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इस बार पूरे नौ दिन होगी मां की अराधना, यहां देखें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 05 Oct 2018 11:41 AM IST
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- फोटो : डेमो
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शारदीय नवरात्र में मां के आगमन की तैयारियां शहर में जोर-शोर से शुरू हो गई है। दस अक्तूबर से नवरात्र शुरू होने जा रहे हैं। इस बार नवरात्र में पूरे नौ दिन मां की आराधना होगी। नवरात्र के चलते शहर के तमाम देवी मंदिरों में रंगीन रोशनी की सजावट के साथ ही साफ-सफाई का काम तेज हो गया है। आचार्य प्रदीप ने बताया कि इस बार नवरात्र पूरे नौ दिन दस से 18 अक्तूबर तक रहेंगे। 10 से प्रतिपदा का पहला नवरात्र होगा, पक्ष में पूरे दिन होने के चलते इस बार पूरे नौ दिन के नवरात्र रहेंगे। 17 को अष्टमी और 18 को महानवमी रहेगी। मंदिरों में नवरात्र की रौनक बिखरेगी तो नगर के तमाम दुर्गा पूजा पंडालों का भी सजना शुरू हो गया है। काली बाड़ी मंदिर समेत अन्य पंडालों में भी आयोजनों को लेकर तैयारियां जोरों पर आई हैं।
चौक कालीजी मंदिर में नवरात्र की तैयारियों के तहत लाइट लगाते कर्मचारी
- फोटो : amar ujala
मंदिरों में साज-सजावट का काम शुरू
नवरात्र के चलते चौक के बड़ी कालीजी मंदिर, छोटी कालीजी मंदिर, संतोषी माता मंदिर में सजावट का काम शुरू हो गया है। सभी दिन थीम शृंगार और पूजन के लिए चर्चित मां बाघंबरी पूर्वी देवी मंदिर, शास्त्रीनगर दुर्गा मंदिर में भी हर साल की तरह फल, सब्जियों, खिलौनों, मेवों मसालों से शृंगार होंगे। मदेयगंज दुर्गा मंदिर, चिनहट के मां जानकी मंदिर, कैसरबाग दुर्गा मंदिर, हाथी बाबा वाले मंदिर, संदोहन माता मंदिर, संकटा देवी मंदिर, त्रिवेणीनगर योगी नगर दुर्गा मंदिर, समेत डालीगंज, अलीगंज, महानगर, इंदिरानगर, गोमतीनगर के मंदिरों में भी तैयारियां आने वाले दिनों में जोर पकड़ेंगी।
नवरात्र के चलते चौक के बड़ी कालीजी मंदिर, छोटी कालीजी मंदिर, संतोषी माता मंदिर में सजावट का काम शुरू हो गया है। सभी दिन थीम शृंगार और पूजन के लिए चर्चित मां बाघंबरी पूर्वी देवी मंदिर, शास्त्रीनगर दुर्गा मंदिर में भी हर साल की तरह फल, सब्जियों, खिलौनों, मेवों मसालों से शृंगार होंगे। मदेयगंज दुर्गा मंदिर, चिनहट के मां जानकी मंदिर, कैसरबाग दुर्गा मंदिर, हाथी बाबा वाले मंदिर, संदोहन माता मंदिर, संकटा देवी मंदिर, त्रिवेणीनगर योगी नगर दुर्गा मंदिर, समेत डालीगंज, अलीगंज, महानगर, इंदिरानगर, गोमतीनगर के मंदिरों में भी तैयारियां आने वाले दिनों में जोर पकड़ेंगी।
- फोटो : डेमो
काली बाड़ी मंदिर में दिखेगा मां छिन्न मस्तिका का नजारा
काली बाड़ी मंदिर ट्रस्ट की लाइटनिंग भी दुर्गा पूजा का खास आकर्षण रहेगी। इस बार दुर्गा पूजा में माता के तमाम नजारे दिखेंगे। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष गौतम भट्टाचार्य ने बताया कि टीम बृहस्पतिवार को ही पहुंची है। हमेशा की तरह चंदरनगर की रोशनी से सजेगा। सात बड़े लाइट द्वार होंगे। रंग-बिरंगी विद्युत रोशनी में बंगाल की झलक के अलावा बंगाल विष्णुपुर में विराजी मां छिन्न मस्तिका का दरबार सजाया जाएगा। सात प्रकार की मैकेनिकल लाइटनिंग झांकी भी दिखाई देगी। यह आठ अक्तूबर से जलना शुरू होगी, जो 19 अक्तूबर विसर्जन तक चलेगी।
