निर्भया के गुनहगारों को 22 जनवरी को फांसी दी जाएगी। कोर्ट ने मंगलवार को इस फैसले पर मुहर लगा दी। लखनऊ के युवाओं में इसे लेकर अलग-अलग धारणा है। पर, सभी मानते हैं कि इस फैसले को सुनाने में काफी देर कर दी गई। सभी यह भी मानते हैं कि यह फैसला नजीर बनेगा और अपराधियों के मन में खौफ पैदा करेगा। पेश है रिपोर्ट...
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निर्भया के गुनहगारों को फांसी: लखनऊ के युवा बोले- नजीर बनेगा फैसला, खौफजदा होंगे अपराधी
Wed, 08 Jan 2020 06:29 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 08 Jan 2020 06:29 PM IST
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डॉ सुप्रिया सिंह,गोधूलि शर्मा व अनुराग पांडेय
- फोटो : अमर उजाला
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कविता पांडेय, स्टूडेंट, लविवि
- फोटो : अमर उजाला
दुष्कर्म जैसे मामलों में त्वरित हो फैसला
मृत्युदंड के फैसले से कम से कम लोगों में संदेश तो जाएगा कि अपराध की सजा मिलती है। दुष्कर्म या सामूहिक बलात्कार करने वाले दुराचारी अपराध को अंजाम देने से पहले कम से कम सोचेंगे तो सही। इतने लंबे इंतजार को देख कर फास्ट ट्रैक कोर्ट की जरूरत महसूस होती है। अपराध खासकर रेप जैसे मामलों में त्वरित फै सला जरूरी है।
कविता पांडेय, स्टूडेंट, लविवि
मृत्युदंड के फैसले से कम से कम लोगों में संदेश तो जाएगा कि अपराध की सजा मिलती है। दुष्कर्म या सामूहिक बलात्कार करने वाले दुराचारी अपराध को अंजाम देने से पहले कम से कम सोचेंगे तो सही। इतने लंबे इंतजार को देख कर फास्ट ट्रैक कोर्ट की जरूरत महसूस होती है। अपराध खासकर रेप जैसे मामलों में त्वरित फै सला जरूरी है।
कविता पांडेय, स्टूडेंट, लविवि
विदूषी अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे मामलों में फैसले में न हो देरी
हमें उम्मीद थी कि इस केस में फैसला जल्दी आएगा। हालांकि इससे यह तो नहीं कहा जा सकता कि दुष्कर्म के मामले रुक जाएंगे, लेकिन एक उम्मीद तो है। फैसले की खबर आने के बाद मेरे मन में ये सवाल उठा कि इतनी देर क्यों? निर्भया मामले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। लोगों ने न्याय की आस में इतना संघर्ष किया। मेरा मानना है कि ऐसे अपराध को अंजाम देेने वालों के खिलाफ फैसला लेने में देरी न की जाए। - विदुषी अग्रवाल, स्टूडेंट, आईटी कॉलेज
हमें उम्मीद थी कि इस केस में फैसला जल्दी आएगा। हालांकि इससे यह तो नहीं कहा जा सकता कि दुष्कर्म के मामले रुक जाएंगे, लेकिन एक उम्मीद तो है। फैसले की खबर आने के बाद मेरे मन में ये सवाल उठा कि इतनी देर क्यों? निर्भया मामले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। लोगों ने न्याय की आस में इतना संघर्ष किया। मेरा मानना है कि ऐसे अपराध को अंजाम देेने वालों के खिलाफ फैसला लेने में देरी न की जाए। - विदुषी अग्रवाल, स्टूडेंट, आईटी कॉलेज
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डॉ सुप्रिया सिंह
- फोटो : अमर उजाला
मील का पत्थर साबित होगा यह फैसला
निर्भया मामले में कोर्ट का फैसला उन महिलाओं की जीत है, जो किसी भी प्रकार की हिंसा या उत्पीड़न का शिकार हैं। यह फैसला उन पुरुषों के लिए सबक है जो महिलाओं के उत्पीड़न, दमन, और उन पर ताकत के इस्तेमाल को अपना अधिकार समझते हैं। सामूहिक दुष्कर्म जैसी घटनाएं न केवल महिलाओं के प्रति की गई हिंसा है, बल्कि यह सामूहिक दमन भी है। यह जघन्य अपराध है और इसके लिए मृत्युदंड का फैसला मील का पत्थर साबित होगा। उम्मीद है कि इस फैसले से लोगों की सोच बदलेगी जिससे हमारे समाज में निर्भया जैसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी।
डॉ. सुप्रिया सिंह, असि. प्रोफेसर, खुनखुनजी गर्ल्स डिग्री कॉलेज
निर्भया मामले में कोर्ट का फैसला उन महिलाओं की जीत है, जो किसी भी प्रकार की हिंसा या उत्पीड़न का शिकार हैं। यह फैसला उन पुरुषों के लिए सबक है जो महिलाओं के उत्पीड़न, दमन, और उन पर ताकत के इस्तेमाल को अपना अधिकार समझते हैं। सामूहिक दुष्कर्म जैसी घटनाएं न केवल महिलाओं के प्रति की गई हिंसा है, बल्कि यह सामूहिक दमन भी है। यह जघन्य अपराध है और इसके लिए मृत्युदंड का फैसला मील का पत्थर साबित होगा। उम्मीद है कि इस फैसले से लोगों की सोच बदलेगी जिससे हमारे समाज में निर्भया जैसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी।
डॉ. सुप्रिया सिंह, असि. प्रोफेसर, खुनखुनजी गर्ल्स डिग्री कॉलेज
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अनुराग पांडेय
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वैचारिक और मानसिक तौर पर बदलाव लाने होंगे
सैद्धांतिक तौर पर तो कोई भी सभ्य समाज मृत्युदंड के खिलाफ होता है, लेकिन कोर्ट के इस फैसले से महिलाओं को राहत मिलेगी और उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। जो भी लोग कानून की लड़ाई लड़ रहे हैं, उन्हें संतोष मिलेगा। साथ ही न्यायिक प्रक्रिया में उनका विश्वास बढ़ेगा। अपराध रुकेगा या नहीं, यह तो भविष्य बताएगा। अपराध को खत्म करने के लिए वैचारिक और मानसिक तौर बदलाव लाने होंगे। - अनुराग पांडेय, स्टूडेंट, बीबीएयू
सैद्धांतिक तौर पर तो कोई भी सभ्य समाज मृत्युदंड के खिलाफ होता है, लेकिन कोर्ट के इस फैसले से महिलाओं को राहत मिलेगी और उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। जो भी लोग कानून की लड़ाई लड़ रहे हैं, उन्हें संतोष मिलेगा। साथ ही न्यायिक प्रक्रिया में उनका विश्वास बढ़ेगा। अपराध रुकेगा या नहीं, यह तो भविष्य बताएगा। अपराध को खत्म करने के लिए वैचारिक और मानसिक तौर बदलाव लाने होंगे। - अनुराग पांडेय, स्टूडेंट, बीबीएयू