... तो इस वजह से भीषण गर्मी में ट्रेन यात्रियों को झेलनी पड़ रही है परेशानी
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ऐसे में चारबाग व लखनऊ जंक्शन पर ट्रेनों के इंतजार में यात्रियों के पसीने छूट रहे हैं। वहीं बीच रास्ते ट्रेनें खड़ी कर दिए जाने से भी यात्रियों को मुसीबत झेलनी पड़ रही है। लखनऊ-गोरखपुर के 275 किमी लंबे व्यस्ततम रेलखंड पर रोजाना चलने वाली 42 मालगाड़ियां इस रूट पर 80 मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक लगा रही हैं।
मालगाड़ियों को प्राथमिकता पर चलाने के कारण ही पूर्वोत्तर रेलवे ने पिछले दो वर्षों में इनसे 223 करोड़ रुपये और उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल ने मालभाड़े से 607 करोड़ रुपये कमाए हैं। इससे रेलवे को आमदनी तो हो रही है, लेकिन यात्रियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
शाम होते ही रनवे बन जाता है ट्रैक
दिलकुशा केबिन और आलमबाग केबिन के आउटर पर शाम को रेलवे ट्रैक दिल्ली-मुंबई जैसे व्यस्ततम एयरपोर्ट के रनवे जैसा बन जाता है। यहां एक के पीछे एक ट्रेनें लाइन से सिग्नल के इंतजार में खड़ी हो जाती हैं। यह भीड़ शाम छह से रात 12 बजे तक लगती है। दिलकुशा में बिहार सप्तक्रांति(12565), गोरखधाम एक्सप्रेस(12555), वैशाली एक्सप्रेस(12583) के साथ अमूमन ऐसी दिक्कतें आती हैं।