रोजाना हजारों मरीजों का इलाज करने वाला केजीएमयू मंगलवार को रेजीडेंट डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार से आठ घंटे तक कराहता रहा। सुबह आठ से शाम चार बजे तक काम बंद होने से विभिन्न विभागों में सौ से अधिक ऑपरेशन टल गए। वहीं, करीब आठ हजार मरीजों को ओपीडी में उपचार नहीं मिला। हालांकि इस दौरान इमरजेंसी सेवाएं चलती रहीं। दिनभर की मान-मनौव्वल के बाद रेजीडेंट को आश्वासन दिया गया कि दो माह में उनकी समस्या का समाधान कर दिया जाएगा। इस पर वे शाम चार बजे के बाद काम पर लौटे। इसके साथ केजीएमयू प्रशासन की सांस में सांस आई।
{"_id":"5b863eae42c79246547c5613","slug":"patients-did-not-get-treatment-due-to-strike-in-kgmu","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से हजारों मरीज का हाल हुआ बेहाल, 100 से ज्यादा ऑपरेशन टले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से हजारों मरीज का हाल हुआ बेहाल, 100 से ज्यादा ऑपरेशन टले
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 29 Aug 2018 04:26 PM IST
विज्ञापन
कार्य बहिष्कार से मरीज इलाज को भटकते रहे
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कार्य बहिष्कार से परेशान मरीज
- फोटो : amar ujala
केजीएमयू के रेजीडेंट डॉक्टर एसजीपीजीआई के समान वेतन की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर उन्होंने मंगलवार को कार्य बहिष्कार का एलान किया था। सुबह जब न्यू ओपीडी मरीजों से भरी थी, रेजीडेंट वहां से और वॉर्डों से निकल गए। हालांकि डॉक्टर मरीजों के उपचार में लगे होने का दावा करते रहे, लेकिन रेजीडेंटों के न होने का असर साफ दिखा। सैकड़ों मरीजों को गेट से ही लौटा दिया गया तो कुछ इंतजार करने के बाद भी बारी नहीं आती देख खुद लौट गए।
केजीएमयू के रेजीडेंट्स ने काम बंद कर प्रदर्शन किया
- फोटो : amar ujala
हालत यह थी कि दोपहर एक बजे तक ज्यादातर विशेषज्ञ 25 से 30 मरीज ही देख पाए थे, जबकि बाहर डेढ़ सौ से ज्यादा की भीड़ थी। इसी तरह विभिन्न वॉर्डों में नर्सिंग स्टाफ ने कमान संभाल रखी थी, लेकिन उचित दवाएं न मिलने से मरीज कराहते नजर आए।
विज्ञापन
विज्ञापन
केजीएमयू
- फोटो : amar ujala
गंभीर मरीजों के ही हुए ऑपरेशन
केजीएमयू के विभागों में करीब 35 ऑपरेशन थियेटर हैं। यहां रोजाना छोटे व गंभीर 100 से 120 ऑपरेशन होते हैं। लेकिन मंगलवार को रेजीडेंट्स के काम बंद कर प्रदर्शन करने से ज्यादातर विभागों में ऑपरेशन टाल दिए गए। कुछ जगह गंभीर मरीजों के दो से तीन ऑपरेशन ही हुए। सर्जरी विभाग में चार ओटी है। यहां करीब 30 ऑपरेशन रोजाना होते हैं, लेकिन मंगलवार को सिर्फ चार ही हो सके। प्लास्टिक सर्जरी विभाग में दोपहर एक बजे तक एक भी ऑपरेशन नहीं हो सका। एक मरीज की हालत गंभीर होने पर शाम करीब चार बजे ऑपरेशन किया गया। पीडियाट्रिक विभाग में 12 ऑपरेशन होने थे, लेकिन एक भी नहीं हुआ। इसी तरह यूरोलॉजी में एक भी ऑपरेशन नहीं किया गया। कार्डियोलॉजी में आमतौर पर पांच से आठ ऑपरेशन होते हैं, लेकिन यहां सिर्फ दो ऑपरेशन ही हो सके।
