यूपी के बाराबंकी जिला मुख्यालय से 38 किमी दूर किंटूर गांव में स्थित बेहद दुर्लभ पेड़ पारिजात से जुड़ी मान्यताएं बेहद रोचक हैं। मंगलवार के दिन इस पेड़ से आशीर्वाद लेने दूर-दूर से लोग आते हैं। हरिवंश पुराण के मुताबिक ये इसे कल्पवृक्ष माना जाता है जो सभी मनोकामनाएं पूरी करता है।
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पारिजात का पेड़
- फोटो : amar ujala
माना जाता है इस गांव का नाम किंटूर कुंती के नाम पर पड़ा था। मान्यता है कि पांडवों ने माता कुंती के साथ यहां अपना अज्ञातवास बिताया था। किंटूर में स्थित लंबे-चौड़े पारिजात की ज्यादातर शाखाएं मुड़ी हुई हैं। ये शाखाएं मुड़कर धरती को छूती हैं।
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पारिजात का पेड़
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यूपी के कानपुर जिले के घाटमपुर में भी जनवरी के महीने में 250 साल पुराना पारिजात पेड़ पाया गया। ये अति दुर्लभ कल्प वृक्ष घाटमपुर क्षेत्र के नंदना और तेजपुर गांवों के बीच स्थित है। कृषि अनुसंधान केंद्र, दलीप नगर (कानपुर देहात) के कृषि वैज्ञानिकों ने पेड़ का निरीक्षण किया और बताया कि ऐसा ही एक वृक्ष कानपुर देहात जिले के भुजपुरा गांव के पास भी मिला है।
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पारिजात का पेड़
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घाटमपुर-गजनेर मार्ग स्थित नंदना गांव में प्राचीन शिव मंदिर है। गांव के बुजुर्गों के मुताबिक कहा जाता है कि मंदिर के निर्माण के समय यहां पेड़-पौधे लगवाए गए थे। तभी कल्प का पौधा भी लगवाया गया होगा। आगे जानें इस पेड़ से जुड़ी बेहद रोचक मान्यताएं...
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पारिजात का पेड़
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पारिजात वृक्ष को कल्प वृक्ष भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी। शास्त्रों में कहा गया है कि मंथन से निकलने के बाद इंद्र देव ने इसे स्वर्ग में अपनी वाटिका में लगाया था।