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पूरा हो गया 'लखनऊ मेट्रो का सफर', बस... उठने ही वाला है पर्दा

Sun, 20 Nov 2016 08:33 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 20 Nov 2016 08:33 PM IST
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metro coaches reach lucknow.

इंतजार की घड़ियां खत्म हो गईं। अपनी मेट्रो ट्रायल के लिए लखनऊ पहुंच चुकी है। शनिवार को पहली ट्रेन के सभी चार कोच आ गए। चार अलग-अलग 48 चक्का के ट्रकों पर लादकर इन कोचों को यहां लाया गया। छह दिन तक करीब 2100 किमी का सफर पूरा कर सड़क मार्ग से यह कोच चेन्नई से लखनऊ लाए गए। चेन्नई में फ्रांस की कंपनी अलस्टॉम के श्रीसिटी प्लांट में इन कोच का निर्माण किया गया है।

metro coaches reach lucknow.

शनिवार शाम लखनऊ की सीमा में सभी कोच पहुंच गए। अभी कोचों को आमौसी एयरपोर्ट के पास ही लखनऊ-कानपुर हाईवे पर रोका गया है। कोचों को पूरी तरह कवर किया गया है। ट्रकों को लेकर आए स्टाफ ने बताया कि ट्रैफिक कम होने के बाद स्थानीय पुलिस की हरी झंडी मिलते ही रविवार तड़के इन कोचों को लखनऊ मेट्रो के ट्रांसपोर्टनगर डिपो में पहुंचा दिया जाएगा।

metro coaches reach lucknow.

यहां भी बनाया रिकॉर्ड
सबसे तेज दो साल दो महीने में प्राथमिकता सेक्शन का निर्माण करने वाली लखनऊ मेट्रो ने अब एक और रिकॉर्ड बना लिया है। अलस्टॉम से एलएमआरसी को 30 नवंबर तक कोच की आपूर्ति होनी थी। पर इससे पहले ही कोच मिल गए।  पहले 23 नवंबर तक कोच देने के लिए तैयार हुई कंपनी ने 18 नवंबर को कोच की आपूर्ति दी है। यानी, 12 दिन पहले लखनऊ कोच आ गए।

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छह दिन में लखनऊ आए कोच
चार नवंबर को एक कार्यक्रम में अलस्टॉम ने मंत्री यासर शाह की अगुवाई में गए प्रतिनिधिमंडल को ट्रेन की चाबी दी गई थी। इसके बाद 12 नवंबर को कोच चेन्नई से रवाना हुए। कोच लेकर आए एक ट्रक ड्राइवर ने बताया कि दिन-रात ट्रक चले हैं। ट्रक का स्टाफ छह दिन से ठीक से सो भी नहीं पाया।

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रेडलाइन के लिए लाल, भूरे रंग के कोच
लखनऊ के नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर को रेडलाइन का नाम दिया गया है। इस रेडलाइन के लाल रंग का उपयोग कोच को तैयार करने में किया गया है। ट्रेन केफ्रंट और साइड वॉल दोनों में लाल और ग्रे रंगों का उपयोग किया गया है। आधुनिक तकनीक से बनी इस ट्रेन को बिना ड्राइवर के भी कंट्रोल किया जा सकता है। इससे ट्रेन के संचालन को आसान और तेज बनाया जा सकेगा। इसकेलिए एक बैकअप कंट्रोल रूम भी डिपो में बनाया गया है।

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