ट्रेनों की लेटलतीफी, असुरक्षित सफर, डिरेलमेंट, खराब एसी, बंद पंखे, गंदे शौचालय और उस पर ट्रेनों का बार-बार रद्द होना। ये कुछ ऐसी वजहें हैं, जिनसे नाराज 1.45 करोड़ यात्रियों ने तीन साल में उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल से मुंह मोड़ लिया है। इनमें से 57 लाख यात्री उत्तर रेलवे के स्टेशनों और 64 लाख पैसेंजर पूर्वोत्तर रेलवे के स्टेशनों पर कम हुए हैं।
ट्रेनों की लेटलतीफी से तीन साल में यात्री घटे, पर मालगाड़ियां भर रहीं खजाना, यहां देखें आंकड़ा
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बता दें, पटरियों की मरम्मत, डबलिंग, सिग्नलिंग व नॉन इंटरलॉकिंग के साथ स्टेशनों का कायाकल्प भी हो रहा है। ब्लॉक लेने ट्रेेनें रद्द व बदले रूट से चलाई जा रही हैं। तो कुछ ट्रेेनें ऐसी भी हैं, जो छह महीने से निरस्त हैँ। रेलवे इसे आधारभूत ढांचे में मजबूती के लिए जरूरी बता रहा है। पर, ट्रेनों की संचालन पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव से यात्री आजिज हो रहे हैं। नतीजतन, पैसेंजरों को संख्या लगातार कम हो रही है। पिछले तीन साल के आंकड़ों को देखें- वर्ष 2016-17 में उत्तर रेलवे में पैसेंजरों की संख्या 7.66 करोड़, जो 2018-19 में घटकर 7.09 करोड़ पहुंच गई। यही हाल पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के स्टेशनों पर भी है। वर्ष 2016-17 में 6.88 करोड़ पैसेंजर पहुंचे थे, जो 2018-19 में घटकर छह करोड़ हो गया। यानी 88 लाख पैसेंजर कम हो गए।
रेलवे से नाराज पैसेंजर बस और फ्लाइट की ओर रुख कर रहे हैं। अमौसी एयरपोर्ट पर 2016-17 में 39.79 लाख यात्रियों ने उड़ान भरी थी, वर्ष 2018-19 में यह बढ़कर 53 लाख पहुंच गई है। इसमें घरेलू व अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह के पैसेंजर शामिल हैं। उधर, परिवहन निगम की लग्जरी बसें स्कैनिया, वॉल्वो और जनरथ भी रेलयात्रियों को आकर्षित कर रही हैं। लखनऊ से संचालित ढाई सौ एसी बसें से सालाना एक लाख पैसेंजर यात्रा करते हैं।
-198 रेलवे स्टेशन हैं उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल में
-147 रेलवे स्टेशन पूर्वोत्तर रेलवे में