आर्थिक मंदी, नोटबंदी, जीएसटी व रेरा कानून की वजह से पहले से ही ‘बीमार’ हो चुके रियल एस्टेट कारोबार के लिए कोरोना के चलते लगा लॉकडाउन पांचवें झटके की तरह है। कारोबारियों के अनुसार बीते करीब 7 वर्षों के दौरान लगातार पांचवां झटका लगने से फ्लैटों की बिक्री में करीब 50 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसलिए इस कारोबार को सरकारी मदद की दरकार है। एमएसएमई को उबारने के लिए केंद्र सरकार की ओर से घोषित 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज में रियल एस्टेट सेक्टर को कोई खास राहत न मिलने से कारोबारी निराश हैं। उनकी ख्वाहिश है कि अगर सरकार इस सेक्टर को फिर से संभालना चाहती है तो उसे कुछ बड़े कदम उठाने होंगे।
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लॉकडाउन से लुढ़का रियल एस्टेट कारोबार, ... अब निराश कारोबारियों को सरकारी मदद की दरकार
Thu, 09 Jul 2020 01:46 PM IST
ishwar ashish
सुधीर सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
सुधीर सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 09 Jul 2020 01:46 PM IST
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खालिद मसूद, जक्षय शाह
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खालिद मसूद
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बिल्डरों को लोन और सरकारी बकाए पर छह महीने का ब्याज माफ हो
नोटंबदी, जीएसटी और रेरा कानून की वजह से रियल एस्टेट सेक्टर के कारोबार में पहले से ही 60 प्रतिशत की गिरावट आ गई थी। अब लॉकडाउन की वजह से इसमें करीब 20 प्रतिशत और गिरावट आ गई है। देशभर का आंकड़ा देखें तो फ्लैट व मकान की बिक्री करीब 50 प्रतिशत कम हो गई है। 2013 में हर साल जहां 5.20 लाख फ्लैट की बिक्री होती थी, वह अब 2.60 लाख तक आ गई है। अगर सरकार रियल एस्टेट सेक्टर को इस मंदी से उबारना चाहती है तो सबसे पहले राज्य व केंद्र सरकार के स्तर पर विशेषज्ञों की एक ‘टास्क फोर्स’ का गठन करना चाहिए। यह टास्क फोर्स बिल्डरों व खरीदारों से संबंधित सभी मामलों का अध्ययन करके 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट तैयार करे और सरकार उस रिपोर्ट के आधार पर कदम उठाए। वहीं, फ्लैट या मकान के खरीदारों को प्रोत्साहित करने के लिए हाउसिंग लोन की किस्त एक साल तक के लिए स्थगित कर दी जाए। साथ ही लोन के ब्याज दर को भी कम से कम दो प्रतिशत घटा देना चाहिए। सरकार बिल्डरों को भी लोन और सरकारी बकाए पर छह महीने का ब्याज माफ कर बड़ी राहत दे सकती है। विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद, पर्यावरण, राजस्व, डीएम आदि के स्तर पर लंबित प्रोजेक्टों से संबंधित मामलों का सरकार निस्तारण करा दे तो जल्द ही इस सेक्टर को खड़ा किया जा सकता है। -खालिद मसूद, एमडी, शालीमार कार्प लिमिटेड
नोटंबदी, जीएसटी और रेरा कानून की वजह से रियल एस्टेट सेक्टर के कारोबार में पहले से ही 60 प्रतिशत की गिरावट आ गई थी। अब लॉकडाउन की वजह से इसमें करीब 20 प्रतिशत और गिरावट आ गई है। देशभर का आंकड़ा देखें तो फ्लैट व मकान की बिक्री करीब 50 प्रतिशत कम हो गई है। 