव की पांचवीं शाम पार्श्वगायक जावेद अली के नाम रही। उनके सूफियाना अंदाज को श्रोताओं ने जमकर सराहा। गायकी का जहां तालियों से इस्तकबाल किया, वहीं गाने गाकर उनका साथ भी दिया। जावेद अली ने अपने सुरीले अंदाज में सर्द रात में गर्माहट भर दी और एक से बढ़कर एक नगमे सुनाकर सूफी नाइट को यादगार बना दिया।
2 of 9
गायक जावेद अली
- फोटो : amar ujala
स्मृति उपवन में चल रहे लखनऊ महोत्सव में बृहस्पतिवार को सूफी नाइट का लुत्फ लेने के लिए खासी संख्या में दर्शक पहुंचे थे। सूफी नाइट में गायकी का जलवा बिखेरने के लिए पार्श्वगायक जावेद अली जैसे ही मंच पर पहुंचे, दर्शकों को जोश बढ़ गया। जावेद ने दर्शकों का इस्कतबाल स्वीकार करते हुए जोधा अकबर मूवी का मशहूर गाना ‘कहने को जशभने बहारा है...’ गाना शुरू किया तो श्रोता भी संग-संग गुनगुनाने लगे।
3 of 9
गायक जावेद अली
- फोटो : amar ujala
गायकी का कारवां आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अनवर फिल्म का ‘मौला मेरे, मौला मेरे...’ सुनाया। इसी क्रम में जावेद ने ‘आज दिन चढ़िया...’ सुनाया और उसके बाद जैसे ही ‘नैनों की मत सुनियो रे, नैना ठग लेंगे...’ पेश किया तो दर्शकों का जोश देखने लायक था। पीछे की सीटों पर खड़े होकर लोगों ने हाथ ऊपर कर गायक संग गीत गुनगुनाए।
4 of 9
गायक जावेद अली
- फोटो : amar ujala
इसके बाद उन्होंने सूफियाना अंदाज से लबरेज ‘हुस्ने जाना की तारीफ मुमकिन नहीं, आफरीन आफरीन...’ पेश किया। गायकी के कारवां के साथ-साथ श्रोताओं का जोशोखरोश भी बढ़ता जा रहा था। लगातार श्रोताओं की डिमांड भी आती रही, जिसे पार्श्वगायक ने एक-एक कर पूरा भी किया और अपनी आवाज का ऐसा जादू बिखेरा, जो श्रोताओं को हमेशा याद रहेगा।
5 of 9
गायक जावेद अली
- फोटो : amar ujala
जावेद अली ने दिल्ली 6 का गाना ‘अर्जियां...’ व जोधा अकबर फिल्म का ‘ख्वाजा मेरे ख्वाजा दिल में समां जा, शाहों का शाह तू अली का दुलारा...’ से रात को सूफियाना अंदाज से सराबोर कर दिया। इसके बाद ‘छाप तिलक सब छीनी मोसे नैना मिलाइये के... सुनाया।