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आम बजट 2017: नोटबंदी के बाद ये हैं जनता की उम्मीदें

Sun, 29 Jan 2017 02:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 29 Jan 2017 02:40 AM IST
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 people's expectations from union budget.

केंद्र सरकार अपना आम बजट एक फरवरी को पेश करने जा रही है। इससे पहले लोगों को बड़ी उम्मीद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री अरूण जेटली से लगी हुई हैं। इसकी वजह हाल ही में देश की अर्थव्यवस्था को बेहतर करने और ब्लैकमनी पर अंकुश लगाने का दावा करके नोटबंदी जैसा फैसला लिया जाना रहा। बजट से सीधे तौर पर मध्यम वर्ग के परिवार पर सबसे ज्यादा असर होता है। इन परिवारों से बजट की उम्मीद जानने की कोशिश की गई। अलग-अलग वर्ग से लिए परिवारों की आम उम्मीदों को देखें तो लोग बच्चों की पढ़ाई, इलाज पर खर्च, बेहतर व समय की पाबंद रेलवे के अलावा आयकर में छूट की सीमा बढ़ाया जाना चाहते हैं। एक रिपोर्ट-

 people's expectations from union budget.

शिक्षा पर खर्च को सीमित किया जाए
उम्मीद- नगर निगम में कर निर्धारण अधिकारी एके सिंह का कहना है कि आज के समय में बच्चों की पढ़ाई कराना एक चुनौती मध्यम वर्ग के परिवार के लिए खड़ी हो गई है। मुझे अपनी कुल सैलरी का 20 प्रतिशत तक केवल बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करना पड़ता है। इस खर्च को सीमित करने के लिए सरकार कोई पहल करे। वहीं सातवें वेतन आयोग के बाद आयकर की सीमा को बढ़ाकर न्यूनतम पांच लाख रुपए करनी चाहिए। अभी अपनी सैलरी का 20 प्रतिशत तो मैं टैक्स में ही दे देता हूं। ममता सिंह का कहना है कि किचन का खर्च लगातार बढ़ ही रहा है। अब तो कुछ प्रधानमंत्री ऐसा करें कि इसमें राहत मिले। (तस्वीर- फैमिली- एके सिंह, ममता सिंह, अनुष्का, अनुभूति।)

 people's expectations from union budget.

होमलोन को सस्ता किए जाने की जरूरत
उम्मीद- पेशे से सरकारी योजनाओं के ठेकेदार कृष्णकांत सिंह का कहना है कि आयकर छूट आज की सबसे बड़ी जरूरत है। ढ़ाई लाख रुपए बहुत कम है। इतने में अब खर्च नहीं चलता। मेरे दो बच्चे हैं। हर साल करीब दो लाख रुपए तो इनकी पढ़ाई और इससे जुड़े दूसरे खर्चें पूरे करने में खप जाते हैं। अब इसके बाद घर किससे चलाएं? दवा भी लेने जाओ तो एक बार में कम से कम तीन हजार रुपए का बिल बन जाता है। घर का सामान खरीदने जाओ तो हालत खराब होती है। इसके ऊपर से घर का होमलोन की ईएमआई। सबसे पहले तो होमलोन की दरों को कम करके इसे सस्ता किए जाने की जरूरत है। (तस्वीर- फैमिली- कृष्णकांत सिंह, रीना सिंह, शौर्य प्रताप।)

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हेल्थ इंश्योरेंस को किफायती बनाए सरकार
उम्मीद- यूनियन बैंक से रिटायर्ड अधिकारी अनूप शुक्ला के घर का खर्च अब उनकी पेंशन और निजी स्कूल में शिक्षिका पत्नी नीलिमा की सैलरी से चलता है। अनूप शुक्ला का कहना है कि देश की जीडीपी बेहतर होनी चाहिए। इससे हमें ही अंतिम रूप से फायदा पहुंचेगा। लेकिन, इसके साथ ही अब आयकर में भी राहत मिलनी चाहिए। रेलवे बजट को यूनियन बजट में शामिल करके केंद्र सरकार ने अच्छा किया है। अब लेकिन, स्टेशनों और ट्रेनों को सीनियर सिटीजंस के लिए फ्रेंडली बनाना होगा। ट्रेनों को समय पर भी चलाने का सिस्टम विकसित किया जाए। हेल्थ इंश्योरेंस को भी बुजुर्गों के लिए कम खर्चीला किए जाने की जरूरत है। (तस्वीर- फैमिली- अनूप शुक्ला, नीलिमा शुक्ला।)

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टैक्स की मार अब कम की जाए
उम्मीद- एक निजी मोबाइल कंपनी में क्षेत्रीय प्रबंधक विनय तिवारी का कहना है कि आयकर और दूसरे सभी करों को मिला लिया जाए तो अपनी सैलरी का करीब 40 प्रतिशत तो हम सरकार को ही दे देते हैं। बाकी 50-60 प्रतिशत ही हमारे पास खर्च और सेविंग के लिए रह जाती है। सबसे पहले केंद्र सरकार को करों का बोझ मध्यम वर्ग पर कम करना चाहिए। प्रिंयका का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई और किचन दोनों बहुत महंगे हो रहे हैं। दालों के भाव बढ़ते जा रहे हैं। इससे बच्चों की डायट में प्रोटीन की मात्रा पूरी करने वाली दाल ही कम होती जा रही है। सरकार महंगाई पर अब रोक लगाने वाले फैसले ले। (तस्वीर- फैमिली- विनय तिवारी, प्रियंका तिवारी, अक्षरा, मयूरी।)

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