2013 में हर साल जहां 5.20 लाख फ्लैट की बिक्री होती थी, वह अब 2.60 लाख तक आ गई है। अगर सरकार रियल एस्टेट सेक्टर को इस मंदी से उबारना चाहती है तो सबसे पहले राज्य व केंद्र सरकार के स्तर पर विशेषज्ञों की एक ‘टास्क फोर्स’ का गठन करना चाहिए। यह टास्क फोर्स बिल्डरों व खरीदारों से संबंधित सभी मामलों का अध्ययन करके 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट तैयार करे और सरकार उस रिपोर्ट के आधार पर कदम उठाए। वहीं, फ्लैट या मकान के खरीदारों को प्रोत्साहित करने के लिए हाउसिंग लोन की किस्त एक साल तक के लिए स्थगित कर दी जाए। साथ ही लोन के ब्याज दर को भी कम से कम दो प्रतिशत घटा देना चाहिए। सरकार बिल्डरों को भी लोन और सरकारी बकाए पर छह महीने का ब्याज माफ कर बड़ी राहत दे सकती है। विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद, पर्यावरण, राजस्व, डीएम आदि के स्तर पर लंबित प्रोजेक्टों से संबंधित मामलों का सरकार निस्तारण करा दे तो जल्द ही इस सेक्टर को खड़ा किया जा सकता है। -खालिद मसूद, एमडी, शालीमार कार्प लिमिटेड
रमनदीप
- फोटो : amar ujala
पहली बार मकान या फ्लैट खरीदने वाले को स्टांप ड्यूटी में मिले पूरी छूट
केंद्र सरकार के 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज में से वित्त मंत्री ने अब तक 14-15 लाख करोड़ से मदद पाने वाले सेक्टर की जानकारी तो दे दी है, लेकिन 5-7 करोड़ रुपये का विवरण आना बाकी है। उम्मीद है कि इसमें से कुछ राशि रियल एस्टेट सेक्टर की मदद पर खर्च की जा सकती है। हालांकि यह मदद भी पर्याप्त नहीं होगी। रियल एस्टेट को उबारने के लिए इस समय सबसे अधिक जरूरत है लिक्विडिटी को बनाए रखना। इसके लिए सरकार बिल्डरों पर सभी बकाये पर ब्याज दर को ‘शून्य’ कर देना चाहिए। लॉकडाउन की वजह से जो मजदूर चले गए हैं, उन्हें वापस लाना भी बिल्डरों के लिए एक बड़ी चुनौती है। इसलिए सरकार के पास लेबर सेस मद में जमा करीब 9 हजार करोड़ रुपये मजदूरों के कल्याण पर खर्च किए जाने चाहिए। इससे मजदूरों के विश्वास को लौटाया जा सकेगा। इसके साथ ही पहली बार मकान या फ्लैट खरीदने वाले को रजिस्ट्री पर लगने वाले स्टांप ड्यूटी में शत-प्रतिशत छूट दी जाए। -रमनदीप, एमडी, एलायंस बिल्डर, बरेली
केंद्र सरकार के 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज में से वित्त मंत्री ने अब तक 14-15 लाख करोड़ से मदद पाने वाले सेक्टर की जानकारी तो दे दी है, लेकिन 5-7 करोड़ रुपये का विवरण आना बाकी है। उम्मीद है कि इसमें से कुछ राशि रियल एस्टेट सेक्टर की मदद पर खर्च की जा सकती है। हालांकि यह मदद भी पर्याप्त नहीं होगी। रियल एस्टेट को उबारने के लिए इस समय सबसे अधिक जरूरत है लिक्विडिटी को बनाए रखना। इसके लिए सरकार बिल्डरों पर सभी बकाये पर ब्याज दर को ‘शून्य’ कर देना चाहिए। लॉकडाउन की वजह से जो मजदूर चले गए हैं, उन्हें वापस लाना भी बिल्डरों के लिए एक बड़ी चुनौती है। इसलिए सरकार के पास लेबर सेस मद में जमा करीब 9 हजार करोड़ रुपये मजदूरों के कल्याण पर खर्च किए जाने चाहिए। इससे मजदूरों के विश्वास को लौटाया जा सकेगा। इसके साथ ही पहली बार मकान या फ्लैट खरीदने वाले को रजिस्ट्री पर लगने वाले स्टांप ड्यूटी में शत-प्रतिशत छूट दी जाए। -रमनदीप, एमडी, एलायंस बिल्डर, बरेली
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अनिल सिंह
- फोटो : amar ujala
जीएसटी दर घटाकर पांच प्रतिशत की जाए
रियल एस्टेट सेक्टर हर वर्ग के लोगों को छत मुहैया कराता है। देश के आर्थिक व भौतिक प्रगति में भी इसकी भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है। इसके बावजूद सरकार के स्तर पर इसकी अनदेखी से स्थिति दिनों-दिन खराब होती जा रही है। लॉकडाउन की वजह से तो यह सेक्टर लगभग ठप हो गया है। केंद्र के राहत पैकेज में इस सेक्टर को एक पैसा भी न मिलने से बिल्डरों में घोर निराशा है। अगर सरकार चाहती है कि रियल एस्टेट को फिर से पुनर्जीवित किया जाए तो कुछ बड़े फैसले लेने होंगे। बिल्डरों के साथ ही खरीदारों को भी लोन राशि के ब्याज में छूट देकर दोनों को प्रोत्साहित किया जा सकता है। इसी तरह प्रोजेक्ट के लिए जमा कराए जाने वाले फिक्स चार्जेज की व्यवस्था समाप्त होनी चाहिए। फ्लैट बुक कराते समय एग्रीमेंट और पजेशन लेने के बाद फ्लैट की रजिस्ट्री के समय स्टांप ड्यूटी लेने की दोहरी व्यवस्था को समाप्त कर सिर्फ रजिस्ट्री के समय ही स्टांप ड्यूटी ली जाए तो खरीदारों को बड़ी राहत होगी। जीएसटी दर को घटाकर 5 प्रतिशत किया जाना चाहिए। - अनिल सिंह,जाइंट सेक्रेटरी, क्रेडाई यूपी चैप्टर
