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पूजा पाठ और आराम फरमाने की जगह ये बुजुर्ग कर रहे हैं खास काम

Wed, 03 Oct 2018 03:57 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 03 Oct 2018 03:57 PM IST
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senior citizens joined each one teach one
- फोटो : डेमो

उम्र के जिस पड़ाव पर लोग अपनी सारी जिम्मेदारियों से निवृत्त होकर घर में पूजा-पाठ में अपना मन लगाते हैं और आराम फरमा रहे होते हैं,  उसी उम्र की दहलीज पर कुछ बुजुर्गों ने हाथ में कॉपी पेंसिल थाम कर पढ़ने का दृढ़ संकल्प लिया है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) लखनऊ द्वारा पहली बार ‘ईच वन टीच वन’ योजना लागू की गई है। इसके अंतर्गत डायट के छात्र एक-एक निरक्षर को पढ़ाने का कार्य करेेंगे। मंगलवार को इस योजना की शुरुआत की गई।

senior citizens joined each one teach one
- फोटो : डेमो
डायट प्राचार्य डॉ. पवन सचान ने बताया कि योजना के अंतर्गत प्रथम सेमेस्टर के छात्रों को शामिल किया गया है। हर छात्र एक निरक्षर को साक्षर करेगा। इसके लिए उसे तीन सेमेस्टर आंतरिक मूल्यांकन के तहत तक पांच-पांच अंक मिलेंगे। इस योजना के लिए 130 निरक्षरों को चयनित किया गया है जिसमें ऐसे युवाओं से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं, जिन्होंने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा। कई लोग मेहनत-मजदूरी कर अपना जीविका चलाते हैं। सभी निरक्षरों को कॉपी, पेंसिल, किताब, स्लेट व चॉक दी गई। उद्घाटन अवसर पर एससीईआरटी के निदेशक संजय सिन्हा और डिप्टी डायरेक्टर राजेंद्र प्रसाद यादव, जेडी इश्तियाक अहमद, डीडीआर गणेश कुमार, बीएसए डॉ. अमर कांत सिंह यादव समेत कई अधिकारी व प्रवक्ता मौजूद रहे।
 
senior citizens joined each one teach one
- फोटो : डेमो
पूरे प्रदेश में लागू की जाएगी योजना
डॉ. पवन सचान ने बताया कि डायट लखनऊ द्वारा शुरू की गई इस योजना को अब पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। हर जनपद के डायट व निजी बीटीसी कॉलेजों में इसे लागू किया जाएगा। एससीईआरटी इसके लिए प्रस्ताव बना रहा है। इससे पहले डायट ने ‘एक प्रशिक्षु एक प्रवेश’ योजना को लागू किया, जिसे शासन ने काफी सराहा और उसे भी प्रदेश में लागू किया गया। इसे केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के पास पुरस्कृत करने हेतु भी भेजा गया है।
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डेमो
शहर के 10 कॉलेज सम्मानित
‘एक प्रशिक्षु एक प्रवेश’ योजना के अंतर्गत हर बीटीसी छात्र को कम से कम एक बच्चे को स्कूल में दाखिला दिलाने का लक्ष्य दिया गया और सालभर उसकी मॉनिटरिंग का जिम्मा भी सौंपा गया। इसे पाठ्यक्रम में प्रोजेक्ट के रूप में शामिल किया और छात्र को 10 अंक प्रदान किए गए। छात्रों ने इसे हाथों-हाथ लिया और एक से ज्यादा छात्रों का दाखिला कराया। इस सत्र में बीटीसी छात्रों ने  4,606 बच्चों को दाखिला कराया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दस कॉलेजों को निदेशक एससीईआरटी संजय सिन्हा ने प्रशस्ति पत्र और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में केसीएम कॉलेज ऑफ एजुकेशन, टीडीएल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग मैनेजमेंट साइंस, यूनिटी डिग्री कॉलेज, सेंट्रल वूमेंस कॉलेज ऑफ एजुकेशन, अमृतानंदमयी कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन, हीरा लाल यादव बालिका डिग्री कॉलेज, बलराम कृष्ण एकेडमी, सुरजन देवी अनुसुइया देवी डिग्री कॉलेज, लखनऊ डिग्री कॉलेज और श्री महेश प्रसाद डिग्री कॉलेज शामिल रहे।
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गिरिजा देवी और मनीला देवी - फोटो : amar ujala
'गरीबी की वजह से स्कूल नहीं जा पाई। मेरा एक बेटा और दो बेटियां पढ़ी-लिखी हैं। बेटा वन विभाग में है। पढ़ने की इच्छा हमेशा ही थी। अब जब मेरी पोती जूही वर्मा ने इस योजना में मुझे पंजीकृत किया तो मेरी उम्मीद जाग उठी है। अब मन लगाकर पढू़ंगी।' - गिरिजा देवी (65)

'पहले लड़कियों को पढ़ाने में कोई दिलचस्पी नहीं लेता था। मैं 16 साल की थी तभी मेरी शादी हो गई। मेरी तीनों बेटियां उच्च शिक्षित हैं। अब मौका मिला तो मैने इस योजना में पंजीकरण करा लिया। परिवार का भी भरपूर साथ मिल रहा है।' - मनीला देवी (40)
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