काली बाड़ी मंदिर ट्रस्ट की लाइटनिंग भी दुर्गा पूजा का खास आकर्षण रहेगी। इस बार दुर्गा पूजा में माता के तमाम नजारे दिखेंगे। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष गौतम भट्टाचार्य ने बताया कि टीम बृहस्पतिवार को ही पहुंची है। हमेशा की तरह चंदरनगर की रोशनी से सजेगा। सात बड़े लाइट द्वार होंगे। रंग-बिरंगी विद्युत रोशनी में बंगाल की झलक के अलावा बंगाल विष्णुपुर में विराजी मां छिन्न मस्तिका का दरबार सजाया जाएगा। सात प्रकार की मैकेनिकल लाइटनिंग झांकी भी दिखाई देगी। यह आठ अक्तूबर से जलना शुरू होगी, जो 19 अक्तूबर विसर्जन तक चलेगी।
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अश्व पर होगा मां का आगमन हाथी पर गमन
आचार्य प्रदीप ने बताया कि इस बार मां का आग्मन अश्व पर हो रहा, जबकि गमन हाथी पर होगा। अश्व पर आगमन होना अच्छा नहीं माना जा रहा है इससे देश में बाह्य प्रतिघात, मौसमी उठापटक, तेज आंधी-अंधड़ के अलावा राजा को हानि हो सकती है जबकि गज गमन होने का फल शुभ है।
आचार्य प्रदीप ने बताया कि इस बार मां का आग्मन अश्व पर हो रहा, जबकि गमन हाथी पर होगा। अश्व पर आगमन होना अच्छा नहीं माना जा रहा है इससे देश में बाह्य प्रतिघात, मौसमी उठापटक, तेज आंधी-अंधड़ के अलावा राजा को हानि हो सकती है जबकि गज गमन होने का फल शुभ है।
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ऐसे करें घट स्थापना व पूजन
- नवरात्र के पहले दिन पूजा स्थल को लीपने के बाद स्वच्छ मिट्टी से वेदी बनाएं।
- वेदी में सात प्रकार के अनाज या जौ-गेहूं को बोने के बाद उसमें सामर्थ्य के अनुसार मिट्टी या धातु का कलश स्थापित करें।
- इसके बाद उसमें देवी प्रतिमा स्थापित करें।
- घट स्थापना के बाद आम के पल्लव और उनके ऊपर अनाज की कटोरी रखकर दीपक की स्थापना करे। दीपक पर चावल-अक्षत चढ़ाए।
- पूर्व की ओर मुख करके देशी घी का दीपक जलाएं। कलश को नैवेद्य चढ़ाएं और पुष्प चढ़ाकर मां की आराधना करें।
- आरती उतारें और मइया के कीर्तन करें।
- देवी भक्ति तरंगिणी और देवी पुराण के मुताबिक दक्षिण मुख की देवी का पूजन शुभ फल देने वाला और पूर्व मुख देवी का पूजन जय प्रदान करने वाला होता है। जबकि पश्चिम मुख देवी का पूजन सदा स्थापन उत्तम रहता है।
- घट स्थापन के बाद यथाशक्ति नवाक्षर मंत्र ‘ऊं दुर्गे दुर्गे रक्षिणि स्वाहा’ का जप करना चाहिए।
- नवरात्र के पहले दिन पूजा स्थल को लीपने के बाद स्वच्छ मिट्टी से वेदी बनाएं।
- वेदी में सात प्रकार के अनाज या जौ-गेहूं को बोने के बाद उसमें सामर्थ्य के अनुसार मिट्टी या धातु का कलश स्थापित करें।
- इसके बाद उसमें देवी प्रतिमा स्थापित करें।
- घट स्थापना के बाद आम के पल्लव और उनके ऊपर अनाज की कटोरी रखकर दीपक की स्थापना करे। दीपक पर चावल-अक्षत चढ़ाए।
- पूर्व की ओर मुख करके देशी घी का दीपक जलाएं। कलश को नैवेद्य चढ़ाएं और पुष्प चढ़ाकर मां की आराधना करें।
- आरती उतारें और मइया के कीर्तन करें।
- देवी भक्ति तरंगिणी और देवी पुराण के मुताबिक दक्षिण मुख की देवी का पूजन शुभ फल देने वाला और पूर्व मुख देवी का पूजन जय प्रदान करने वाला होता है। जबकि पश्चिम मुख देवी का पूजन सदा स्थापन उत्तम रहता है।
- घट स्थापन के बाद यथाशक्ति नवाक्षर मंत्र ‘ऊं दुर्गे दुर्गे रक्षिणि स्वाहा’ का जप करना चाहिए।