तेरे माथे पे ये आंचल बहुत खूब है लेकिन, तू इस आंचल को एक परचम बना लेती तो अच्छा था। लखनऊ का जानाना पार्क जंगे आजादी का एक ऐसा मूक गवाह है जिसके साये में परदानशीं महिलाओं ने अपने आंचल को परचम बनाया और जंगे आजादी का बिगुल फूंककर गांधी जी के सपने को साकार किया। महात्मा गांधी ने लखनऊ में एक ऐसे पार्क की इच्छा जताई थी कि जहां पर पर्दानशीं औरतें घर की चहारदीवारी से निकलकर आजाद फिजा में सांस लें और अपनी खूबियों को तराशें।
बापू की इच्छा पर बना था देश का पहला 'लेडीज पार्क', नेहरू से लेकर इंदिरा तक आ चुकीं हैं यहां
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 03 Oct 2018 01:12 PM IST
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