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मौलाना व मुस्लिम महिलाओं ने किया तीन तलाक का विरोध, कहा- किसी बिल पर नहीं, शरीयत पर चलेंगे

Sat, 22 Jun 2019 06:19 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 22 Jun 2019 06:19 PM IST
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muslim leaders opposed triple talaq bill.

उलमा और तीन तलाक के खिलाफ संघर्ष कर रहीं मुस्लिम महिलाओं का कहना है कि सरकार सियासी फायदे के लिए बिल को बार-बार लोकसभा में पेश कर रही है। इससे मुस्लिम महिलाओं को कोई लाभ होने वाला नहीं है। उन्होंने इस मुद्दे पर अमर उजाला ने बात की।

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मौलाना सुफियान निजामी - फोटो : amar ujala

महिलाओं को राहत से कुछ लेना-देना नहीं
इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के प्रवक्ता मौलाना सुफियान निजामी का कहना है कि यह बिल पूरी तरह से राजनीतिक है। इसका समाज सुधार या महिलाओं को राहत से कुछ लेना-देना नहीं है। केंद्र सरकार का मकसद बिल के जरिये सियासी फायदा लेना है। यही वजह है कि तमाम विरोध के बावजूद सरकार इसे बार-बार लोकसभा में पेश कर रही है। केंद्र सरकार बिल की खामियों को दूर कर इस पर कानून बनाए ताकि लोग इसे कुबूल कर सकें।

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मौलाना मुफ्ती अबुल इरफान मियां फरंगी महली - फोटो : amar ujala

इदारा शरिया हनफिया फरंगी महल के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती अबुल इरफान मियां फरंगी महली का कहना है कि मजहबी मामलों में मुसलमान किसी  बिल पर नहीं, बल्कि शरीयत पर अमल करेगा। मुस्लिम महिलाओं की सामाजिक समस्या दूर करने के नाम पर लाया जा रहा मौजूदा बिल किसी भी तरह से महिलाओं को फायदा देने वाला नहीं है। इसके पारित होने से मुस्लिम महिलाओं का नुकसान ज्यादा होगा।

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- फोटो : amar ujala

तीन तलाक अपराध तो कैसे हो पाएगी सुलह
ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर का कहना है कि केंद्र सरकार ने तीन तलाक पर अध्यादेश लाकर उसे अपराध बना दिया है। ऐसे में पति व पत्नी के बीच सुलह की गुंजाइश ही खत्म हो जाएगी। हमने सरकार से ऐसे कानून की मांग रखी थी जो शरीयत के कानून से न टकराए।   कानून ऐसा होना चाहिए कि शौहर एक साथ तीन तलाक देने से डरे और सुलह की गुंजाइश बनी रहे।

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इन्होंने किया स्वागत

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शहनाज सिदरत - फोटो : amar ujala

इन्होंने किया स्वागत
कानून से तीन तलाक के मामलों में आएगी कमी
बज्म-ए-खवातीन की अध्यक्ष बेगम शहनाज सिदरत का कहना है कि एक साथ तीन तलाक को अपराध बनाने से ऐसे मामलों में कमी आएगी। बिल में सजा के प्रावधान से लोगों में डर बना रहेगा। हमारी लड़ाई तलाकशुदा महिलाओं की आर्थिक मदद की भी है। महिला व उसके बच्चों के गुजारे की व्यवस्था प्राथमिकता पर होनी चाहिए।

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