लखनऊ में लोकतंत्र के महापर्व पर बुजुर्गों और दिव्यांगजनों में वोट डालने के लिए युवाओं जैसा जोश देखने को मिला। चाहे चलने में कितने भी लाचार दिखें लेकिन वोट डालने के लिए उनका जोश चरम पर था। कोई अपने परिवार के साथ आया था तो किसी को स्कूलों के छात्रों ने उनकेपोलिंग बूथ तक ले जाने में सहायता की। कई बुजुर्ग और दिव्यांगों को उनके परिवारीजनों व छात्रों ने गोद में उठाकर पोलिंग बूथ तक पहुंचाया। दिव्यांगजनों ने रिकॉर्ड वोट डाले। शाम को इनका आंकड़ा 62 प्रतिशत को भी पार कर गया।
लोकतंत्र का महापर्वः इस जज्बे को सलाम, 90 साल की उम्र में भी युवाओं जैसा जोश
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महानगर के रहने वाले अशोक सिंह और बीना सिंह 70 के पार हो गए हैं मगर मतदान करने का उत्साह खूब है। दोनों पहले मतदान किया और फिर एक दूसरे की अलग-अलग मोबाइल से फोटो भी क्लिक की। बात की तो बोले सोशल मीडिया पर डालूंगा।
जानकीपुरम निवासी सीएन गर्ग 79 के दाहिने घुटने का एक माह पहले प्रत्यारोपण हुआ। प्रत्यारोपण के बाद अभी वह चलने-फिरने में असमर्थ हैं, मगर उनका हौसला कम नहीं हुआ। वह सुबह से ही वोट डालने को लेकर परिवारीजनों से अड़े थे। परिवारीजन कैपिटल कांवेंट स्कूल जानकीपुरम ले गए। परिवारीजन उन्हें व्हील चेयर से लेकर बूथ तक पहुंचे। वोट डालने के बाद वह काफी खुश नजर आए। उन्होंने कहा कि मतदान के लिए अस्पताल में भर्ती होेने बाद भी आता। देश के प्रति अपना कर्त्तव्य निभाना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
चौधरी टोला निवासी 90 साल की मालती रस्तोगी पुलगामा सोधीं टोला आदर्श मतदान केन्द्र पर अपना वोट डालने पहुंची। बेटे नवीन रस्तोगी और पौत्र सात्विक रस्तोगी ने उन्हें वोट डालने में सहारा दिया। बोली वोट हमारा अधिकार है जिसे हमें हर हाल में निभाना है।
बीमारी पर भारी वोट डालने का उत्साह
हाथ पैर कांपने की बीमारी से पीड़ित मोहम्मद रिजवान खान बगैर सहारे खड़े भी नही हो पाते है लेकिन उनकी बीमारी पर वोट डालने का जोश भारी पड़ गया। उन्होंने अपनी अपनी पत्नी सरवर जहां, बहन राना खान और बेटी सबा खान के साथ मुमताज पीजी कालेज आदर्श मतदान केन्द्र पर अपने मतदान का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि बीमारी तो पूरी जिंदगी साथ है लेकिन वोट डालने का मौका पांच साल में एक ही बार आता है, उसे नही छोड़ सकता।