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तीन तलाक पर कोर्ट के साथ मुस्लिम महिलाएं, कहा- पर्सनल लॉ के मुंह पर तमाचा

Fri, 09 Dec 2016 10:20 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 09 Dec 2016 10:20 AM IST
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muslim women on court decision on triple talaaq.

तीन तलाक पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का मुस्लिम महिलाओं ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि शरीयत के नाम पर तीन तलाक की जिद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का गैर जिम्मेदाराना कदम था। हाईकोर्ट का नया फैसला बोर्ड के मुंह पर तमाचा है। बोर्ड को कुरान की हिदायतों के अनुसार तीन तलाक के मामले में अमल करना चाहिए और शरीयत की जिद छोड़ देनी चाहिए।

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गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की याचिका खारिज करते हुए उसे फटकार लगाई और कहा कि कोई भी लॉ देश के संविधान से ऊपर नहीं हो सकता है। शरीयत के नाम पर तीन तलाक महिलाओं पर क्रूरता है। यह महिलाओं के अधिकारों का हनन है। इस फैसले के बाद अमर उजाला ने शहर की कुछ महिलाओं से बात की।

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कुरान को मानें न कि किसी की बनाई शरीयत को
समाज सेविका ताहिरा हसन का कहना है कि तीन तलाक मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार पर्सनल लॉ बोर्ड के मुंह पर तमाचा है। अब भी वक्त है कि बोर्ड जग हंसाई से बचे और कुरान ए मुकद्दस के आधार पर तलाक को माने, न कि किसी की बनाई शरीयत को, जिससे मुस्लिम महिलाओं पर अत्याचार व उत्पीड़न हो रहा है। चंद मुस्लिम उलमा को शरीयत के नाम पर इस्लाम को बदनाम करने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। पढ़े-लिखे मौलानाओं को आगे आकर इन्हें रोकना चाहिए।

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महिलाओं की सुन लेते तो न होना पड़ता शर्मिंदा
महिला मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर का कहना है कि पर्सनल लॉ बोर्ड ने महिलाओं की सुनी होती तो हाईकोर्ट में उसे शर्मिंदा नहीं होना पड़ता। वह गैर इस्लामी शरीयत पर अड़ा है। नतीजा सामने है। संभल जाएं। कुरान के तीन तलाक की शरा पर अमल करें। कुरान में कहीं भी एसएमएस व वाट्सएप पर तलाक की बात नहीं आई तो यह कैसे इन पर होने वाले तीन तलाक पर मोहर लगा रहे हैं। पर्सनल लॉ बोर्ड इस्लाम को भी बदनाम कर रहा है। वह क्यों नहीं मान लेता कि एक साथ तीन तलाक गैर शरई और गैर इस्लामी है।

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महिलाओं को विकास की राह दिखाने वाला फैसला
इस पर सामाजिक कार्यकर्ता नाईस हसन का कहना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला भारतीय महिलाओं को विकास की राह पर ले जाने वाला है। इसने पर्सनल लॉ बोर्ड को कठघरे में खड़ा कर दिया है। कोर्ट ने पर्सनल लॉ बोर्ड पर जो सवाल उठाया है वह काबिल ए तारीफ है। कोर्ट ने जिस तरह कुरान की लिखी बात को जरूरी बताते हुए बोर्ड को फटकार लगाई है उसके बाद उसे तीन तलाक की अपनी झूठी शरीयत को छोड़ देना चाहिए।

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