{"_id":"5bb1f167867a557f685fb61b","slug":"report-on-world-elderhood-day-in-lucknow","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"नौकरी से सेवानिवृत्त हुए, पर नहीं छोड़ी समाज के प्रति जिम्मेदारियां, इस तरह कर रहे हैं लोगों की सेवा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नौकरी से सेवानिवृत्त हुए, पर नहीं छोड़ी समाज के प्रति जिम्मेदारियां, इस तरह कर रहे हैं लोगों की सेवा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 01 Oct 2018 03:35 PM IST
विज्ञापन
विश्व वृद्धजन दिवस
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उम्र का एक पड़ाव नौकरी से सेवानिवृत्ति हो सकता है, लेकिन समाज के विकास की जिम्मेदारियों से सेवानिवृत्ति का कोई समय नहीं होता है। सरकारी नियमों के मुताबिक भले ही एक उम्र के बाद रिटायरमेंट मिल गया हो, लेकिन राजधानी के कुछ युवा बुजुर्ग अब भी खुद को सेवा के प्रति समर्पित किसी युवा से कम नहीं मानते। भले ही सेवा सरकारी न हो, लेकिन समाज की सेवा पूरे मन से करते हैं। उनका मानना है कि खुद को फिट रखने के साथ समाज की बेहतरी के लिए काम करना भी उनकी जिम्मेदारी है। इनमें से अधिकांश का तो यहां तक मानना है कि सेवानिवृत्ति के बाद वह अधिक व्यस्त हो गए हैं। ऐसे ही बुजुर्गों पर एक रिपोर्ट...
विश्व वृद्धजन दिवस
- फोटो : अमर उजाला
सेवा के बाद भी पढ़ाना जारी
लखनऊ विश्वविद्यालय में बॉटनी विभाग के विभागाध्यक्ष के पद से 2010 में सेवानिवृत्त हुआ था। मेरे शिक्षकों ने मुझे जिस तरह पढ़ाया था मैं उसे आज भी नहीं भूला हूं। इसलिए जब भी मौका मिलता है मैं विद्यार्थियों को पढ़ाता हूं। हां शर्त यह होती है कि इसके लिए कोई फीस नहीं लूंगा। अपने पूर्व कॉलेज जेएनपीजी में मैंने परास्नातक की पढ़ाई के समय कक्षाएं भी लीं। जहां भी मुझे लगता है कि बच्चों को मेरी जरूरत है मैं अपनी निशुल्क सेवाएं जरूर देता हूं।
- प्रो. दिनेश कुमार, पूर्व विभागाध्यक्ष, बॉटनी विभाग लविवि
लखनऊ विश्वविद्यालय में बॉटनी विभाग के विभागाध्यक्ष के पद से 2010 में सेवानिवृत्त हुआ था। मेरे शिक्षकों ने मुझे जिस तरह पढ़ाया था मैं उसे आज भी नहीं भूला हूं। इसलिए जब भी मौका मिलता है मैं विद्यार्थियों को पढ़ाता हूं। हां शर्त यह होती है कि इसके लिए कोई फीस नहीं लूंगा। अपने पूर्व कॉलेज जेएनपीजी में मैंने परास्नातक की पढ़ाई के समय कक्षाएं भी लीं। जहां भी मुझे लगता है कि बच्चों को मेरी जरूरत है मैं अपनी निशुल्क सेवाएं जरूर देता हूं।
- प्रो. दिनेश कुमार, पूर्व विभागाध्यक्ष, बॉटनी विभाग लविवि
विश्व वृद्धजन दिवस
- फोटो : अमर उजाला
ताकि किसी की जिंदगी में अंधेरा न रहे
उत्तर प्रदेश को-ऑपरेटिव बैंक से सेवानिवृत्त होने के बाद दूसरों की जिंदगी में उजाला फैलने का संकल्प लेकर एक अभियान की शुरुआत की। अब तक 51 लोगों को प्रेरित कर नेत्रदान करा चुके हैं। 80 की उम्र में भी अभियान जारी है। वह कहते हैं कि आंख को जलाने से कोई फायदा नहीं है। इसलिए मरणोपरांत नेत्रदान करके अपनी आंख को जिंदा रखा जा सकता है। इसके लिए वह बैकुंठधाम भी जाते हैं। यहां आए लोगों को नेतत्रदान के लिए प्रेरित करते हैं। अब उनके साथ इस अभियान में तमाम लोग सहयोग कर रहे हैं, जो नेत्रदान के इच्छुक लोगों को पूरी बात समझाते हैं।
- जीके सेठ, को-ऑपरेटिव बैंक
उत्तर प्रदेश को-ऑपरेटिव बैंक से सेवानिवृत्त होने के बाद दूसरों की जिंदगी में उजाला फैलने का संकल्प लेकर एक अभियान की शुरुआत की। अब तक 51 लोगों को प्रेरित कर नेत्रदान करा चुके हैं। 80 की उम्र में भी अभियान जारी है। वह कहते हैं कि आंख को जलाने से कोई फायदा नहीं है। इसलिए मरणोपरांत नेत्रदान करके अपनी आंख को जिंदा रखा जा सकता है। इसके लिए वह बैकुंठधाम भी जाते हैं। यहां आए लोगों को नेतत्रदान के लिए प्रेरित करते हैं। अब उनके साथ इस अभियान में तमाम लोग सहयोग कर रहे हैं, जो नेत्रदान के इच्छुक लोगों को पूरी बात समझाते हैं।
- जीके सेठ, को-ऑपरेटिव बैंक
विज्ञापन
विज्ञापन
विश्व वृद्धजन दिवस
- फोटो : अमर उजाला
70 साल से चल रही साहित्य सृजन की अविरल धारा