रियल एस्टेट सेक्टर हर वर्ग के लोगों को छत मुहैया कराता है। देश के आर्थिक व भौतिक प्रगति में भी इसकी भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है। इसके बावजूद सरकार के स्तर पर इसकी अनदेखी से स्थिति दिनों-दिन खराब होती जा रही है। लॉकडाउन की वजह से तो यह सेक्टर लगभग ठप हो गया है। केंद्र के राहत पैकेज में इस सेक्टर को एक पैसा भी न मिलने से बिल्डरों में घोर निराशा है। अगर सरकार चाहती है कि रियल एस्टेट को फिर से पुनर्जीवित किया जाए तो कुछ बड़े फैसले लेने होंगे। बिल्डरों के साथ ही खरीदारों को भी लोन राशि के ब्याज में छूट देकर दोनों को प्रोत्साहित किया जा सकता है। इसी तरह प्रोजेक्ट के लिए जमा कराए जाने वाले फिक्स चार्जेज की व्यवस्था समाप्त होनी चाहिए। फ्लैट बुक कराते समय एग्रीमेंट और पजेशन लेने के बाद फ्लैट की रजिस्ट्री के समय स्टांप ड्यूटी लेने की दोहरी व्यवस्था को समाप्त कर सिर्फ रजिस्ट्री के समय ही स्टांप ड्यूटी ली जाए तो खरीदारों को बड़ी राहत होगी। जीएसटी दर को घटाकर 5 प्रतिशत किया जाना चाहिए। - अनिल सिंह,जाइंट सेक्रेटरी, क्रेडाई यूपी चैप्टर
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संतोष कुमार मिश्रा
- फोटो : amar ujala
रियल एस्टेट सेक्टर को बड़े पैकेज की दरकार
रियल एस्टेट का अधिकांश कारोबार कर्ज पर है। पहले से ही इस सेक्टर की स्थिति काफी खराब थी और अब लॉकडाउन ने तो इसे करीब समाप्त ही कर दिया है। इस सेक्टर के लिए सबसे जरूरी श्रमिकों की पूंजी भी इसके हाथ से निकल गई है। इसे दुबारा वापस लाना बिल्डरों के लिए एक बड़ी चुनौती है। अब सरकारी मदद केबिना रियल एस्टेट सेक्टर को पटरी लाना मुमकिन नहीं लगता है। जिस तरह सरकार ने एमएसएमई सेक्टर को उबारने के लिए 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज देकर उसे संजीवनी दी है, उसी तरह रियल एस्टेट सेक्टर को भी एक बड़े पैकेज की दरकार है। बैंकों से लिया गया लोन चुकाना रियल एस्टेट कंपनियों को भारी पड़ रहा है। सरकार को इस लोन पर लगने वाले ब्याज दर में कटौती कर राहत देनी चाहिए। इसी तरह प्रोजेक्ट शुरू करने या पूरा करने से संबंधित नियमों के कुछ प्रावधानों को शिथिल करके इस सेक्टर को गति दी जा सकती है। - संतोष कुमार मिश्र यूपी हेड, डिजर्व हाउसिंग ग्रुप
रियल एस्टेट का अधिकांश कारोबार कर्ज पर है। पहले से ही इस सेक्टर की स्थिति काफी खराब थी और अब लॉकडाउन ने तो इसे करीब समाप्त ही कर दिया है। इस सेक्टर के लिए सबसे जरूरी श्रमिकों की पूंजी भी इसके हाथ से निकल गई है। इसे दुबारा वापस लाना बिल्डरों के लिए एक बड़ी चुनौती है। अब सरकारी मदद केबिना रियल एस्टेट सेक्टर को पटरी लाना मुमकिन नहीं लगता है। जिस तरह सरकार ने एमएसएमई सेक्टर को उबारने के लिए 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज देकर उसे संजीवनी दी है, उसी तरह रियल एस्टेट सेक्टर को भी एक बड़े पैकेज की दरकार है। बैंकों से लिया गया लोन चुकाना रियल एस्टेट कंपनियों को भारी पड़ रहा है। सरकार को इस लोन पर लगने वाले ब्याज दर में कटौती कर राहत देनी चाहिए। इसी तरह प्रोजेक्ट शुरू करने या पूरा करने से संबंधित नियमों के कुछ प्रावधानों को शिथिल करके इस सेक्टर को गति दी जा सकती है। - संतोष कुमार मिश्र यूपी हेड, डिजर्व हाउसिंग ग्रुप