एक साथ तीन तलाक पर पाबंदी लगाने वाले मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019 को लोकसभा के बाद मंगलवार को राज्यसभा में भी पारित किए जाने पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अब सुप्रीम कोर्ट का सहारा लेने की बात कही है। वहीं तीन तलाक कानून की हिमायत में आंदोलन कर रहीं मुस्लिम महिलाओं और उलमा का कहना है कि बिल में कई ऐसे बिंदु हैं जिन्हें मांग के बावजूद हटाया नहीं गया। ऐसे में भविष्य ही तय करेगा कि तीन तलाक पर कानून बनने के बाद यह महिलाओं को कितना फायदा पहुंचाने वाला साबित होगा।
तीन तलाक बिल पास होने के बाद मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधि बोले- अब सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती
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भविष्य में तय होगा कानून कितना फायदेमंद
ऑल इंडिया इमाम काउंसिल के महासचिव मौलाना सुफियान निजामी ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात कहने का हक है। संसद में जिसका बहुमत होता है उसकी जीत होती है। लिहाजा एक सांविधानिक तरीके से तीन तलाक बिल पास हुआ है। भविष्य में इस बात का अंदाजा हो जाएगा कि यह बिल महिलाओं के लिए फायदेमंद है या नुकसानदेह। राज्यसभा से तीन तलाक बिल पास करवाने में उन पार्टियों के सदस्यों का भी योगदान है जिन्होंने सदन से वॉकआउट किया।
महिलाओं के सवालों को किया नजरअंदाज
मुस्लिम वीमेन लीग की महासचिव नाईश हसन ने कहा कि तीन तलाक के खिलाफ कानून में महिलाओं को फायदा देने वाले सवालों को शामिल करवाने की हमारी मांग थी। हम चाहते थे कि बिल में सुधार किया जाए, सरकार ने उसे नजरअंदाज किया। अब बिल राज्यसभा से पास हो गया है। ऐसे में तीन तलाक के खिलाफ संघर्ष कर रहीं महिलाओं के लिए शोध का विषय होगा कि इस कानून से मुस्लिम महिलाओं को फायदा हो रहा है या नुकसान। इसे समझने के लिए हम लोगों को एक साल तक का समय लग सकता है।
डर का माहौल बनने से रुकेगा महिलाओं का शोषण
बज्म-ए-ख्वातीन की अध्यक्ष बेगम शहनाज सिदरत ने बिल का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार ने बिल में जमानत का प्रावधान शामिल किया है, जो ठीक है। कांग्रेस के शासनकाल में महिलाओं के हित के बारे में नहीं सोचा गया। यह कानून शरियत पर हमला नहीं है बल्कि इससे डर का माहौल बनेगा जिसकी वजह से महिलाओं का शोषण रुकेगा। जो लोग शरियत पर अमल करते हैं, उन्हें इस कानून की कोई जरुरत ही नहीं है। शरियत पर अमल न करने वालों में इस कानून से डर जरूर बनेगा।
लीगल कमेटी की बैठक में तय होगी रणनीति
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव जफरयाब जीलानी का कहना है कि तीन तलाक बिल भाजपा सरकार के एजेंडे में शामिल था। उसे इस बिल को हर कीमत पर पास करवाना ही था। तीन तलाक पर कानून बनाकर यूनिफॉर्म सिविल कोड की तरफ केन्द्र सरकार पहला कदम बढ़ाना चाहती है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पास इस बिल को रोकने के लिए दो रास्ते थे। एक यह कि वो सुप्रीम कोर्ट जाए और दूसरा राज्यसभा में इसे रुकवाने की कोशिश करे। हम दूसरे विकल्प पर काम कर रहे थे। हालांकि, अब बिल राज्यसभा से पास हो गया है तो हम इसको सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करेंगे। बोर्ड की लीगल कमेटी की इस संबंध में जल्द ही बैठक बुलाई जाएगी जिसमें आगे की रणनीति तय होगी।