नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के कहा था कि भगवान राम नेपाली हैं न कि भारतीय। असली अयोध्या नेपाल में है, भारत में नहीं। भारत ने सांस्कृतिक अतिक्रमण के लिए नकली अयोध्या का निर्माण किया। तथ्यों को तोड़ मरोड़कर नेपाल पर सांस्कृतिक रूप से अत्याचार किया गया है। इस पर अयोध्या के संतो में भारी आक्रोश है।
'असली अयोध्या' के बयान पर संतों में उबाल, इतिहासकार बोले- अंग्रेजों ने दिया, वरना भारत का था जनकपुर
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दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने बताया कि हमारे गुरु महाराज परमहंस रामचंद्रदास जी ने रामलला की जन्मभूमि को मुक्त कराने के लिए कठोर संघर्ष किया। जिला न्यायालयों से लेकर हाईकोर्ट तक अकाट्य तर्क दिए। तमाम पत्रकार-लेखक उनके सामने निरुत्तर हो जाते थे। सुप्रीम कोर्ट ने भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सुधीर अग्रवाल के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में दिगंबर अखाड़ा की ओर से तमाम सुबूत व तथ्य दिए गए थे।
जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी ने गवाही में स्कंद पुराण के अयोध्या महात्म्य का हवाला देकर कहा था कि लोमश ऋषि का आश्रम मौजूदा राम जन्मभूमि से पूरब में है। हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट में जगद्गुरु रामनंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य ने तर्कों से सिद्ध किया था कि बाबरी मस्जिद ही राम जन्मभूमि है।
अयोध्या प्रवास के दौरान राम जन्मस्थान के दर्शन किए थे
प्रमुख गवाह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने स्कंद पुराण का हवाला देकर कहा था, अपने अयोध्या प्रवास के दौरान राम जन्मस्थान के दर्शन किए थे। वहां ब्रिटिश अफसर सर एडवर्ड की ओर से 1901-02 में लगाए गए पांच-छह पत्थर देखे थे। ये पत्थर राम जन्मभूमि से बड़ा स्थान, राम जन्मभूमि, पिंडार्क, लोमश, विघ्नेश और वशिष्ठ कुंड में लगाए गए थे।
अधिवक्ता पीएन मिश्र ने सुप्रीम कोर्ट में अकाट्य तर्क, साक्ष्य व देश-विदेश के तत्कालीन लेखकों की पुस्तकों के उद्धरण के माध्यम से साबित किया कि राम जन्मभूमि के बाद बाबरी मस्जिद उसी भूमि पर बनाई गई।
जनकपुर भारत का हिस्सा हुआ करता था
अवध विश्वविद्यालय के चीफ प्राक्टर व इतिहास-पुरातत्व विभाग के प्रो. अजय प्रताप सिंह का कहना है कि जनकपुर भारत का हिस्सा हुआ करता था। 2 दिसंबर, 1815 को सुगौली संधि पर हस्ताक्षर के बाद 4 मार्च, 1816 को भगवान राम की ससुराल नेपाल को सौंप दी गई। लुंबिनी के साथ भी ऐसा ही किया।
भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी, भारत का हिस्सा हुआ करता था, उसे भी 1816 की सुगौली संधि में अंग्रेजों ने नेपाल को दे दिया। बड़ी बात है कि जनकपुर, हिंदुस्तान की 80 फीसदी हिंदू आबादी की आस्था का केंद्र है।
चीन की शह पर काम कर रहा नेपाल
पद्मविभूषित तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने नेपाल के प्रधानमंत्री के नेपाल में राम जन्मभूमि होने और भारत की अयोध्या पर प्रश्न चिह्न खड़ा करने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि नेपाल के प्रधानमंत्री ओली को मूर्खता पूर्ण वक्तव्य नहीं देना चाहिए। चीन की शह पर नेपाल को काम नहीं करना चाहिए।