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चाॉकलेट डे
- फोटो : अमर उजाला
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वैसे तो चॉकलेट कभी भी खाई और खिलाई जा सकती है, लेकिन वैलेंटाइन वीक के चॉकलेट डे पर चॉकलेट खिलाना या गिफ्ट करने का दोस्त या प्रेमी पर अलग ही असर डालता है। वीक का तीसरा दिन यानी 9 फरवरी को चॉकलेट डे है। आप अपने दोस्तों या जिसे भी दिल से चाहते हों उसका मुंह मीठा करा सकते हैं, क्योंकि जुबान की मिठास रिश्तों की गहराई तक पहुंचती है।
आलमबाग में चॉकलेट खरीदते मनीष, अलका, दीक्षा व कंवलजीत
- फोटो : अमर उजाला
लखनऊ में 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे मानने की तैयारी हर तरफ चल रही है। कोई अपने जीवनसाथी तो कोई पूरे परिवार को सरप्राइज देना चाहता है। वीक के तहत शुक्रवार को प्रपोज डे पर भी लोगों ने ग्रीटिंग कार्ड, फोन मेसेज से अपनी भावनाएं व्यक्त की। वहीं, शनिवार को चॉकलेट डे के चलते शुक्रवार की शाम से ही दुकानों और बेकरी शॉप पर लोग चॉकलेट खरीदते नजर आए। दुकानों पर पांच और दस रुपये से लेकर 500 रुपये तक चॉकलेट पैक और केक उपलब्ध हैं। आलमबाग के एक दुकान पर चॉकलेट खरीदने पहुंचे मनीष अरोड़ा, अलका, दीक्षा और कवलजीत ने बताया कि वह चॉकलेट डे पर पूरे परिवार का मुंह मीठा कराएंगे।
चॉकलेट डे
- फोटो : अमर उजाला
मुझसे पहले भाई को खिला दिया चॉकलेट
पत्नी वंदना सिंह का जन्मदिन था। मैं बड़े जतन से उसके लिए एक बड़ा सा चॉकलेट लेकर आया था। उसने मेरे सामने चॉकलेट के रैपर निकाले। चाकू से उसे काटा। अब मैं बिल्कुल तैयार था कि पहला टुकड़ा मुझे ही मिलेगा, लेकिन पत्नी ने प्लेट से चॉकलेट का टुकड़ा सीधे मेरे छोटे भाई को खिला दिया। सब हंसने लगे। परिवार में सबको देने के बाद मुझे भी चॉकलेट मिला। सब खुश थे। वह माहौल और खुशी आज भी मेरे जेहन में है।
- पत्नी वंदना सिंह, बेटे आयुष व प्रत्यूष के साथ डॉ. अरविंद राव, संयुक्त निदेशक, पशु चिकित्सा विभाग
पत्नी वंदना सिंह का जन्मदिन था। मैं बड़े जतन से उसके लिए एक बड़ा सा चॉकलेट लेकर आया था। उसने मेरे सामने चॉकलेट के रैपर निकाले। चाकू से उसे काटा। अब मैं बिल्कुल तैयार था कि पहला टुकड़ा मुझे ही मिलेगा, लेकिन पत्नी ने प्लेट से चॉकलेट का टुकड़ा सीधे मेरे छोटे भाई को खिला दिया। सब हंसने लगे। परिवार में सबको देने के बाद मुझे भी चॉकलेट मिला। सब खुश थे। वह माहौल और खुशी आज भी मेरे जेहन में है।
- पत्नी वंदना सिंह, बेटे आयुष व प्रत्यूष के साथ डॉ. अरविंद राव, संयुक्त निदेशक, पशु चिकित्सा विभाग
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चॉकलेट डे
- फोटो : अमर उजाला
चॉकलेट ने कराई दोस्ती, फिर बने जीवनसाथी
