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यूपी: जीएसटी चोरी मामले में ईडी का बड़ा एक्शन, 11 ठिकानों से 3.80 करोड़ रुपये नकद बरामद; अब भेजेगी समन

Tue, 25 Aug 2026 08:23 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ
डिजिटल डेस्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Tue, 25 Aug 2026 08:23 PM IST
सार

जीएसटी चोरी मामले में ईडी ने 11 ठिकानों पर छापेमारी कर 3.80 करोड़ रुपये नकद और संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए। जांच में फर्जी बिलों और कंपनियों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट लेकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। सभी आरोपियों को सितंबर के पहले सप्ताह में पूछताछ के लिए समन भेजे जाएंगे।

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UP ED takes major action in GST evasion case cash recovered from 11 locations; summons to be
ईडी की छापेमारी के दौरान बरामद सोने-चांदी के आभूषण और नकदी - फोटो : एक्स/एएनआई

विस्तार

जीएसटी चोरी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापे के दौरान सभी ठिकानों से करीब 3.80 करोड़ रुपये नकदी बरामद की है। साथ ही तमाम ऐसे संदिग्ध दस्तावेज भी मिले हैं जो लंबे समय से फर्जी बिलिंग के जरिये जीएसटी चोरी करने से संबंधित हैं। ईडी की छापे की कार्रवाई करीब 24 घंटे बाद मंगलवार सुबह समाप्त हो गई। अब सभी आरोपियों को सितंबर माह के पहले सप्ताह में समन भेजकर पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा।

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ईडी ने सोमवार को मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और फरीदाबाद में आरोपियों के 11 ठिकानों पर छापा मारा था। इनमें मुख्य रूप से पूर्व बसपा एमएलसी शाहनवाज राणा और उनके करीबी परिजन, स्टील कारोबारी, चार्टर्ड अकाउंटेंट आदि शामिल थे। ईडी ने शाहनवाज राणा आदि पर वर्ष 2024 में जीएसटी के छापे में पकड़ी गई टैक्स चोरी और एफआईआर के आधार पर कार्रवाई की है। 

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27.02 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ

जांच में सामने आया कि बिना कोई सामान लिए फर्जी बिल काटकर फर्जी 'इनपुट टैक्स क्रेडिट' लिया गया और उसे आगे बढ़ाया गया। इससे सरकारी खजाने को 27.02 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। कंपनी ने फर्जी आईटीसी हासिल करने और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के इरादे से पहले से योजना बनाकर जाली बिल्टी (ट्रांसपोर्ट रसीदें) तैयार की थीं। 

वहीं कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान अस्तित्वहीन और फजी्र कंपनियों की एक चेन के जरिये लगभग 10.28 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी लिया और आगे बढ़ाया। इसका फायदा उठाने वाली फर्मों से मिले पैसे को उसी दिन ऐसी ही फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया। 

बाद में उसे कई अकाउंट्स के जरिये डायवर्ट करने के बाद अंत में नकद निकाल लिया गया। छापे के दौरान ईडी ने दस्तावेजों का विश्लेषण करने के साथ आरोपियों के बयान भी दर्ज किए हैं। इससे सामने आया है कि फर्जी आईटीसी का नेटवर्क ऐसी कई अन्य यूनिट्स तक फैला हुआ है। ईडी बरामद दस्तावेजों और डिजिटल डिवाइस की गहनता से पड़ताल कर रहा है।

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