68,500 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में सरकार को बड़ी राहत देते हुए हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मंगलवार को सैकड़ों अभ्यर्थियों की 57 याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इन याचिकाओं में कट ऑफ अंक घटाने वाले शासनादेश को वापस लेने के आदेश को चुनौती दी गई थी। न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन ने आलोक कुमार समेत सैकड़ों अभ्यर्थियों और सरकारी वकील की दलीलें सुनने के बाद मामले में दखल देने से इनकार कर दिया।
68,500 शिक्षक भर्ती: कोर्ट ने खारिज की 57 याचिकाएं, परीक्षा के ठीक पहले बदला गया था कटऑफ
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लखनऊ खंडपीठ के न्यायमूर्ति इरशाद अली ने कहा कि शीर्ष कोर्ट का आदेश है कि खेल शुरू होने के बाद नियम नहीं बदले जा सकते। कोर्ट ने अंतरिम आदेश दिया था कि सरकार मूल विज्ञापन के अनुरूप रिजल्ट जारी कर सकती है। इसके बाद सरकार ने 45 व 40 फीसदी कटऑफ पर रिजल्ट जारी कर दिया।
सरकार ने पहले कट ऑफ 45/40 से 33/30 फीसदी किया, फिर वापस ले लिया था फैसला
याचियों का तर्क : शासनादेश वापस लेना कानून की मंशा के खिलाफ
वर्ष 2018 की इस शिक्षक भर्ती में सरकार ने अधिसूचना के बाद शासनादेश जारी कर कटऑफ घटा दिया था। हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार ने मूल विज्ञापन के अनुसार रिजल्ट जारी करते हुए 20 फरवरी, 2019 को कटऑफ कम करने का शासनादेश वापस ले लिया था। याचियों का कहना था कि अर्हता अंकों को घटाने वाले शासनादेश को वापस लिया जाना कानून की मंशा के खिलाफ था।
सरकार ने कहा अर्हता तय करना उसका हक
राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता कुलदीप पति त्रिपाठी का कहना था कि सरकार अर्हता अंकों को तय कर सकती है। कट ऑफ घटाने का आदेश वापस लेने के शासनादेश में कोई अवैधानिकता नहीं है।
46 हजार से अधिक शिक्षक कर रहे नौकरी इन पर कोई असर नहीं
68,500 रिक्त पदों के मुकाबले 41,556 अभ्यर्थी ही उत्तीर्ण हुए थे। 4 सितंबर, 2019 से नियुक्ति पत्र मिलने लगा। पुनर्मूल्यांकन के बाद संशोधित परिणाम के आधार पर अब तक 46 हजार से अधिक चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जा चुकी है।