जद (यू) के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव ने मंगलवार को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच महागठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा हुई। वार्ता के बाद शरद ने संवाददाताओं से कहा कि भाजपा के सत्ता में रहते देश का संविधान खतरे में है, इसलिए सभी गैर भाजपाई दलों को एक साथ आना होगा।
अखिलेश से मुलाकात के संबंध में सवाल पूछे जाने पर शरद ने कहा कि ‘साझा विरासत बचाओ अभियान’ के तहत वे पूरे देश में प्रमुख नेताओं से मिल रहे हैं। अखिलेश से मुलाकात भी इसी अभियान का हिस्सा था। मुलाकात में हुई बातों को बताने से इन्कार करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्षी दलों की एकता बहुत जरूरी हो गई है।
क्या बसपा सुप्रीमो मायावती से भी वे मुलाकात करेंगे? शरद ने कहा कि मायावती से मुलाकात उनके एजेंडे में है, लेकिन इस बार संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग देश को बांटने वाले मुद्दों को हवा दे रहे हैं। सीएम योगी विकास कार्य करने के बजाय मंदिरों के चक्कर लगाने में व्यस्त हैं। यह पूछे जाने पर कि आप भी तो राजग के संयोजक रहे हैं, शरद ने कहा कि वो समय अटल बिहारी वाजेपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी का था। उस वक्त भाजपा राष्ट्रीय एजेंडे पर चल रही थी, देश को बांटने वाले एजेंडे पर नहीं। उन्होंने कहा कि आने वाला समय गैर भाजपा दलों का है।
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शरद यादव
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यह पूछे जाने पर कि विपक्षी महागठबंधन का नेता कौन होगा, शरद ने कहा कि गाड़ी चलने से पहले ड्राइवर की जानकारी मांगना उचित नहीं। शरद यादव गांधी भवन में हुए पिछड़ा, अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी मंच के प्रांतीय अधिवेशन में भी शामिल हुए।