केजीएमयू के विभागों में करीब 35 ऑपरेशन थियेटर हैं। यहां रोजाना छोटे व गंभीर 100 से 120 ऑपरेशन होते हैं। लेकिन मंगलवार को रेजीडेंट्स के काम बंद कर प्रदर्शन करने से ज्यादातर विभागों में ऑपरेशन टाल दिए गए। कुछ जगह गंभीर मरीजों के दो से तीन ऑपरेशन ही हुए। सर्जरी विभाग में चार ओटी है। यहां करीब 30 ऑपरेशन रोजाना होते हैं, लेकिन मंगलवार को सिर्फ चार ही हो सके। प्लास्टिक सर्जरी विभाग में दोपहर एक बजे तक एक भी ऑपरेशन नहीं हो सका। एक मरीज की हालत गंभीर होने पर शाम करीब चार बजे ऑपरेशन किया गया। पीडियाट्रिक विभाग में 12 ऑपरेशन होने थे, लेकिन एक भी नहीं हुआ। इसी तरह यूरोलॉजी में एक भी ऑपरेशन नहीं किया गया। कार्डियोलॉजी में आमतौर पर पांच से आठ ऑपरेशन होते हैं, लेकिन यहां सिर्फ दो ऑपरेशन ही हो सके।
विज्ञापन
हड़ताल से परेशान मरीज
- फोटो : amar ujala
एस्सा का डर दिखाने से और बिगड़ गई बात
कार्य बहिष्कार के बाद कलाम सेंटर पर जुटे रेजीडेंट्स का आरोप है कि चिकित्सा अधीक्षक ने उनकी बात सुनने के बजाय धमकाया। रेजीडेंट डॉक्टरों को समझाने के लिए सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार के साथ एमएस डॉ. वीके ओझा भी पहुंचे। रेजीडेंट्स की मानें तो उन्होंने बात सुनने के बजाय एस्मा का डर दिखाया। यह भी कहा न्यू ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक की सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। यदि किसी की जान गई तो तुम लोगों को जेल जाना पड़ सकता है। इससे गुस्साए रेजीडेंट्स काम पर लौटने के बजाय वेतन भत्ता बढ़ाने का आदेश मांगने लगे। रेजीडेंट्स का यह भी आरोप है कि उन्हें सेल्वी हॉल में बातचीत के लिए बुलाया गया, लेकिन वहां भी बार-बार धमकी दी गई। हालांकि रेजीडेंट्स मांगों पर अड़े रहे। ऐसे में कुलपति ने बीच का रास्ता निकाला और सीएमएस के साथ उन्हें प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. रजनीश दुबे के पास भेजा।
कार्य बहिष्कार के बाद कलाम सेंटर पर जुटे रेजीडेंट्स का आरोप है कि चिकित्सा अधीक्षक ने उनकी बात सुनने के बजाय धमकाया। रेजीडेंट डॉक्टरों को समझाने के लिए सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार के साथ एमएस डॉ. वीके ओझा भी पहुंचे। रेजीडेंट्स की मानें तो उन्होंने बात सुनने के बजाय एस्मा का डर दिखाया। यह भी कहा न्यू ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक की सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। यदि किसी की जान गई तो तुम लोगों को जेल जाना पड़ सकता है। इससे गुस्साए रेजीडेंट्स काम पर लौटने के बजाय वेतन भत्ता बढ़ाने का आदेश मांगने लगे। रेजीडेंट्स का यह भी आरोप है कि उन्हें सेल्वी हॉल में बातचीत के लिए बुलाया गया, लेकिन वहां भी बार-बार धमकी दी गई। हालांकि रेजीडेंट्स मांगों पर अड़े रहे। ऐसे में कुलपति ने बीच का रास्ता निकाला और सीएमएस के साथ उन्हें प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. रजनीश दुबे के पास भेजा।