आठ साल की उम्र में लिखने की शुरुआत की। कविताएं और कहानी लिखने के लिए प्रेरणा ने तब गंभीर रूप धारण किया जब वर्ष 1952 में पहली रचना बाल सखा पत्रिका में प्रकाशित हुई। इसके बाद यह सिलसिला लगातार चल रहा है। अब तक 500 सौ से ज्यादा किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। रचनाओं के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरागांधी के अलावा निराला, महादेवी वर्मा, मैथिलीशरण गुप्त, सुमित्रानंदन पंत जैसे साहित्यकारों से प्रोत्साहन, सराहना और प्रशस्ति पत्र मिले। अभी भी 78 वर्ष की आयु में भी प्रतिदिन 8 से 10 घंटे लिखता रहता हूं।
- शंकर सुलतानपुरी, साहित्यकार
आठ साल की उम्र में लिखने की शुरुआत की। कविताएं और कहानी लिखने के लिए प्रेरणा ने तब गंभीर रूप धारण किया जब वर्ष 1952 में पहली रचना बाल सखा पत्रिका में प्रकाशित हुई। इसके बाद यह सिलसिला लगातार चल रहा है। अब तक 500 सौ से ज्यादा किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। रचनाओं के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरागांधी के अलावा निराला, महादेवी वर्मा, मैथिलीशरण गुप्त, सुमित्रानंदन पंत जैसे साहित्यकारों से प्रोत्साहन, सराहना और प्रशस्ति पत्र मिले। अभी भी 78 वर्ष की आयु में भी प्रतिदिन 8 से 10 घंटे लिखता रहता हूं।
- शंकर सुलतानपुरी, साहित्यकार
विज्ञापन
विश्व वृद्धजन दिवस
- फोटो : अमर उजाला
सेवानिवृत्ति के बाद अधिक व्यस्त हो गया हूं
निदेशक होम्योपैथी के महत्वपूर्ण पद से 2011 में सेवानिवृत्ति के बाद वह अधिक व्यस्त हो गए हैं, जहां करीब पांच लाख की आबादी वाले गोमतीनगर की जनकल्याण महासमिति के कई साल से अध्यक्ष हैं, वहीं केंद्र और अलग-अलग राज्यों की कई तकनीकी समितियों के महत्वपूर्ण पद भी संभाले हैं। क्षेत्र के विकास के लिए वह लगातार प्रयासरत हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर मौजूदा गृहमंत्री राजनाथ सिंह तक से वह संपर्क कर गोमतीनगर की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं। साफ-सफाई, पार्किंग, अवैध डेयरियों, चौराहों के सौंदर्यीकरण, स्ट्रीट लाइट जैसे मुद्दों का हल अपनी टीम के सहयोग से निकालते हैं। जरूरत पड़ने पर 68 साल की उम्र में भी सड़क पर उतरकर आवाज उठाने से पीछे नहीं रहते हूं। उनका कहना है कि मेरा प्रयास है कि गोमतीनगर को स्मार्ट बनाया जाए। इसके लिए लगातार अधिकारियों और राजनेताओं के साथ प्रस्तावों को साझा कर काम कराया जा रहा है। गोमतीनगर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के हाथों हैनीमैन नेशनल होम्योपैथी कॉलेज की शुरुआत कराने के लिए भी जाना जाता है। कॉलेज प्रिंसिपल पद की सशर्त जिम्मेदारी को 17 दिन के भीतर जमीन दिलाकर उन्होंने अपनी क्षमताओं को दिखाया था। यूपी के इतिहास में सबसे कम उम्र में होम्योपैथी कॉलेज का प्रोफेसर बनने का रिकॉर्ड भी इनके नाम है। - प्रो. बीएन सिंह, पूर्व निदेशक, होम्योपैथी
निदेशक होम्योपैथी के महत्वपूर्ण पद से 2011 में सेवानिवृत्ति के बाद वह अधिक व्यस्त हो गए हैं, जहां करीब पांच लाख की आबादी वाले गोमतीनगर की जनकल्याण महासमिति के कई साल से अध्यक्ष हैं, वहीं केंद्र और अलग-अलग राज्यों की कई तकनीकी समितियों के महत्वपूर्ण पद भी संभाले हैं। क्षेत्र के विकास के लिए वह लगातार प्रयासरत हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर मौजूदा गृहमंत्री राजनाथ सिंह तक से वह संपर्क कर गोमतीनगर की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं। साफ-सफाई, पार्किंग, अवैध डेयरियों, चौराहों के सौंदर्यीकरण, स्ट्रीट लाइट जैसे मुद्दों का हल अपनी टीम के सहयोग से निकालते हैं। जरूरत पड़ने पर 68 साल की उम्र में भी सड़क पर उतरकर आवाज उठाने से पीछे नहीं रहते हूं। उनका कहना है कि मेरा प्रयास है कि गोमतीनगर को स्मार्ट बनाया जाए। इसके लिए लगातार अधिकारियों और राजनेताओं के साथ प्रस्तावों को साझा कर काम कराया जा रहा है। गोमतीनगर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के हाथों हैनीमैन नेशनल होम्योपैथी कॉलेज की शुरुआत कराने के लिए भी जाना जाता है। कॉलेज प्रिंसिपल पद की सशर्त जिम्मेदारी को 17 दिन के भीतर जमीन दिलाकर उन्होंने अपनी क्षमताओं को दिखाया था। यूपी के इतिहास में सबसे कम उम्र में होम्योपैथी कॉलेज का प्रोफेसर बनने का रिकॉर्ड भी इनके नाम है। - प्रो. बीएन सिंह, पूर्व निदेशक, होम्योपैथी