करीब 21 साल पहले की बात है। रश्मि और मैं मुरादाबाद में डिप्टी एसपी की ट्रेनिंग कर रहे थे। हमें बाहर से मेस के लिए कुछ सामान लाने थे। हम दोनों साथ निकले। सामान लेने के बाद हमने चॉकलेट भी खरीदी। हम रिक्शे से लौट रहे थे, उसी वक्त हमने एक-दूसरे को चॉकलेट दी। हम दोस्त बने। धीरे-धीरे यह दोस्ती शादी तक पहुंच गई। करीब एक साल बाद हम दोनों के पैरेंट्स हमसे मुरादाबाद में ही मिले। जब रिश्ता तय हो गया तो होटल से हम ट्रेनिंग के लिए रिक्शे पर एक बार फिर साथ लौटे। रास्ते में हमने चॉकलेट शेयर की। वो मिठास अब तक हमारी जिंदगी में है। अब हम चॉकलेट खाते हैं तो बच्चों का भी साथ मिलता है।
- पत्नी रश्मि रानी व बेटी पावनी व लहर के साथ सीएन सिन्हा, एएसपी (कानून व्यवस्था)
करीब 21 साल पहले की बात है। रश्मि और मैं मुरादाबाद में डिप्टी एसपी की ट्रेनिंग कर रहे थे। हमें बाहर से मेस के लिए कुछ सामान लाने थे। हम दोनों साथ निकले। सामान लेने के बाद हमने चॉकलेट भी खरीदी। हम रिक्शे से लौट रहे थे, उसी वक्त हमने एक-दूसरे को चॉकलेट दी। हम दोस्त बने। धीरे-धीरे यह दोस्ती शादी तक पहुंच गई। करीब एक साल बाद हम दोनों के पैरेंट्स हमसे मुरादाबाद में ही मिले। जब रिश्ता तय हो गया तो होटल से हम ट्रेनिंग के लिए रिक्शे पर एक बार फिर साथ लौटे। रास्ते में हमने चॉकलेट शेयर की। वो मिठास अब तक हमारी जिंदगी में है। अब हम चॉकलेट खाते हैं तो बच्चों का भी साथ मिलता है।
- पत्नी रश्मि रानी व बेटी पावनी व लहर के साथ सीएन सिन्हा, एएसपी (कानून व्यवस्था)
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तीन पीढ़ियों में बांट रही हूं हर खुशी हर गम
मुझे यह सोचकर काफी अच्छा लगता है कि मैं उन लोगों में शामिल हूं जिन्हें तीन पीढ़ियों का प्यार मिलता है। मेरी बुजुर्ग मां का लहजा कई बार मुझे मेरी बचपन याद दिला देता है। वहीं, पोती के साथ वक्त गुजारना, बहू से दोस्तों की तरह बातें करना, मेरी रोज की जिंदगी का हिस्सा है। हम चार पीढ़ियां दोस्तों की तरह ही रहते हैं। मेरी मां को मीठा बहुत पसंद है। उसे मैंने चॉकलेट खिलाया तो उसने पूछा, ये क्यों? मैंने बताया कि चॉकलेट डे है तो वह मुस्कुरा दी। मैं रेलवे से हाल ही में रिटायर हुईं हूं। अब परिवार को देने के लिए मेरे पास पहले से भी ज्यादा वक्त है।
मां सरस्वती, बहू आकांक्षा और पोती गौरी के साथ सुमन वाजपेयी, सेवानिवृत्त रेल कर्मचारी
मुझे यह सोचकर काफी अच्छा लगता है कि मैं उन लोगों में शामिल हूं जिन्हें तीन पीढ़ियों का प्यार मिलता है। मेरी बुजुर्ग मां का लहजा कई बार मुझे मेरी बचपन याद दिला देता है। वहीं, पोती के साथ वक्त गुजारना, बहू से दोस्तों की तरह बातें करना, मेरी रोज की जिंदगी का हिस्सा है। हम चार पीढ़ियां दोस्तों की तरह ही रहते हैं। मेरी मां को मीठा बहुत पसंद है। उसे मैंने चॉकलेट खिलाया तो उसने पूछा, ये क्यों? मैंने बताया कि चॉकलेट डे है तो वह मुस्कुरा दी। मैं रेलवे से हाल ही में रिटायर हुईं हूं। अब परिवार को देने के लिए मेरे पास पहले से भी ज्यादा वक्त है।
मां सरस्वती, बहू आकांक्षा और पोती गौरी के साथ सुमन वाजपेयी, सेवानिवृत्त रेल कर्मचारी